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सेबी से स्पष्टीकरण चाहती है आईसीआईसीआई एमएफ

जश कृपलानी और श्रीमी चौधरी / मुंबई July 05, 2018

परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल म्युचुअल फंड ने समूह की कंपनी आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की शेयर बिक्री से हुए घाटे के कारण यूनिटधारकों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से संपर्क किया है। इस सप्ताह के आरंभ में बाजार नियामक ने इस फंड हाउस को निर्देश दिया था कि वह इस ब्रोकिंग एवं निवेश बैंकिंग फर्म के आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) में शामिल पांच योजनाओं को सालाना 15 फीसदी ब्याज के साथ 2.4 अरब रुपये लौटाए। 
 
एक सूत्र के अनुसार, 'यह फंड हाउस तमाम मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है जैसे क्या उसे खुली बाजार में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के शेयरों की बिक्री कर घाटे की भरपाई करनी चाहिए अथवा क्या उसे इन शेयरों को अपने बहीखाते पर हस्तांतरित कर नुकसान के लिए भुगतान करना चाहिए।' इस परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, 'हम नियामक की संतुष्टिï के लिए इस मामले से निपटने के लिए सेबी से बातचीत कर रहे हैं।' आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का शेयर आज बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 291 रुपये के निचले स्तर तक लुढ़क चुका है जबकि आईपीओ के समय उसका शेयर मूल्य 520 रुपये था। 
 
आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल एमएफ ने मार्च में अपने आईपीओ के साथ पूंजी बाजार में उतरी थी और उसने 6.4 अरब रुपये जुटाए थे। मौजूदा भाव पर इस फंड हाउस को अपने निवेश पर काफी मार्क-टु-मार्केट घाटा उठाना पड़ा है। आईपीओ के दौरान आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल एमएफ ने दो बार बोल लगाई थी जो पहले दिन 4 अरब रुपये और अंतिम दिन 2.4 अरब रुपये रहे थी। सेबी के अनुसार, अंंतिम दिन की बोली यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि वह आईपीओ विफल नहीं रहे जो निवेशकों के हित में नहीं था और आचार संहिता के लिहाज से भी सही नहीं थी। सेबी की आचार संहिता के अनुसार, ट्रस्टी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी अपने किसी सहायक कंपनी को किसी भी तरह अनुचित फायदा न पहुंचा सके जो यूनिटधारकों के हितों के प्रतिकूल हो।
 
आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल एमएफ के वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आईपीओ को समर्थन देने की पहल इस फंड हाउस के लिए काफी महंगी साबित हो सकती है। साल 2017-18 में इस फंड हाउस ने 6.25 अरब रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था। मार्च 2018 के अनुसार कंपनी शुद्ध हैसियत 8.23 अरब रुपये है। यदि मान लेते हैं कि फंड हाउस को इस मद में निवेशकों को करीब 2.5 अरब रुपये का पुर्भुगतान करना पड़ सकता है तो यह रकम पिछले वित्त वर्ष के उसके मुनाफे का करीब 40 फीसदी है। इस प्रकार निवेशकों के मुआवजे की रकम उसकी शुद्ध हैसियत का करीब एक तिहाई होगी। विश्लेषकों का कहना है कि वित्तीय नुकसान के अलावा फंड हाउस को निवेशकों का भरोसा भी खोना पड़ सकता है।
Keyword: ICICI, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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