बिजनेस स्टैंडर्ड - एथनॉल निर्माण से अधिक चीनी का समाधान
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, November 19, 2018 09:34 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

एथनॉल निर्माण से अधिक चीनी का समाधान

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली July 02, 2018

हाल ही में केंद्र सरकार ने न केवल सी-वर्ग (भारी) शीरे से उत्पादित एथनॉल के दामों में बढ़ोतरी की है, बल्कि पहली दफा बी-वर्ग शीरे और गन्ने के रस से उत्पादित एथनॉल के दाम भी निर्धारित कर दिए हैं। अब तक भारत में इसकी कमी अनुभव की जा रही थी। अभी तक भारत में  सी-वर्ग शीरे से एथनॉल उत्पादित किया जाता रहा है, क्योंकि किसी स्थायी नीति व्यवस्था के अभाव में अन्य दो तरीके से एथनॉल उत्पादन किया जाना लाभकारी नहीं था। कई सालों से सीधे गन्ने के रस से एथनॉल विनिर्माण पर प्रतिबंध था।

यहां तक ​​कि कुछ साल पहले जब यह रोक हटा ली गई, तब भी इसमें बहुत-से लोगों ने रुचि नहीं दिखाई, क्योंकि नई डिस्टिलरीज स्थापित करने में अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता थी, जबकि इस संबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं थी कि उत्पाद कौन खरीदेगा और किस कीमत पर खरीदेगा।

गन्ने पर आधारित एथनॉल का तीन अलग-अलग तरीके से उत्पादन किया जा सकता है - सीधे गन्ने के रस से, बी-वर्ग के शीरे से और सी-वर्ग के शीरे से। सीधे तौर पर एथनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस का प्रयोग दुनिया भर में आम है। दरअसल, दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक ब्राजील में उत्पादित करीब-करीब सारा एथनॉल सीधे गन्ने के रस से तैयार किया जाता है। इसके उलट, भारत में चीनी की कमी और ईंधन उत्पादन के लिए किसी खाद्य फसल का इस रूप में इस्तेमाल करने से जुड़े नुकसान के कारण देश में कई सालों तक इसकी अनुमति ही नहीं दी गई थी।

हालांकि 2016-17 और 2017-18 सीजन के बीच अधिक पैदावार देने वाली नई किस्मों की वजह से रिकॉर्ड 1.2 करोड़ टन तक की उछाल से चीनी उत्पादन करीब 3.2 करोड़ टन पहुंचने के कारण चीनी की कमी का मुद्दा कम से कम अगले कुछ सालों तक प्रासंगिक नहीं लगता है। इसके अलावा मौजूदा साल का उत्पादन सालाना घरेलू मांग 2.5 करोड़ टन से अधिक है। अधिकता की इस समस्या से चीनी के दाम लुढ़कर उत्पादन लागत से नीचे जा चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सालों में भारत के उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं होगी और अगर गिरावट होती भी है, तो यह उम्मीद से से भी जल्दी खत्म हो जाएगी। इसके अतिरिक्त कुछ अध्ययन बताते हैं कि 2010 से 2016 तक भारत का प्रति व्यक्ति चीनी उपभोग हल्के-से उतार-चढ़ाव के साथ मुख्य रूप से 18-19 किलोग्राम के आस-पास रहा है। इस कारण चीनी की घरेलू आपूर्ति में बिना किसी कमी के देश में एथनॉल की दिशा में बढऩे के लिए गन्ने के रस की पर्याप्त अधिकता रहेगी।

उद्योग के अनुमानों के अनुसार अगर संपूर्ण 1.13 अरब लीटर एथनॉल को सी-वर्ग के शीरे से उत्पादित करने के मौजूदा प्रचलन के स्थान पर बी-वर्ग के शीरे से बनाया जाता, तो चीनी उत्पादन लगभग 1.1 करोड़ कम रहता, क्योंकि इसमें चीनी की भी कुछ मात्रा शेष रहती है। अगर एथनॉल को सीधे गन्ने के रस से बनाया किया जाता है, तो चीनी उत्पादन में यह गिरावट कुछ और बढ़ सकती है।

दूसरे शब्दों में, अगर डिस्टिलरीज वाली सभी मौजूदा चीनी मिलों ने बी-वर्ग के शीरे और गन्ने के रस से एथनॉल का उत्पादन किया होता, तो 2017-18 में भारत का वास्तविक चीनी उत्पादन 1-1.1 करोड़ टन कम हो सकता था यानी लगभग 2-2.3 करोड़ टन। अगर इसमें पिछले और मौजूदा स्टॉक को शामिल कर लिया जाए, तो घरेलू जरूरतों की पूर्ति के लिए यह पर्याप्त है।

इससे कीमतों को उचित स्तर पर रखा जा सकता था। इनमें न तो इतनी तेज गिरावट आती और न ही 220 अरब रुपये से अधिक का किसानों का गन्ना बकाया जमा होता। इक्रा लिमिटेड के उपाध्यक्ष सव्यसाची मजूमदार ने एक नोट में कहा है कि हालांकि शुद्ध एथनॉल उत्पादन से आमदनी पारंपरिक रूप में चीनी और एथनॉल की तुलना में कम होती है, लेकिन इस उपाय (बी-वर्ग के शीरे और गन्ने के रस से एथनॉल निर्माण) से अधिक उत्पादन की परिस्थिति में चीनी की अधिकता में कमी की संभावना बनेगी। इस कारण यह अप्रत्यक्ष रूप से चीनी की कीमतों में सहायक है।

बी-वर्ग के शीरे से एथनॉल का उत्पादन करने के संबंध में अधिकारियों ने कहा संभवत: इसके लिए बहुत ज्यादा अतिरिक्त निवेश की जरूरत न हो क्योंकि सी-वर्ग के शीरे के साथ यह मध्यवर्ती शीरे के रूप में उत्पादित किया जाता है। हालांकि गन्ने के रस से सीधे एथनॉल उत्पादन के मामले में ऐसा नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए प्रतिदिन 40 किलो लीटर की औसत क्षमता वाली एक डिस्टिलरी की स्थापना की जरूरत पड़ेगी, जिसके लिए लगभग 25 लाख से 50 लाख रुपये के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी।
कुछ दिन पहले केंद्र ने नई डिस्टिलरीज स्थाापित करने और अपनी मौजूदा डिस्टिलरीज में सुधार के लिए चीनी मिलों को सब्सिडी वाली ब्याज दरों पर तकरीबन 44 अरब रुपये की राशि देने का फैसला किया था।

अब यह देखना है कि कुल 530 चीनी मिलों में से जिन 140 मिलों के पास डिस्टिलरीज हैं, उनमें से कितनी मिलें इस पर फैसला लेंगी। एक अन्य मसला बी-वर्ग के शीरे से उत्पादित एथनॉल और सीधे गन्ने के रस से उत्पादित एथनॉल के दामों के संबंध में है। उद्योग के एक वर्ग का मानना ​​है कि एकटन चीनी से आम तौर पर 600 लीटर एथनॉल उत्पादन होता है। चूंकि बी-वर्ग के शीरे में चीनी की कुछ मात्रा शेष रहती है, इसलिए चीनी से होने वाले राजस्व की भरपाई के लिए इससे उत्पादित एथनॉल के दाम चीनी उत्पादन की लागत से 1.5-1.6 गुना अधिक होने चाहिए।
Keyword: central government, ethanol, ethanol product, sugarcane,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या एनबीएफ सी के नकदी संकट पर आरबीआई बैठक में बनेगी बात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.