बिजनेस स्टैंडर्ड - कश्मीर में राजनीतिक पहल के बगैर समस्या का नहीं होगा हल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, July 23, 2018 07:08 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

कश्मीर में राजनीतिक पहल के बगैर समस्या का नहीं होगा हल

दोधारी तलवार
अजय शुक्ला /  July 04, 2018

भाजपा और पीडीपी का गठबंधन टूटने के बाद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू है। अब राज्य में बढ़ते आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठïानों द्वारा ताकतवर आतंकवाद विरोधी अभियानों की बात भी शुरू हो गई है। ऐसे में सेना के सामने अहम चुनौतियां हैं। उसे अमरनाथ यात्रा को सुरक्षा देने के साथ-साथ 16,000 वर्ग किमी में फैली कश्मीर घाटी में भी अपनी पकड़ मजबूत करनी है। घाटी में पूरे के पूरे गांव बागी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे सुरक्षा बलों पर पथराव करते हैं। इससे आतंकी तो बचते नहीं, कार्रवाई में पत्थरबाज अवश्य मारे जाते हैं। मरने वाले आतंकियों का भव्य अंतिम संस्कार होता है। इससे कई नौजवान बंदूक उठाने को प्रेरित होते हैं। इसके अलावा 776 किमी लंबी नियंत्रण रेखा को पाकिस्तानी और घुसपैठ से बचाने का काम भी निरंतर चलता है। 

 
हालांकि 29 मई को दोनों सेनाओं के संघर्ष विराम से राह थोड़ी आसान हुई है। क्या कश्मीर में इतने सुरक्षा बल हैं कि ये सारे काम किए जा सकें? पाकिस्तानी प्रोपगंडा और कश्मीरी मानवाधिकार संगठन मसलन जेऐंडके कोअलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी, बार-बार कह रहे हैं कि भारत ने 7 लाख सुरक्षाकर्मियों के दम पर कश्मीर पर नियंत्रण कर रखा है। आरोप है कि आधी भारतीय सेना कश्मीर में तैनात है। केंद्र या राज्य सरकारों की ओर से इस विषय पर कभी कोई स्पष्टïीकरण नहीं आया, न ही सेना ने कुछ कहा। संप्रभु सरकारों को अपनी सेना को कहीं भी तैनात करने के लिए किसी की इजाजत की आवश्यकता नहीं लेकिन समझदारी यही है कि भारत की ऐसी छवि न बने कि उसने कश्मीर को दबाव बनाकर नियंत्रण में रखा है। जम्मू और कश्मीर में तैनात सैनिकों की संख्या में मामले में अस्पष्टïता है। 
 
एक सवाल यह भी है कि बात केवल कश्मीर की हो रही है जहां आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित है, या फिर पूरे राज्य की बात हो रही है जिसमें जम्मू और लद्दाख भी आते हैं। सुरक्षा बलों की विभिन्न श्रेणियों को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। इसमें सेना, राष्ट्रीय राइफल्स, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, राज्य पुलिस बल और खुफिया एजेंसियां तक शामिल हैं। आखिरी सवाल यह है कि जम्मू के दक्षिण में तय अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात जवानों और पुलिसकर्मियों को गिना जाए या नहीं। यह सीमा काफी हद तक पंजाब और राजस्थान की भारत-पाकिस्तान सीमा जैसी है।
 
सबसे पहले बात करते हैं सेना की। इसमें नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिक और घुसपैठ रोकने वाले जवान शामिल हैं। कश्मीर जम्मू और लद्दाख की रक्षा दो नियमित इन्फैंट्री के हवाले है जिनमें से प्रत्येक में 20-30 हजार सैनिक हैं। याद रखें कि लद्दाख में तैनात दो डिवीजन में एक 3 इन्फैंट्री डिवीजन वास्तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा करती है जो चीन से लगती है। यद्यपि हमें जम्मू और पंजाब के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात दो डिवीजन को इससे बाहर रखना चाहिए। इस सीमा पर कोई विवाद नहीं है और न ही ये जवान आतंक विरोधी कार्रवाई में शामिल हैं। इस तरह जम्मू कश्मीर में सैनिकों की तादाद 1.50 लाख पहुंचती है। 
 
जम्मू कश्मीर में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स की 60 बटालियन हैं। इनमें से प्रत्येेक में 1,000 सैनिक हैं। ये आतंक विरोधी कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित हैं और इनके पास हल्के हथियार होते हैं। ये कश्मीर और जम्मू के गांवों में बराबरी से बंटे हुए हैं और बड़े शहरों में इनकी तैनाती नहीं है। लद्दाख में अशांति नहीं है इसलिए वहां राष्ट्रीय राइफल्स की तैनाती नहीं है। इस तरह सैनिकों की तादाद 2.10 लाख हो जाती है। यानी 12 लाख से अधिक सैनिकों वाली भारतीय सेना का छठा हिस्सा। यह बात एकदम गलत है कि आधी भारतीय सेना कश्मीर में तैनात है। 
 
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में से सीआरपीएफ और बीएसएफ को राज्य पुलिस के साथ मिलकर कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करना पड़ता है। कश्मीर में उनके सैनिकों की संख्या 60 हजार है जबकि जम्मू में 40 हजार। आईटीबीपी के करीब 30 हजार जवान लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात हैं। सब मिलाकर इनकी तादाद 1.30 लाख पहुंचती है।  जम्मू कश्मीर की पुलिस, सशस्त्र बलों, विशेष पुलिस अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के जवानों की तादाद 1.30 लाख है। बीते वर्षों में जम्मू कश्मीर पुलिस की क्षमताओं और उनकी संख्या दोनों में इजाफा हुआ है। आज उनकी आतंक विरोधी अभियानों में अहम भूमिका है। वह आज देश का सबसे सक्षम पुलिस बल है। यानी राज्य पुलिस को मिला लिया जाए तो 4.70 लाख जवान होते हैं। कश्मीर आने वाले अक्सर सड़कों पर भारी सैन्य मौजूदगी की बात करते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों पर देखें तो आंकड़े दिलचस्प हैं। 
 
अफगानिस्तान और इराक के अनुभवों पर आधारित अमेरिकी सेना का काउंटरइंसर्जेंसी डॉक्ट्रिन कहता है कि ऐसी जगहों पर हर 1,000 लोगों पर 20 सुरक्षाकर्मी हो सकते हैं। कश्मीर और जम्मू में यह औसत क्रमश: 28.5 और 36 सैनिकों का है। इसकी एक वजह यह भी है कि बगावत से निपटने के अलावा सीमा भी बहुत सुराखदार है। लद्दाख के आंकड़े इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि लेह और करगिल देश के सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले जिले हैं।  इसके बावजूद सेना अपने लक्ष्य में सफल है या नहीं यह कहना मुश्किल है। सशस्त्र आतंकियों के मरने का आंकड़ा लगातार बढ़ा है। 2016 में 150 से बढ़कर 2017 में यह 217 हुआ और इस वर्ष अब तक 92 आतंकी मारे जा चुके हों। परंतु इसका संबंध उनकी बढ़ती तादाद से भी हो सकती है। 
 
इसकी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। सन 2016 में 63 जवान मारे गए थे और पिछले साल 62 जवानों की जान गई। इस वर्ष अब तक यह आंकड़ा 46 हो चुका है। अगर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तथाकथित डोभाल डॉक्ट्रिन ने पाकिस्तान को संघर्ष विराम के लिए विवश किया है। ऐसे में अब वक्त कश्मीर में तनाव कम करने का भी है। सेना के दम पर बगावत को काबू में रखा जा सकता है लेकिन बिना राजनीतिक पहल के समस्या जस की तस रहेगी। 
Keyword: jammu, kashmir, BJP, PDP, भाजपा पीडीपी जम्मू कश्मीर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कंपनियों के बेहतर नतीजे अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.