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कारोबारी जगत में 'प्रेम संबंध' पर विधिक अनुबंध का चलन

श्यामल मजूमदार /  July 03, 2018

इंटेल कॉर्प के मुख्य कार्याधिकारी ब्रायन क्रजानिच ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया। एक जांच में पाया गया कि वह अपनी एक अधीनस्थ कर्मचारी के साथ आपसी सहमति के रिश्ते में थे जो कंपनी की नीतियों के खिलाफ था। इन नीतियों के मुताबिक समूह के भीतर प्रेम संबंध वर्जित हैं। अमेरिका की इस दिग्गज कंप्यूटर चिप निर्माता कंपनी के मुखिया का नाम उस सूची में सबसे नया है जिसके तहत कारोबारी जगत के दिग्गजों को ऐसे रिश्तों के चलते अपना रोजगार गंवाना पड़ा जिन्हें अनुपयुक्त माना जाता है। 'मीटू' आंदोलन के बाद यह अवधारणा जोर पकड़ रही है। 

आमतौर पर कंपनियां कार्यालय में होने वाले प्रेम प्रसंगों पर कुछ नहीं कहतीं लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह उन लोगों के बीच शुरू होता है जो सीधे तौर पर एक दूसरे को रिपोर्ट करते हैं। इतना ही नहीं अधिकांश लोगों को एक भ्रम यह है कि दंडात्मक कदम तभी उठाए जाते हैं जब यौन शोषण का आरोप लगाया गया हो। कार्यस्थल पर रिश्तों के चलते हाल के वर्षों में कई मुख्य कार्याधिकारियों का पतन हुआ है। अतीत में लॉकहीड मार्टिन के क्रिस्टोफर कुबासिक ने सीईओ बनने के तत्काल बाद इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उनके एक अधीनस्थ के साथ रिश्ते थे। बेस्ट बाय के सीईओ ब्रायन डन के साथ भी यही हुआ था।

कुछ कंपनियां इस मामले में सीधी रिपोर्टिंग से भी आगे बढ़ जाती हैं। यह इस बात का संकेत है कि तेजी से बढ़ रहे कंपनी बोर्डों में किसी गलती के लिए खास गुंजाइश नहीं। उदाहरण के लिए बोइंग ने अपने मुख्य कार्याधिकारी को इस्तीफा देने को कहा क्योंकि एक जांच में पता चला था कि उसके एक महिला कर्मचारी से प्रेम संबंध थे। हालांकि उसने सीधे सीईओ के अधीन काम नहीं किया था और वह कंपनी में कई दर्जा नीचे थी। ऐसा भी नहीं लगा था कि सीईओ ने उसे किसी तरह की प्राथमिकता दी हो। 

ऐसा भी नहीं है कि ऐसे कदम केवल पुरुष सीईओ के खिलाफ उठाए गए हों। यह भी जरूरी नहीं कि संबंधित साझेदार उसी कंपनी में काम कर रहा हो। अमेरिका के एक बड़े बैंक ने अपनी एक शीर्ष वकील को इसलिए निकाल दिया क्योंकि उनके एक सरकार समर्थित मॉर्गेज क्रय करने वाली कंपनी के सीईओ के साथ प्रेम संबंध थे। यहां हितों के टकराव का आरोप लगा। रोचक बात यह है कि कंपनी ने इस मसले पर एकदम अलग रुख रखते हुए अपने सीईओ को बरकरार रखा और कहा कि वह बैंक के साथ किसी कारोबारी संबंध में नहीं थे। 

ऐसे मामलों से यह संकेत नहीं जाना चाहिए कि कार्यस्थलों पर रोमांस को लेकर प्रबंधन एकदम खिलाफ हो चुका है। इस तरह की सख्ती केवल शीर्ष प्रबंधन के स्तर पर ही दिखाई जा रही है। ऐसा कानूनी कार्रवाई की आशंका, कार्यालयीन नैतिकता के ह्रास और अन्य दिक्कतों के चलते किया जा रहा है। जब कोई सुपरवाइजर किसी कर्मचारी के साथ रिश्तों में होता है यह निजी मामला नहीं रह जाता। तक कानूनी और अन्य तरह की जटिलताएं पैदा होती हैं। इससे निष्पक्षता, पक्षपात और विश्वसनीयता तथा जवाबदेही का सवाल उठ खड़ा होता है। 

इससे एक तरह का विचलन पैदा हो सकता है। अगर कोई बॉस अपने या अपनी अधीनस्थ के साथ रिश्ते बनाए तो कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इससे सम्मान और विश्वसनीयता को तो नुकसान पहुंचता ही है, पक्षपात की आशंका भी होती है। 
भारतीय कंपनियों में किसी सीईओ को अपने सहकर्मियों के साथ आपसी सहमति के रिश्तों के लिए बर्खास्त किया गया हो ऐसी कोई सूचना शायद ही सामने आई हो। हालांकि कई लोग कहेंगे कि ऐसा होना अस्वाभाविक नहीं है और ऐसी घटनाओं को छिपा दिया जाता है (हालांकि भारतीय कंपनियों में यौन शोषण के मामलों की कोई कमी नहीं।)

मानव संसाधन विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय कंपनियां कार्यालयीन रोमांस को लेकर विशिष्टï दिशानिर्देश नहीं बनातीं और अनौपचारिक तौर पर कह दिया जाता है कि इस तरह के रिश्तों को पूरी तरह कार्यालय से बाहर रखा जाए। इसकी महंगी कीमत चुकानी पड़ सकती है। 
वे विदेशी कंपनियों से सबक ले सकते हैं जिनमें से कई ने डेटिंग को लेकर विस्तृत नीतियां बना रखी हैं। फेसबुक और गूगल में कर्मचारियों को किसी सहकर्मी से केवल एक बार डेट के लिए पूछने की इजाजत है। अगर उसने इनकार कर दिया तो दोबारा वही सवाल पूछने पर शोषण का मामला चल सकता है। कई कंपनियों ने प्रेम अनुबंध तैयार किए हैं।

यह दो कर्मचारियों के बीच लिखित समझौता होता है जो उनके रोमांस की स्वैच्छिक प्रकृति के बारे में बताता है। इन्हें आमतौर पर आपसी सहमति के रिश्तों के अनुबंध कहा जाता है और कर्मचारी इन पर हस्ताक्षर करके मानव संसाधन विभाग के समक्ष अपने रिश्ते को आधिकारिक रूप से दर्ज कराते हैं। उनका उद्देश्य यह है कि रोमांस को आपसी सहमति का दर्ज करके उसके जोखिम कम किए जाएं। यानी शोषण के आरोपों की आशंका को सीमित किया जाए। 

कई लोग कहते हैं कि ऐसे अनुबंध भारत में सफल नहीं होंगे क्योंकि कर्मचारियों को आगे आकर अपने रिश्तों को स्वीकार करना पड़ता है। इसकी संभावना कम है कि कोई स्वयं मानव संसाधन विभाग के पास जाकर स्वेच्छा से अपने रोमांस के बारे में किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेगा। आवश्यकता इस बात की है कि इसे लेकर जागरूकता पैदा की जाए। कोई कंपनी किसी के प्रेम संबंधों की निगरानी नहीं करना चाहती लेकिन चूंकि कानूनी ढांचा जटिल होता जा रहा है तो उन्हें खुद को संभावित समस्याओं से बचाने के लिए उपाय तो करने होंगे।
Keyword: इंटेल कॉर्प, ब्रायन क्रजानिच, CEO, company, me too,
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