बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी संग्रह से बढ़ा भरोसा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, July 18, 2018 10:29 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

जीएसटी संग्रह से बढ़ा भरोसा

अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली 07 01, 2018

जीएसटी का एक साल

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्रियान्वयन की पहली वर्षगांठ पर सरकार ने इस नर्ई कर प्रणाली को कामयाब बताने के साथ ही आने वाले वक्त में कई तरह के कर सुधारों के भी संकेत दिए। इस बीच जून 2018 में कुल राजस्व संग्रह आंशिक बढ़ोतरी के साथ 956 अरब रुपये पर पहुंचने से भी सरकार की उम्मीदों को पंख लगे हैं। मई महीने में जीएसटी संग्रह 940 अरब रुपये रहा था। इस मौके पर आज एक कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अढिया ने यह जानकारी दी। अढिया ने बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 के नौ महीनों में जीएसटी का औसत मासिक संग्रह करीब 899 अरब रुपये रहा है।

इस कार्यक्रम में लंबे समय के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भी नजर आए। वह गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद से ही स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक जून 2018 में संकलित कुल 956 अरब रुपये के जीएसटी राजस्व में से करीब 159 अरब रुपये केंद्रीय जीएसटी, 220 अरब रुपये राज्य जीएसटी, 495 अरब रुपये एकीकृत जीएसटी और 81 अरब रुपये उपकर के हैं। इस विज्ञप्ति के मुताबिक जून में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा जुटाया गया कुल राजस्व दावा निपटान के बाद 316 अरब रुपये का सीजीएसटी और 366 अरब रुपये का एसजीएसटी रहा।

सरकार ने जीएसटी से हर महीने औसतन 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व संकलन का अनुमान लगाया हुआ है। अढिया ने माना कि भले ही 1 लाख करोड़ रुपये का मासिक राजस्व संग्रह अभी तक सामान्य बात नहीं बन पाई है लेकिन सरकार को वह लक्ष्य हासिल कर लेने की पूरी उम्मीद है। वैसे जेटली के खराब स्वास्थ्य के चलते वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे पीयूष गोयल का मानना है कि जीएसटी का मासिक संग्रह इस आंकड़े से भी काफी अधिक होगा। उन्होंने एक बार फिर यह दावा किया कि चालू वित्त वर्ष में जीएसटी संग्रह 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

गोयल ने अपने भाषण में कहा, 'मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि वर्ष 2018-19 में औसत मासिक संग्रह 1.10 लाख करोड़ रुपये रहेगा। सभी जानते हैं कि कारोबार के लिहाज से अप्रैल-जून की तिमाही थोड़ी सुस्त होती है। मुझे लगता है कि इस वित्त वर्ष में जीएसटी से 13 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक राजस्व मिलेगा।' सरकार की तरफ से लगातार इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि जीएसटी के क्रियान्वयन के चलते पैदा हुए गतिरोध को बीते एक साल में काफी हद तक दूर किया जा चुका है। इस पक्ष को मजबूती से रखने के लिए सरकार ने नई दिल्ली में यह बड़ा कार्यक्रम भी रखा था जिसमें कर अधिकारियों, कारोबारियों, उद्योगपतियों एवं पत्रकारों का भारी हुजूम उमड़ा।

जीएसटी प्रणाली को 1 जुलाई 2017 को देश भर में एक साथ लागू किया गया था। जीएसटी को अमलीजामा पहनाने में अहम भूमिका निभाने वाले जेटली ने भी लाइव स्ट्रीमिंग के जरिये इस कार्यक्रम को अपने आवास से संबोधित किया। भले ही जटिल ऑपरेशन के चलते जेटली थोड़े कमजोर लग रहे थे लेकिन उनकी आवाज पहले की ही तरह साफ और दमदार लगी।

जेटली ने कहा, 'मैंने कई देशों में जीएसटी से बड़े पैमाने पर गतिरोध की स्थिति देखी है। इसे गतिरोध पैदा करने वाला सुधार माना जाता रहा है। खुद मैं भी जीएसटी के सामान्य स्थिति में आने में लगने वाले समय को देखते हुए इसे गतिरोधक कहता रहा हूं लेकिन पिछले एक साल के अनुभव के बाद मैं अब गतिरोधक शब्द के इस्तेमाल को लेकर आश्वस्त नहीं हूं।'

जेटली ने कहा कि क्रियान्वयन संबंधी अधिकांश दुश्वारियों को अब पीछे छोड़ा जा चुका है लिहाजा मध्यम एवं दीर्घ अवधि में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि, कारोबारी सुगमता बढ़ाने और व्यापार विस्तार पर जीएसटी का महत्त्वपूर्ण प्रभाव होगा। जेटली ने कहा, 'मुझे यकीन है कि समाज के लिए जीएसटी का बेहतरीन असर आना अभी बाकी है।' इस मौके पर जेटली ने जीएसटी की केवल एक दर होने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े आकार वाले देश के लिए एक ही दर रखना संभव नहीं है। इसी के साथ उन्होंने 28 फीसदी की उच्च कर दर को भी सही ठहराया।

जेटली ने कहा, 'जीएसटी से पहले कुछ उत्पादों पर परवर्ती असर के चलते 31-32 फीसदी तक कर लगता था लेकिन इस व्यवस्था में उसे कम करते हुए 28 फीसदी पर ला दिया गया है। वैसे अब हम 28 फीसदी के कर दायरे में शामिल कई उत्पादों को निचली कर दरों में रखने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। अब हम कर दरों को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया में हैं।'जेटली ने कहा कि जुलाई 2017 से लेकर मार्च 2018 तक कुल कर संग्रह 8.2 लाख करोड़ रुपये रहा है जो अप्रत्यक्ष कर संग्रह के मामले में एक साल पहले की तुलना में 11.9 फीसदी की वृद्धि दिखाता है।

उन्होंने कहा, 'इसका मतलब है कि तमाम शुरुआती समस्याओं के बावजूद अपने क्रियान्वयन के पहले साल में ही अप्रत्यक्ष कर संग्रह  बढ़ गया है।'इसके साथ ही जेटली ने कहा कि हालात बदलने पर कर दरों और उसकी सीमा को तर्कसंगत बनाने की संभावना भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'हमारे पास एक ऐसी कर प्रणाली है जिसमें कर संग्रह बढऩे पर करारोपण कम होता जाएगा। इससे कर दरों और कर दायरे को तर्कसंगत बनाने की क्षमता भी बढ़ेगी। इसका मतलब है कि जीएसटी कर संग्रह में अच्छी-खासी वृद्धि होने से कर प्रणाली को तर्कसंगत बनाने की क्षमता भी बढ़ जाएगी।'

Keyword: arun jaitley, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, वित्त सचिव, हसमुख अढिया,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दुग्ध निर्यात पर प्रोत्साहन का किसानों को मिलेगा लाभ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.