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पुरानी कार की खरीदारी में वाहन ऋण ही नहीं समझदारी

तिनेश भसीन /  07 01, 2018

भारत में पुरानी कारों का बाजार नई कारों के बाजार का करीब 1.2 गुना है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में हर साल नई कारों के मुकाबले पुरानी कारें ज्यादा बिकती हैं। लेकिन जब कार के लिए कर्ज लेने की बात आती है तो पुरानी कारें बहुत पीछे दिखती हैं। महिंद्रा फस्र्ट चॉइस व्हील्स पुरानी कारों और उनकी कीमतों की वेबसाइट इंडियन ब्लू बुक चलाती है, जिसके मुताबिक देश में हर महीने 1.90 लाख नई कारें कर्ज लेकर खरीदी जाती हैं, लेकिन पुरानी कारों की बात करें तो केवल 36,500 कारें ही कर्ज पर खरीदी जाती हैं।

 
मगर इसकी वजह क्या है? असल में नई कार के लिए कर्ज देते समय तो केवल कर्ज लेने वाले को और कर्ज चुकाने की उसकी क्षमता को परखा जाता है। लेकिन पुरानी कार के लिए कर्ज का मामला पेचीदा होता है। कारदेखो में कारोबार प्रमुख (यूज्ड कार फाइनैंस) नमित जैन कहते हैं, 'कर्ज देने वाला देखता है कि कार कितनी पुरानी है, मॉडल कौन सा है, कितने किलोमीटर चल चुकी है और उसका कैसा इस्तेमाल किया गया है। यह सब देखकर ही उसकी कीमत तय की जाती है।' अगर कार को टैक्सी की तरह इस्तेमाल किया गया है और वह ज्यादा चल चुकी है तो उसकी कीमत कम होगी और निजी इस्तेमाल में ली गई वैसी ही कार की कीमत ज्यादा होगी।
 
इसके अलावा जब कोई ऋणदाता प्री-ओन्ड यानी पुरानी कार के लिए कर्ज देता है तो कर्ज ऐसी गाड़ी पर दिया जाता है, जो पुराने मालिक के नाम होती है। कार का पंजीकरण नए मालिक के नाम करने और नए कागज जारी करने में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय 45 से 180 दिन तक लगा देता है। अगर इस बीच खरीदार कर्ज की किस्त नहीं चुकाता है तो बैंक कुछ नहीं कर सकता। इसी तरह अगर पुराने मालिक ने भी कार कर्ज पर ली थी और अभी तक पूरा कर्ज नहीं चुकाया है तो मामला और पेचीदा हो जाता है। इसीलिए पुरानी गाड़ी का कर्ज नई गाड़ी के कर्ज के मुकाबले 3 से 7 फीसदी महंगा होता है।
 
नई गाड़ी खरीदने के लिए आपको भारतीय स्टेट बैंक से 9.2 फीसदी से 12.35 फीसदी के बीच ब्याज दर पर कर्ज मिल सकता है। लेकिन पुरानी गाड़ी के लिए ब्याज दर 12.9 फीसदी से शुरू होती हैं। इसी तरह ऐक्सिस बैंक भी नई कारों के लिए 9.25 फीसदी ब्याज पर कर्ज दे देता है, लेकिन पुरानी कारों के लिए ब्याज दर 15 से 17 फीसदी के बीच है। अगर आप बैंकों से इतर कहीं और से कर्ज लेते हैं और तो नई कार के लिए भी 15 फीसदी या उससे अधिक ऋण ही वसूला जाता है। इंडियन ब्लू बुक के मुताबिक पुरानी कार के लिए औसतन 3 लाख रुपये का कर्ज लिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति 17 फीसदी ब्याज दर पर चार साल के लिए इतना कर्ज लेता है तो बतौर ब्याज ही उसे 1,15,513 रुपये चुकाने पड़ते हैं। अगर वह नई कार के लिए इतनी ही रकम इतने ही समय के लिए उधार लेता है तो 9.25 फीसदी ब्याज दर होने पर उसे ब्याज के नाम पर केवल 60,056 रुपये चुकाने पड़ेंगे।
 
चूंकि ऋणदाता पुरानी कार के लिए कर्ज देते समय लेने वाले के क्रेडिट प्रोफाइल के अलावा दूसरी बातों पर भी ध्यान देते हैं, इसलिए बढिय़ा क्रेडिट स्कोर वाले शख्स को भी कई बार 15 से 18 फीसदी की दर से ब्याज चुकाना पड़ जाता है। ऐसे में कई बार तो पुरानी कार के लिए कर्ज लेने के बजाय पर्सनल लोन लेना ज्यादा सस्ता, आसान और सुविधाजनक हो जाता है। पैसाबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'अगर पर्सनल लोन भी उसी ब्याज दर पर मिल रहा हो या 1-1.5 फीसदी का ही अंतर हो तो पर्सनल लोन ले लीजिए। लेकिन मौजूदा आवास ऋण पर टॉप-अप ऋण लेना और भी अच्छा रहेगा क्योंकि उस पर ब्याज की दर और सबसे कम रहेगी।'
 
पर्सनल लोन पर ब्याज की दरें 11 फीसदी से 24 फीसदी तक होती हैं। ज्यादातर कर्ज देने वाले कार की कीमत का 70 से 80 फीसदी तक बतौर ऋण दे देते हैं। इसलिए 5 लाख रुपये की कार होने पर आपको 4 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। लेकिन यदि कर्ज देने वाला पुरानी कार की कीमत केवल 3 लाख रुपये तक लगाता है तो 80 फीसदी कर्ज दिए जाने पर भी केवल 2.40 लाख रुपये ही आपके हाथ लगेंगे। उस सूरत में आपके पास रकम की कमी हो सकती है। लेकिन वही कार खरीदने के लिए अगर आप पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं तो आपको इस मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि पर्सनल लोन में ग्राहक खुद तय करता है कि उसे कितना कर्ज लेना है।
 
ज्यादातर ऋणदाता कहते हैं कि वे पांच साल के लिए कर्ज देते हैं। लेकिन असल में पुरानी कार की उम्र और उसकी हालत देखकर ही कर्ज की अवधि तय होती है। आम तौर पर पुरानी कार के लिए कर्ज तीन साल के लिए ही दिया जाता है। मगर पर्सनल लोन आम तौर पर पांच साल के लिए मिल जाता है। अगर आवास ऋण पर टॉप-अप लिया जाता है तो अवधि और भी ज्यादा हो सकती है।
Keyword: vehicle, car, loan, पुरानी कार बाजार,
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