बिजनेस स्टैंडर्ड - दार्जिलिंग चाय की दिक्कतें कम नहीं
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दार्जिलिंग चाय की दिक्कतें कम नहीं

अभिषेक रक्षित / कोलकाता July 04, 2018

एक साल बाद भी दार्जिलिंग चाय उपभोक्ताओं की वापसी की उम्मीद पर अब तक खरी नहीं उतर पाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र में उत्पादन और कीमतों में मंदी, श्रम की कमी और जापान तथा यूरोप में खरीदारों के नदारद रहने जैसी समस्याएं हैं। इस क्षेत्र के अधिकारियों के मुताबिक इस साल जनवरी से अप्रैल तक की अवधि के दौरान उत्पादन पिछले साल के समान 13.5 लाख किलोग्राम रहा। इस अवधि में प्रमुख रूप से चाय की पहली आवक शामिल रहती है। पिछले साल की तुलना में कीमतें 600-650 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर हैं।
 
दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के सचिव कौशिक बसु ने कहा कि अत्यधिक बारिश और धूप की कमी ने चाय की दूसरी आवक के उत्पादन में बाधा डाली है। अगर मौसम में सुधार नहीं होता है, तो उत्पादन को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि जून के पहले पखवाड़े के दौरान उत्पादन में 40 प्रतिशत तक का नुकसान पहुंचा है। भारत में चाय की सभी किस्मों में दूसरी आवक के दाम सबसे अधिक रहते हैं और यह दुनिया में सबसे महंगी होती है। चाय की यह आवक मई के अंत में शुरू होती है और अगस्त की शुरुआत तक चलती है। इस आवक से होने वाली आय किसी भी बागान की सालाना आय की 40-60 प्रतिशत तक की भरपाई करती है और ऐसे किसी मौसम के दौरान जिसमें उत्पादन नहीं होता है, तो इससे खर्चों का भुगतान करने में मदद मिलती है।
 
दूसरी तरफ, प्रसिद्ध नामरिंग चाय बागान के मालिक और दार्जिलिंग इम्पेक्स के निदेशक प्रतीक पोद्दार के अनुसार अत्यधिक वर्षा के कारण दूसरी आवक में चाय की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा कंपनी के अधिकारियों ने यह भी कहा कि श्रम की कमी के कारण बागानों में मशीनों और कैंची से तुड़ाई का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। पिछले साल गोरखालैंड आंदोलन ने 100 से भी अधिक दिनों तक श्रमिकों की आजीविका पर असर डाला था और इसके बाद करीब 50 प्रतिशत स्थायी श्रमिकों ने बागान छोड़ दिए थे। श्रमिकों को आमतौर पर हर हफ्ते भुगतान किया जाता है।
 
आमतौर पर किसी सामान्य वर्ष के दौरान दार्जिलिंग में उत्पादित 80 लाख किलोग्राम चाय में से 80 प्रतिशत का निर्यात किया जाता है। टी बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि गोरखालैंड आंदोलन के कारण पिछले साल जून से बागान बंद होने के बाद और वर्षा से दूसरी  आवक बाधित होने से दार्जिलिंग में 32.1 लाख किलोग्राम चाय उत्पादन किया गया। निर्यातकों ने कहा कि पहली आवक की चाय बिक्री केदौरान जर्मनी (दार्जिलिंग चाय का सबसे बड़ा आयातक), ब्रिटेन, अमेरिका और कुछ अन्य देशों की निजी पूछताछ सामान्य रही है लेकिन जापान की ओर से मुश्किल से ही कोई पूछताछ हुई है, जो चाय के सबसे बढिय़ा उत्पादन को ऊंचे दामों पर खरीदता है। सुबोध ब्रदर्स के निदेशक सुगात दत्त ने कहा कि जापान में मेरे सबसे खास ग्राहकों में से एक अब भी दार्जिलिंग चाय नहीं खरीद रहा है।
Keyword: tea, bagan, चाय बोर्ड दार्जिलिंग,
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