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किसान पर सरकार मेहरबान

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 07 04, 2018

खरीफ  के समर्थन मूल्य में भारी इजाफा, खजाने पर पड़ेगा 150 अरब रुपये का बोझ

कृषि संकट के कारण चौतरफा आलोचना झेल रही नरेंद्र मोदी सरकार ने 2018-19 सत्र के लिए खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में आज भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। इससे खाद्य महंगाई बढऩे की आशंका है जो मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में काबू में रही है। इस साल के अंत में 3 राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं जहां भाजपा के सामने अपनी सत्ता को बचाने की कड़ी चुनौती है। यही वजह है कि एमएसपी बढ़ाने के मोदी सरकार के इस बहुप्रतीक्षित फैसले को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है।

इन राज्यों में किसान खरीफ में तिलहन और दलहन के साथ-साथ बाजरा जैसे मोटे अनाज की खेती करते हैं। हाल के वर्षों में इन फसलों की कीमतों में गिरावट के कारण किसानों ने व्यापक आंदोलन किए हैं। आधिकारिक रूप से एमएसपी बढ़ाने से सरकारी खजाने पर 150 अरब रुपये का बोझ पडऩे की संभावना है लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगर इसमें तिलहन और दलहन की खरीद कीमत को भी जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा 350 से 370 अरब रुपये तक हो सकता है।  

एमएसपी की गणना ए2 (बीज-खाद आदि का खर्च) और एफएल (परिवार के सदस्यों का मेहनताना) के आधार पर की गई है जबकि किसान संगठन लंबे समय से इसे सी2 (जमीन की लागत और सभी तरह की लागत) के आधार पर करने की मांग कर रहे हैं। अलबत्ता इससे महंगाई पर कितना असर पड़ेगा यह देखना अभी बाकी है। साथ ही यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार गेहूं और चावल के अलावा किसानों से कौन सी फसल नियमित आधार पर खरीदने की योजना बना रही है।

इस मॉडल के बारे में जल्दी ही औपचारिक घोषणा होने की संभावना है। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के निदेशक शशांक भिड़े ने कहा कि एमएसपी बढ़ाने का महंगाई पर अल्पकालिक असर हर फसल पर अलग-अलग होगा और यह खरीद प्रक्रिया पर भी निर्भर करेगा। दीर्घावधि में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि किसान उच्च एमएसपी पर कैसे प्रतिक्रिया जताते हैं और उत्पादन कैसे बढ़ाते हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के ए प्रसन्ना ने कहा कि एमएसपी बढऩे से उपभोक्ता मूल्य आधारित मुख्य महंगाई में 50 से 90 आधार अंक की बढ़ोतरी होने की आशंका है।

धान और गेहूं के अलावा किसी अन्य फसल के लिए खरीद की औपचारिक प्रक्रिया के अभाव में नई एमएसपी व्यवस्था से शायद किसानों को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि अनाज के अलावा दूसरी फसलों को खरीदने के लिए कोई नियमित व्यवस्था नहीं है।  मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'एमएसपी बढ़ाने  का यह फैसला 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में उठाया गया कदम है। इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा क्योंकि किसानों की क्रय शक्ति बढऩे का व्यापक प्रभाव होगा।'

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार आज के फैसले के कारण महंगाई पर पडऩे वाले किसी भी असर से निपटने के लिए तैयार है लेकिन किसानों की स्थिति सुधारने के लिए कोई भी कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगी। खरीफ के मौसम में सर्वाधिक उपजाए जाने वाले सामान्य धान का एमएसपी 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1,750 रुपये कर दिया गया है। यह मूल्य ए2 और एफएल लागत से करीब 50.09 फीसदी अधिक है। सरकार ने 2018-19 के बजट में किसानों को लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक एमएसपी देने का वादा किया था।खरीफ की सभी 14 फसलों का एमएसपी लागत से करीब 50 फीसदी अधिक कर दिया गया है।

सबसे अधिक बढ़ोतरी मूंग और रागी के एमएसपी में की गई है। पिछले साल की तुलना में मूंग का एमएसपी 1,400 रुपये प्रति क्विंटल और रागी का 900 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 4,020 रुपये से बढ़ाकर 5,150 रुपये प्रति क्विंटल और लॉन्ग स्टेपल कपास का 4,320 रुपये से बढ़ाकर 5,450 रुपये प्रति क्ंिवटल कर दिया गया है।

अलबत्ता किसान संगठनों का कहना है कि यह बढ़ोतरी काफी नहीं है और इससे किसानों को पिछले कुछ वर्षों में हुए नुकसान की भरपाई नहीं होगी।  जय किसान आंदोलन के संयोजक अवीक साहा ने कहा कि इस चुनावी साल में यह किसानों की छोटी जीत है। कम से कम कागज पर ही सही, मोदी सरकार अपने पिछले चुनावी वादे को पूरा करने के लिए मजबूर हुई है। लेकिन किसान सी2 के आधार पर एमएसपी की मांग कर रहे हैं।

Keyword: narendra modi, agri, farmer, MSP, न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी,
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