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दर्शकों की बढ़ी दिलचस्पी तो फीफा ने लगाया दांव

उर्वी मलवाणिया /  07 02, 2018

लाखों लोग फुटबॉल वर्ल्ड कप देख रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी उत्साही प्रशंसक इसके बारे में चर्चा कर रहे हैं ऐसे में फीफा भी भारतीय मर्कें डाइज बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है। इस फेडरेशन ने अपने विस्तारित उत्पाद पोर्टफोलियो पर बड़ा दांव लगाया है और इसकी मार्केटिंग और वितरण कोशिशों में अच्छी-खासी तेजी देखी गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सारी कोशिशें फुटबॉल प्रशंसक को टीमों और खिलाडिय़ों से जुड़ी यादगार चीजों को संग्रह करने में मददगार साबित होंगी?


बार्क के ताजा आंकड़े के मुताबिक फुटबॉल वल्र्ड कप 2018 के पहले चार दिनों के मैचों के टेलीविजन प्रसारण को करीब 4.7 करोड़ लोगों ने देखा। मार्केटिंग पेशेवरों का कहना है कि अगर फीफा इन दर्शकों में से एक-तिहाई लोगों को जर्सी, बैगपैक, कपड़े और दूसरे अन्य ब्रांडेड उत्पादों के खरीदारों में तब्दील करने में सफल होता है तो यह उसकी बड़ी सफलता होगी। उनका कहना है कि भारत फिलहाल इस वैश्विक फेडरेशन के मार्केटिंग नक्शे के रडार पर है। देश में फीफा मर्केंडाइज का लाइसेंस अधिकार रखने वाली कंपनी ड्रीम थियेटर के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) जिग्गी जॉर्ज कहते हैं, 'वर्ष 2014 के पिछले विश्व कप से ही फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ रही है। घरेलू लीग (इंडियन सुपर लीग) के उभार के साथ ही फुटबॉल अपना दायरा बढ़ा रहा है। इससे ही उत्साहित होकर उत्पाद पोर्टफोलियो और इसके दायरे के लिहाज से 2014 के वल्र्ड कप के मुकाबले इस बार मर्केंडाइज का दायरा 10 गुना ज्यादा है।' 

फीफा भारत में लंबी अवधि की योजना बना रही इसी वजह से इसने यहां बड़े पैमाने पर कई उत्पादों को पेश किया है। हाल में जारी निल्सन के एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में ज्यादा आबादी वाले शहरों में 16 साल या इससे ज्यादा उम्र वर्ग के 40 फीसदी से ज्यादा लोग यह मानते हैं कि वे किसी अन्य खेलों के मुकाबले फुटबॉल मैच को फॉलो करने में दिलचस्पी लेते हैं या ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। निल्सन के मुताबिक 2018 के वल्र्ड कप के लिए घमासान जारी है ऐसे में अमेरिका, भारत और चीन में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ रही है। 

लेकिन किसी खेल की लोकप्रियता बढऩे से मर्केंडाइज बिक्री में तेजी आए यह जरूरी नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फीफा इंतजार करने के लिए इच्छुक है तो वह ऐसा कर सकता है। इस साल फीफा ने मर्केंडाइज पर जो दांव लगाया है उसके पीछे एक उद्योग की रिपोर्ट जुड़ी है जिसमें यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में लाइसेंसिंग वृद्धि 7.4 फीसदी तक है जो अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की वृद्धि के मुकाबले कहीं ज्यादा है। फीफा उन उत्पादों को दर्शकों के सामने पेश करना चाहता है जिसकी अपील है। फीफा इन दर्शकों को अपनी पसंदीदा टीम और खिलाडिय़ों के लिए उनसे जुड़े मर्केंडाइज लेने और टीम की जर्सी आदि पहनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है। जॉर्ज का कहना है कि ड्रीम थियेटर ने ऑनलाइन और खुदरा चैनलों के जरिये विभिन्न कीमतों वाले कई उत्पादों का विकल्प दर्शकों के लिए रखा है। 

इस पोर्टफोलियो को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है जिनमें परिधान और परिधान से इतर अन्य चीजें हैं। जॉर्ज का कहना है कि इस तरह के बंटवारे से प्रशंसकों को ज्यादा सक्षम तरीके से लक्षित करने में मदद मिलती है। परिधान के क्षेत्र में फीफा जोरशोर से अपने ब्रांड की पेशकश वर्कआउट या एथलेटिक से जुड़ी गतिविधियों के लिए डिजाइन किए गए कपड़ों (एथलीजर) में की है। यह दर्शकों के हिसाब से माकूल भी है क्योंकि हाल के वर्षों में एथलीजर की बिक्री में तेजी आ रही है और इससे परंपरागत खुदरा विक्रेताओं का उत्साह बढ़ रहा है और सेलिब्रिटी भी इससे जुड़ रहे हैं। एचआरएक्स भी सेलिब्रिटी वाला परिधान ब्रांड है जिसके मालिक अभिनेता ऋतिक रोशन है। इसके अलावा विराट कोहली और टाइगर श्रॉफ का भी अपना ब्रांड है।

इन सारे सामानों की कीमत 399 रुपये से शुरू होती है और ये फ्लिपकार्ट ऑनलाइन पर फीफा द्वारा तैयार किए गए विशेष 'स्टोर' पर उपलब्ध हैं। जॉर्ज कहते हैं कि खुदरा स्तर पर 40 से अधिक शहरों में फीफा के सामान शॉपर्स स्टॉप, लाइफस्टाइल और सेंट्रल में मिल सकते हैं। वहीं गैर-परिधान वाले सेगमेंट में ड्रीम थियेटर का पूरा जोर चार उत्पादों फुटबॉल, फ्लिप-फ्लॉप्स, बैगपैक और सिपर्स पर है। ये सभी फुटबॉल के प्रशंसकों द्वारा पसंद किए जाने वाले उत्पादों में शामिल है जिसे वे अपने इस्तेमाल के लिए खरीद सकते हैं या फिर टीम और खिलाडिय़ों के स्मृति चिह्न के रूप में इसे संभाल कर रख सकते हैं। जॉर्ज कहते हैं कि अब तक खुदरा स्टोर और ई-कॉमर्स पर ग्राहकों का आकर्षण समान स्तर पर रहा है। वह कहते हैं, 'ब्रांड, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन खुदरा को लेकर काफी जागरुकता है और इससे नई संभावनाएं तलाशने की क्षमता में भी मदद मिली है।'

भारत को वैश्विक मानकों तक पहुंचने के लिए अभी काफी कुछ करना है। मिसाल के तौर पर देश में लाइसेंस वाला मर्केंडाइजिंग उद्योग अब भी बाजार के नकली माल की चुनौतियों से जूझ रहा है। लाइसेंसिंग कंपनी ब्लैक व्हाइट ऐंड ऑरेंज के संस्थापक और सीईओ भाविक वोरा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि भारत जैसे बाजार कई चुनौतियां देते हैं। मिसाल के तौर पर यह कीमतों के लिहाज से संवेदनशील बाजार है। फ्रैंचाइजी तथा खुदरा साझेदारों के लिए यह लागत के साथ गुणवत्ता को संतुलित करने की कोशिश में है लेकिन पाइरेसी पर नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। वह कहते हैं, 'आप यह देखते हैं कि मैच की जगह के बाहर जर्सी बिकती है जो निश्चित तौर पर आधिकारिक लाइसेंस वाला मर्केंडाइज नहीं है। इसके अलावा भारतीय प्रशंसक भी अभी उस स्तर तक यानी किसी फुटबॉल क्लब के उतने प्रशंसक भी नहीं हैं।'
Keyword: football, world cup, fifa, portfolio,
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