बिजनेस स्टैंडर्ड - गलत संदेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 17, 2018 11:12 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

गलत संदेश

संपादकीय /  July 05, 2018

हाल के दिनों में लोगों को बच्चा चोरी के संदेह में मारे जाने की घटनाओं के बाद व्हाट्सऐप की काफी आलोचना हो रही है। यह वैसा ही है जैसे मूल मुद्दे की अनदेखी करके गैर जरूरी बातों को तवज्जो दी जाए। यह सच है कि इस नि:शुल्क संदेश प्रसारित करने वाली सेवा ने गलत सूचनाओं को तेजी से फैलाने का मंच दिया है लेकिन इससे यह नहीं स्पष्टï होता कि आखिर क्यों इतनी बड़ी तादाद में आम भारतीय इस कदर असुरक्षा से भर गए कि उन्हें कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेना पड़ा। कैसे उनमें इतना साहस आ गया कि वे दिन दहाड़े अपने साथी नागरिकों की जान ले सके। इससे यह भी समझ में नहीं आता है कि आखिर क्यों सरकार ने इसी मंच का इस्तेमाल करते हुए नुकसान पहुंचाने वाली अफवाहों का विरोध नहीं किया और बाद में घटी भयावह हिंसा को रोका नहीं। जम्मू से बेंगलूरु तक और त्रिपुरा से गुजरात तक ऐसी घटनाएं लगातार घट रही हैं और ऐसा लगता है उन्हें एक तरह की विकृत स्वीकार्यता मिल गई है। आम धारणा है कि यह समस्या कानून व्यवस्था का मसला है जिसे बेहतर पुलिस व्यवस्था के जरिये हल किया जा सकता है। यह गहन सामाजिक संकट को चिह्निïत करने में हमारी नाकामी को दिखाता है। 

 
उत्तर प्रदेश के दादरी में 60 वर्षीय मोहम्मद अखलाक को उनके घर में कथित तौर पर गोवंश की हत्या के चलते भीड़ ने जान से मार दिया था। तब से तीन साल बीत चुके हैं और देश में ऐसी हिंसा की वजह बदलती रही हैं। कई राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध लगाए जाने ने भी असामाजिक तत्त्वों द्वारा मुस्लिमों, खासतौर पर पशुपालन से जुड़े मुस्लिमों और दलितों पर हमले की एक वजह दे दी है। हमलावरों को मानो दंड का कोई भय ही नहीं है। अब यह सिलसिला बच्चों के अपहरण तक पहुंच गया है। यह बताता है कि भारतीय समाज में दूसरों को लेकर असहिष्णुता कितनी बढ़ती जा रही है। निश्चित तौर पर ऐसी हर घटना के बाद केंद्र और राज्य के नेताओं के अनुत्साह को देखते हुए यह कहना सही होगा कि इस नई उभरती संस्कृति के लिए हमारा राजनीतिक प्रतिष्ठïान भी कम जवाबदेह नहीं है। 
 
उदाहरण के लिए अखलाक की मौत बिहार विधानसभा चुनाव के दिनों में हुई थी। उस वक्त गोहत्या का मुद्दा चुनाव अभियान में मुखर था। घटना के एक सप्ताह बाद प्रधानमंत्री ने जो बयान दिया था वह कतई संतोषजनक नहीं था। उन्होंने घटना की स्पष्टïतौर पर निंदा करने के बजाय एक अस्पष्टï सा वक्तव्य जारी किया कि भारतीयों को एक दूसरे से नहीं बल्कि गरीबी से लडऩे की आवश्यकता है। अगर उनकी बातों में सांप्रदायिक लोगों के खिलाफ कोई संदेश था तो भी शायद वह अपराधियों और उनके समर्थकों तक नहीं पहुंचा। एक वर्ष बाद जब उन अपराधियों में से एक की मृत्यु हुई तो गांव के लोगों ने उसके शव को तिरंगे में लपेटकर उसे शहीद की तरह प्रस्तुत किया। 
 
राजस्थान में एक मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता की उस वक्त हत्या कर दी गई जब वह लोगों को खुले में शौच कर रही महिलाओं की तस्वीरें खींचने से रोक रहा था। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। बिना किसी प्रमाण के उन्होंने यह तक कह दिया कि हो सकता है उसकी हत्या न की गई हो। यह तब हुआ जबकि कई दिनों से पीडि़त को जिंदा जलाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे थे। त्रिपुरा में एक राज्यमंत्री ने अनजाने ही यह कह कर हिंसा को भड़का दिया कि एक मृत मिले बच्चे के गुर्दे निकाले गए थे। राजनीतिक प्रतिष्ठïान द्वारा ऐसी घटनाओं पर अंकुश न लगा पाने से यह संकेत गया है कि ऐसी हत्याओं को बरदाश्त किया जा सकता है। खासतौर पर अगर ऐसी घटना अल्पसंख्यकों, आदिवासियों या दलितों के साथ घटित हो।
Keyword: mob lynching, whatsapp,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पीसीए नियमों में ढील देने पर सहमत होगा आरबीआई?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.