बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्वाचित सरकार की सलाह से काम करें उप राज्यपाल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, January 25, 2020 03:47 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

निर्वाचित सरकार की सलाह से काम करें उप राज्यपाल

आदिति फडणीस और एम जे एंटनी / नई दिल्ली 07 04, 2018

सरकार के कामकाज में बाधा न पहुंचाएं उप राज्यपाल
निरंकुशता और अराजकता के लिए कोई जगह नहीं
उप राज्यपाल को दी जानी चाहिए सभी फैसलों की जानकारी, लेकिन हर मामले में जरूरी नहीं है उनकी सहमति
सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़कर दिल्ली सरकार को अन्य विषयों पर कानून बनाने और शासन करने का अधिकार

बिजनेस स्टैंडर्ड निर्वाचित सरकार की सलाह से काम करें उप राज्यपालउच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि दिल्ली के उप राज्यपाल को निर्वाचित सरकार की सलाह और मदद से काम करना चाहिए। न्यायालय के इस फैसले से दिल्ली की राजनीति में नया मोड़ आना तय है। शीर्ष न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को पलट दिया जिसमें दिल्ली को केंद्रशासित क्षेत्र और उपराज्यपाल को उसका प्रशासनिक प्रमुख बताया गया था। न्यायालय के इस फैसले का पुदुचेरी जैसे दूसरे केंद्रशासित प्रदेशों पर भी प्रभाव पड़ेगा जहां उप राज्यपाल किरण बेदी और मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी के बीच अधिकारों को लेकर रस्साकशी चल रही है।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से आम आदमी पार्टी (आप) में जश्न का माहौल है। राजनीति कार्यकर्ताओं और विश्लेषकों का मानना है कि उच्चतम न्यायालय ने केंद्रशासित प्रदेश खासकर दिल्ली के मामले में दशकों पुरानी इस धारणा को तोड़ दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय उप राज्यपाल के जरिये दिल्ली को चलाता है। न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़कर दिल्ली सरकार को अन्य विषयों पर कानून बनाने और शासन करने का अधिकार है। उप राज्यपाल इसमें बाधा नहीं डाल सकते हैं।

अलबत्ता न्यायालय ने यह भी कहा कि निरंकुशता और अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। आप सरकार और उप राज्यपालों के बीच अधिकारों को लेकर लंबे समय से चली आ रही रस्साकशी के बाद न्यायालय का यह फैसला आया है। आप का आरोप था कि उसकी सरकार के फैसलों को पलटा जा रहा है या फिर विधानसभा में चर्चा के बाद पारित कानूनों को लागू नहीं किया जा रहा है। यह विवाद इतना बढ़ चुका था कि आप के विधायकों ने दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट भी कर डाली। 

इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आरोपी हैं।  मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले 5 न्यायाधीशों के संविधान पीठ ने कहा कि उपराज्यपाल को निर्वाचित सरकार के कामकाज में बाधा नहीं डालनी चाहिए। दो न्यायाधीशों न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ने फैसले पर सहमति जताई। न्यायालय ने कहा कि मंत्रिमंडल के सभी फैसलों के बारे में उप राज्यपाल को जानकारी दी जानी चाहिए लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी सहमति की जरूरत है।

अलबत्ता न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की राय इससे अलग थी। कई महीनों से केजरीवाल सरकार भी यही दलील दे रही थी कि पूर्ण राज्य का मतलब निर्वाचित सरकार की प्राथमिकता है। न्यायालय के फैसले के बाद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया कि अब राज्य सरकार को सभी फाइलें उपराज्यपाल को भेजने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि राजनीतिक समीकरण को देखते हुए वह फैसलों को पलट देंगे। अलबत्ता दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने कहा कि जिस तरह से सरकार चलाई जा रही है, उसमें कमी है।

उन्होंने कहा कि वह 15 साल तक सत्ता में रही लेकिन उनका उपराज्यपाल के साथ कभी कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ। कांग्रेस के नेता अजय माकन ने कहा कि अब उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में अधिकारों को स्पष्टï कर दिया है और उम्मीद है कि दिल्ली में 4 साल से ठप पड़े विकास के काम फिर शुरू हो जाएंगे।

 दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि उच्चतम न्यायालय ने स्थिति स्पष्टï कर दी है। केजरीवाल धरने और अराजकता की सरकार चला रहे हैं। उच्चतम न्यायालय का फैसला केजरीवाल को गहरा झटका है। अब उन्हें अराजकता की राजनीति छोड़कर सरकार चलाने की तरफ ध्यान देना चाहिए।  केजरीवाल सरकार और केंद्र के प्रतिनिधि उप राज्यपाल के बीच कई अधिकारों को लेकर विवाद है। इनमें नौकरशाहों की तैनाती और स्थानांतरण का मुद्दा भी शामिल है। 

Keyword: delhi, aap, arvind kejriwal, court, LG, उच्चतम न्यायालय उप राज्यपाल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कर संग्रह में कमी से बढ़ेगी सरकार की मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.