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जल्द निकलेगी पीएफ की रकम मगर होगा समझदारी भरा कदम?

तिनेश भसीन /  07 01, 2018

वित्तीय योजनाकार अरविंद राव की क्लाइंट ने पिछले साल अपनी नौकरी छोड़ दी और एक स्टार्टअप में काम करने चली गई। लेकिन स्टार्टअप कंपनी में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का कोई प्रावधान नहीं था। कुछ महीने बाद उसने राव से संपर्क किया और कहा कि वह अपनी भविष्य निधि (पीएफ) की रकम निकालना चाहती है और उसे सेवानिवृत्ति के बाद के लिए निवेश करना चाहती है। लेकिन उसके पास यूनिवर्सल खाता संख्या (यूएएन) नहीं था, इसीलिए पिछले कई महीने से वह पीएफ के निपटारे का और रकम आने का इंतजार कर रही है।

 
मगर राव की क्लाइंट को उसकी रकम जल्द ही मिल सकती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पिछले मंगलवार को रकम निकासी के नियमों में कुछ तब्दीली कर दी। इससे राव की क्लाइंट जैसे लोगों को राहत मिल सकती है और उन लोगों को भी फायदा हो सकता है, जिनकी नौकरी चली गई है और जिन्हें फौरन धन की जरूरत है। नए नियमों के तहत ईपीएफओ अपने सदस्यों को नौकरी छूटने यानी बेरोजगार होने के एक महीने के बाद ही 75 फीसदी रकम निकालने का विकल्प देगा। रकम तो निकल जाएगी, लेकिन सदस्यों का ईपीएफ खाता बरकरार रहेगा। लेकिन अगर दो महीने तक उनको नई नौकरी नहीं मिलती है तो नए प्रावधानों के तहत उन्हें बची हुई 25 फीसदी रकम निकालने और अपना खाता बंद करने का विकल्प भी दे दिया जाएगा। ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2017-18 में पीएफ पर 8.55 फीसदी ब्याज देने का ऐलान किया है।
 
अगर रकम का एक हिस्सा ईपीएफओ के पास ही छोड़ दिया जाए तो सदस्यों का खाता ईपीएफओ में बना रहता है और नई नौकरी लगने के बाद वे पुराने खाते का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे वे पेंशन के हकदार बन जाते हैं। ईपीएफ में सदस्य जो भी योगदान करता है, उस रकम का एक निश्चित हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में चला जाता है। अगर कोई व्यक्ति लगातार 10 साल तक नौकरी करता है तो वह पेंशन का हकदार हो जाता है और यह पेंशन उसे 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद मिलने लगती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति लगातार 10 साल तक नौकरी नहीं करता है और अपना पीएफ खाता पहले ही बंद करा लेता है तो ईपीएस में जमा उसकी रकम भी कुछ जुर्माना काटकर लौटा दी जाती है।
 
यदि कोई व्यक्ति ईपीएफओ के दायरे से बाहर जा रहा है यानी या तो वह किसी ऐसी कंपनी में नौकरी करने जा रहा है, जो ईपीएफ की सुविधा ही नहीं देती है या अपना कारोबार शुरू करने जा रहा है तो नए प्रावधान उसके लिए बड़े कारगर साबित होंगे। इनके कारण उसे पीएफ में जमा अपनी रकम का बड़ा हिस्सा जल्द ही मिल जाएगा चाहे उसके पास यूएएन हो या नहीं हो। राव कहते हैं, 'ऐसे व्यक्ति को ईपीएफ से निकली रकम या तो सेवानिवृत्ति के लिए जमा किए जा रहे धन में जोड़ देनी चाहिए या ऊंचे ब्याज वाले कर्ज को निपटाने में इस्तेमाल करनी चाहिए ताकि उसे कर्ज खत्म होने पर अधिक बचत करने का मौका मिल सके।'
 
लेकिन यदि आप दूसरी कंपनी में नौकरी करने जा रहे हैं तो पीएफ की रकम निकालना समझदारी नहीं होगी। उस रकम को नए नियोक्ता के साथ खुलने वाले ईपीएफ खाते में डलवाना आपके लिए सबसे बढिय़ा विकल्प होगा। अगर नौकरी चली जाए तो भी ईपीएफ में जमा अपनी रकम को न छुएं। उसके बजाय नई नौकरी मिलने तक अपनी दूसरी बचत का इस्तेमाल करें। प्रमाणित वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्या कहते हैं, 'ईपीएफ दीर्घकालिक निवेश होता है और आदर्श स्थिति तो यही है कि उसे सेवानिवृत्ति तक बिल्कुल न छुआ जाए।' पंड्या कहते हैं कि नए नियमों के तहत मिली छूट किसी खास स्थिति में या कोई और विकल्प नहीं होने की सूरत में तो फायदेमंद है, लेकिन इससे लोगों को अपनी सेवानिवृत्ति की रकम में सेंध लगाने का मौका भी मिल जाता है और उन्हें यह अहसास ही नहीं होता कि भविष्य के लिए इक_ïा हो रही रकम पर इसका कितना प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसीलिए वित्तीय योजनाकार यही सलाह देंगे कि आप आपात स्थिति के लिए अलग से रकम इक_ïी करें और वह रकम इतनी हो कि नौकरी जाने पर भी छह महीने तक आपके खर्च आराम से चल सकें।
 
जिन लोगों के पास यूएएन है, उनकी ईपीएफ की रकम तो कुछ हफ्तों के भीतर ही उनके हाथ में पहुंच जाएगी। लेकिन यदि अगर आप सीधे ईपीएफओ के दफ्तर में जाते हैं और कागजी दस्तावेज दाखिल कर पीएफ निकासी के लिए आवेदन करते हैं तो आपको रकम मिलने के लिए महीनों इंतजार भी करना पड़ सकता है।  कोलकाता में वेल्थ मैनेजर मल्हार मजूमदार कहते हैं कि उनके कई क्लाइंट इसी तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं। वह कहते हैं, 'कभीकभार मूलधन बैंक खाते में पहुंच जाता है और पीएफ ग्राहक को ब्याज की रकम पाने के लिए महीनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। पेंशन की रकम आने में तो इससे भी ज्यादा वक्त लग सकता है।'
Keyword: EPFO, PF, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, ईपीएफओ),
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