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आईडीबीआई बैंक में होगा बड़ा बदलाव

श्रीपद एस ऑटे और अभिजित लेले / मुंबई 07 01, 2018

आईडीबीआई बैंक और एलआईसी के बीच हुआ सौदा भले ही बीमा कंपनी के लिए सकारात्मक न हो, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के लिए यह काफी लाभकारी है। इसी वजह से आईडीबीआई बैंक का शेयर शुक्रवार के कारोबारी सत्र में 12 फीसदी उछल गया क्योंकि एलआईसी की तरफ से आईडीबीआई बैंक की 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीद को बीमा नियामक आईआरडीएआई की मंजूरी की उम्मीद थी और बाजार बंद होने के बाद यह खबर सही साबित हुई। आईडीबीआई में निवेशकों का भरोसा इसलिए बहाल हुआ क्योंकि इसकी पूंजी मजबूत होगी, जिसकी दरकार अपना अस्तित्व बचाने के लिए इसे काफी समय से थी। आईडीबीआई की गैर-निष्पादित आस्तियों ने इसे मुश्किल में डाल दिया है क्योंकि मार्च 2018 में इसका शुद्ध एनपीए बुक वैल्यू का 1.4 गुना और 29 जून 2018 को इसके बाजार पूंजीकरण का 1.2 गुना था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आईडीबीआई अपने शुद्ध एनपीए को बट्टे खाते में डालता है तो शेयरधारकों की वैल्यू पूरी तरह गायब हो जाएगी। 
 
अस्थायी रूप से ही सही, एलआईसी की तरफ से पूंजीगत निवेश से बैंक की मुश्किल कम होगी। एलआईसी को पांच-सात सालों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 15 फीसदी करनी होगी। रिलायंस सिक्योरिटीज के विश्लेषक आशुतोष कुमार मिश्रा ने कहा, इस सौदे से आईडीबीआई को उच्च एनपीए के दबाव वाली स्थिति से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सरकार की तरफ से संभावित निवेश से बैंक को अच्छे रिटर्न पेश करने में मदद मिलेगी। बैंक की तरफ से गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री से भी इसे सहारा मिलेगा। आईडीबीआई अपनी संपत्ति प्रबंधन कंपनी की आंशिक हिस्सेदारी बेच सकता है।
 
इसके अलावा बैंक बेसल-3 पूंजी पर्याप्तता की जरूरतें पूरी करने की स्थिति में भी होगी। आईडीबीआई का पूंजी पर्याप्तता अनुपात मार्च 2018 में 10.4 फीसदी था, जो न्यूनतम 11.5 फीसदी की अनिवार्यता से कम है। अगर एलआईसी 100 अरब रुपये झोंकती है तो आईडीबीआई का पूंजी पर्याप्तता अनुपात सुधरकर करीब 15 फीसदी पर आ जाएगा और इसकी जोखिम भारांक वाली परिसंपत्ति मार्च 2018 के स्तर पर आ जाएगी। मिश्रा ने कहा, लेकिन एलआईसी के निवेश से इसका प्राइस टु बुक वैल्यू अनुपात घटेगा। यह सौदा हालांकि मूल्यांकन के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि बैंक के कुल परिचालन प्रदर्शन के लिहाज से। सौदे के बाद सरकार इसकी बहुलांश हिस्सेदारी शायद नहीं होगी, लेकिन विशेषज्ञों के लिए यह गंभीर चिंता का विषय नहीं है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (संस्थागत शोध) धनंजय सिन्हा ने कहा, कुछ विश्लेषक बैंक यूनियन के इस एतराज पर सतर्क हैं कि सरकार इसमें बहुलांश हिस्सेदारी नहीं रख रही और यह मामला खराब कर सकता है।
 
Keyword: IDBI bank, LIC, NPA,,
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