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सुस्त रिफंड, इनपुट लागत बढऩे से लुधियाना में कारोबार थमा

करण चौधरी / लुधियाना July 03, 2018

जसवंत सिंह बिरदी ने 4 दशक से ज्यादा समय तक साइकिल उद्योग में बिताया है। अब वह औद्योगिक शहर लुधियाना में साइकिल ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष हैं। लेकिन जब उनके दो बेटों के इस कारोबार में आने की बात आई तो बिरदी ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने बेटों के लिए फ्राइड फूड की दुकान खोलने को प्रोत्साहित किया। उनका कहना है कि कच्चे माल के दाम बढऩे व उसमें उतार चढ़ाव, नोटबंदी और अब नए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से साइकिल उद्योग की रीढ़ टूट गई है। 

मिलर गंज में पिछले 2 साल में स्थिति बहुत तेजी से बदली है, जहां 1,000 के करीब छोटे और मझोले उद्यम हैं। इनमें से ज्यादातर मेटल फैब्रिकेशन, सिलाई मशीन, साइकिल और ऑटोमोबाइल स्पेयर पाट्र्स, प्लास्टिक और पॉलिमर विनिर्माण और थोक कारोबार कर रहे हैं। इस इलाके में कर्मचारियों की चहल पहल और शोर सुनाई देती थी, जहां अब छोटी इकाइयां या तो बंद हो गई हैं, या उनका कारोबार घट गया है। 

नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद से झटके लगने शुरू हुए। उसके बाद जुलाई 2017 में नए अप्रत्यक्ष कर का दौर शुरू हुआ। इससे शहर के 50,000 से ज्यादा मजबूत एसएमई का आधार सिकुड़ा है। उद्योग जगत के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नोटबंदी के बाद तमाम इकाइयां बंद हो गईं, क्योंकि उनका ज्यादातर कारोबार काले धन से होता था। उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने से सबके लिए कारोबार के समान अवसर हो गए।

अपने भाई राजिंदर उप्पल के साथ सिलाई मशीन के पाट्र्स की 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की विनिर्माण इकाई चलाने वाले अशोक उप्पल कहते हैं, 'सब कुछ मिला जुलाकर हुआ है।' 

बहरहाल नया कर लागू होना कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है। ज्यादातर विनिर्माताओं का कहना है कि कर रिफंड पाना सबसे बड़ी तकलीफ है। इसकी वजह से नकदी का संकट गहरा गया है, जबकि एसएमई क्षेत्र में पहले से ही नकदी संकट रहा है। उप्पल कहते हैं, 'यहां छोटे विनिर्माताओं का 5 लाख से 2 करोड़ रुपये तक कर अधिकारियों के पास फंसा हुआ है और वे जीएसटी रिफंड नहीं पा रहे हैं।' 
विशेषज्ञों का कहना है कि रिफंड में समय लग रहा है क्योंकि विक्रेता और खरीदार के इनपुट और आउटपुट रिटर्न का मिलान किया जाता है। जब एकल प्रारूप प्रभावी हो जाएगा तो प्रक्रिया सरल हो जाएगी, जो अभी बन रही है। 

अन्य समस्याए हैं, जो जीएसटी से जुड़ी भी हैं और नहीं भी जुड़ी हैं। पिछले एक साल के दौरान स्टील के दाम बढ़े हैं। इसकी वजह से कच्चे माल का दाम बढ़ा है, और इससे विनिर्माताओं व ट्रेडर्स में जंग छिड़ गई है। फर्मों को इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी और विनिर्माण सॉल्युशंस मुहैया कराने वाली तारण इंडस्ट्रीज के सीईओ एसबी सिंह कहते हैं कि तमाम विनिर्माताओं का मानना है कि उन्हें इच्छित मूल्य नहीं मिल रहा है। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में दरें स्थिर होने में अभी एक साल और लग सकते हैं। 
बदलाव की चिंताओं के बावजूद नए अप्रत्यक्ष कर का समर्थन करने वाले तमाम कारोबारी भी हैं। प्लास्टिक और पॉलिमर विनिर्माण इकाई चलाने वाले हरि मित्तल कहते हैं, 'जीएसटी की वजह से लोगों की काले धन से खरीदने की समस्या दूर हुई है, जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धा कम हुई है और एक स्तर पर कारोबार का मौका मिला है।' 

मित्तल का कहना है कि उनके क्षेत्र में कीमतों में मजबूती है, जिससे मुनाफा बढ़ा है। उद्योग के कई दिग्गजों का कहना है कि जीएसटी उनके लिए बेहतरी लाई है, जो कानूनी तरीके से अपना कारोबार चलाते हैं। मित्तल ने कहा कि मुझे लगता है कि जीएसटी को लेकर धारणा संबंधी समस्या ज्यादा है। 
Keyword: GST, ludhiyana, industrial city, सिलाई मशीन, साइकिल, प्लास्टिक, पॉलिमर,
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