बिजनेस स्टैंडर्ड - अपना मकान खरीदने का यही है बढिय़ा मौका
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अपना मकान खरीदने का यही है बढिय़ा मौका

संजय कुमार सिंह /  07 01, 2018

किसी भी तरह की संपत्ति में रकम लगाने का सबसे उम्दा वक्त तब होता है, जब उसकी कीमत एकदम जमीन पर आ गई हो यानी उस संपत्ति श्रेणी से ज्यादातर निवेशक और खरीदार किनारा कर रहे हों। भारत में आवासीय रियल एस्टेट का बाजार अभी तक इसी दौर से गुजर रहा है। लेकिन अगर आप इसमें निवेश करना चाहते हैं तो जल्दी करना होगा क्योंकि कुछ अरसे में ही कीमतें चढऩे के आसार नजर आ रहे हैं।

 
आने वाले हैं रियल्टी क्षेत्र के अच्छे दिन
 
पिछले कुछ दिनों में आए आंकड़ों पर यकीन करें तो आवासीय रियल्टी बाजार का सबसे खराब दौर खत्म होता दिखता है। प्रॉपटाइगर की रियल्टी डिकोडेड रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के दौरान शीर्ष 9 शहरों में मकानों की बिक्री जनवरी-मार्च 2017 के मुकाबले 0 से 69 फीसदी तक बढ़ गई। बड़े शहरों में हैदराबाद इकलौता था, जिसमें मकानों की बिक्री 29 फीसदी कम हुई। विशेषज्ञ इन आंकड़ों को आवासीय रियल एस्टेट बाजार में लगातार सुधार होने का सबूत बताते हैं। 
एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी कहते हैं, 'मकानों के बारे में पूछताछ बढऩे लगी है, प्रतिष्ठिïत बिल्डरों की बिक्री में इजाफा हो रहा है। रहने के लिए एकदम तैयार मकानों की बिक्री खास तौर पर बढ़ रही है और आवास ऋण की मांग भी जोर पकड़ रही है।'
 
सीएलएसए के मुख्य रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड ने भी 'ग्रीड ऐंड फियर' रिपोर्ट में कहा है कि भारत में आवासीय संपत्ति का बाजार रफ्तार पकडऩे लगा है। अरसे तक जरूरत से ज्यादा मकानों के बोझ तला बाजार अब राहत महसूस कर रहा है क्योंकि खरीदारों की जेब को ये मकान माफिक आने लगे हैं।
 
बढ़ी खरीदारों की क्षमता
 
आवास ऋण क्षेत्र की नामी कंपनी एचडीएफसी के पास मकान खरीदने की क्षमता के बारे में एक अफोर्डेबिलिटी सूचकांक है। इस समय सूचकांक 3.7 पर है और दो दशकों से भी अधिक समय के बाद आंकड़ा यहां पहुंचा है।  एचडीएफसी की प्रबंध निदेशक रेणु सूद कर्नाड कहती हैं, 'आय का स्तर बढ़ा है और संपत्ति की कीमतें पिछले दो साल में कमोबेश ठहरी रही हैं। ऐसा बहुत मुश्किल से दिखता है।' ब्याज दरें कम होने से भी फायदा मिला है। कर्नाड कहती हैं, 'आवास ऋण की दरों में हाल ही में मामूली इजाफा जरूर हुआ है, लेकिन पिछले दो दशकों की औसत ब्याज दरों के मुकाबले ये अब भी बहुत कम हैं।' उनका यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकारी सब्सिडी काफी फायदेमंद रही है। इसकी वजह से 30 लाख रुपये तक के कर्ज में ब्याज की प्रभावी दर 4 फीसदी से भी कम हो गई है।
 
बढ़ रहा भरोसा
 
दबी-छिपी ही सही, मकानों की मांग तो हमेशा से थी, लेकिन परियोजना तैयार होन में बहुत ज्यादा विलंब होने के कारण खरीदारों में आगे बढऩे का हौसला खत्म हो गया था। उत्तर भारत में तो बड़े पैमाने पर परियोजनाएं अटक रही थीं। लेकिन कर्नाड के मुताबिक रियल एस्टेट नियमन एवं विकास अधिनियम (रेरा) ने हालात बहुत हद तक सुधार दिए हैं। वह कहती हैं, 'रेरा से घर खरीदारों को काफी फायदा हुआ है क्योंकि पारदर्शिता बढ़ गई है और उन्हें यकीन होने लगा है कि परियोजना वक्त पर पूरी हो जाएगी तथा उन्हें मकान की चाबी भी सही समय पर मिल जाएगी।'
 
कुछ अरसा पहले बाजार में जो उथल-पुथल मची थी, वह भी खत्म होने लगी है। प्रॉपटाइगर डॉट कॉम के मुख्य निवेश अधिकारी अंकुर धवन का कहना है, '2016-17 में रियल एस्टेट बाजार को बहुत उथल-पुथल सहनी पड़ी। पहले नोटबंदी का झटका लगा और उसके बाद रेरा तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुए। लेकिन अब ये दिक्कतें खत्म हो गई हैं।' रियल्टी की हालत इसलिए भी बदल रही है क्योंकि रहने के लिए तैयार यानी रेडी टु मूव मकानों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुरी कहते हैं, 'इन मकानों से इच्छा फौरन पूरी होने का अहसास तो होता ही है, जोखिम से दूर रहने वाले खरीदारों को काफी राहत भी मिलती है।'
 
जरूरत से ज्यादा मकान बन जाने की समस्या भी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। जेएलएल इंडिया में प्रबंध निदेशक - डेवलपमेंट सॉल्यूशंस शिव कृष्णन का कहना है, '2017 में कमोबेश सभी शहरों में बहुत कम नई परियोजनाएं शुरू होती दिखीं। नई परियोजनाएं मांग के स्तर से भी कम हो गई हैं।' मांग और खरीद की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो पुराने मकानों का भंडार बहुत कम हो जाएगा। रियल्टी उद्योग में पिछले कुछ समय से आई मंदी के कारण डेवलपर अपनी परियोजनाओं का आकार दुरुस्त करने में लग गए हैं। धवन बताते हैं, 'पहले मुलुंड या चेंबूर में 35 से 40 लाख रुपये कीमत वाला फ्लैट ढूंढ पाना असंभव था। लेकिन अब डेवलपर उस कीमत में एक कमरे और रसोई वाले मकान भी बना रहे हैं। उनका आकार घटाकर 200 से 250 वर्ग फुट कर दिया गया है।' सरकार ने कई प्रोत्साहन दिए हैं, जिसकी वजह से इस आकार और कीमत के मकानों की अच्छी खासी मांग हो गई है।
 
रेडी टु मूव इन परियोजनाओं की मांग तो मंदी के दौरान भी बनी रही, लेकिन अब कुछ नई परियोजनाओं को भी अच्छी प्रतिक्रिया मिलने लगी है। कृष्णन को लगता है कि अगर कीमत सही हो, जगह यानी लोकेशन अच्छी हो और मकान का आकार ठीकठाक हो तो नई परियोजनाओं के लिए भी मांग रहती है। जिन खरीदारों के पास ज्यादा रकम नहीं है और जो परियोजनाओं के निर्माण के दौरान केवल प्री-ईएमआई चुकाना चाहते हैं, वे ऐसे ही मकान चुन रहे हैं।
 
निवेशक रखें ध्यान
 
इस बात का ध्यान रखें कि रियल एस्टेट के पटरी पर लौटने की रफ्तार हरेक शहर में अलग-अलग है और किसी एक शहर के भीतर भी हरेक इलाके में अलग-अलग है। इसीलिए सही लोकेशन का चुनाव ही सबसे अहम मुद्दा होता है। जिन शहरों में बिना बिके मकानों की तादाद बहुत ज्यादा है, उनमें हालात सुधरने में कुछ वक्त लग सकता है। धवन आगाह करते हैं कि लक्जरी रियल्टी में अभी तक पटरी पर लौटने के आसार नहीं दिख रहे हैं। उनके हिसाब से सही फैसला लेने का एक ही मंत्र है - ऐसे इलाके चुनिए, जहां रोजगार के मौके तैयार हो रहे हों या बुनियादी ढांचा विकास हो रहा हो। अगर शहर के बाहरी इलाकों में कीमतें कम हैं और विकास का काम तेजी से चल रहा है तो वहां निवेश करना आगे चलकर अच्छा खासा नफा देगा। मिसाल के तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के इलाके को जेवर में बनने वाले हवाई अड्डïे के कारण फायदा हो सकता है। निवेशकों को मकान या संपत्ति के आकार का भी खयाल रखना चाहिए। ज्यादा बड़ी संपत्ति में निवेश करने का जोखिम भी ज्यादा होता है क्योंकि छोटी संपत्ति के मुकाबले उसके खरीदार कम होते हैं। इस बात का भी खयाल रखें कि रियल्टी बाजार में अधिक से अधिक 5 से 7 साल के लिए ही दाखिल हों।
 
रहना हो तो क्या करें
 
संपत्ति के दाम अब भी ठहरे हुए ही हैं और डेवलपर इस वक्त भी 10 से 15 फीसदी की छूट दे रहे हैं। साथ ही भुगतान के विकल्पों में भी अच्छी खासी रियायत मिल रही है। लेकिन कुछ अरसे बाद ही कीमतों में तेजी आना शुरू हो सकती है। पुरी कहते हैं, 'आवास ऋण पर ब्याज की दरें बढऩा शुरू हो गई हैं। इसीलिए आपको जो भी सबसे अच्छा सौदा मिले, उसे लपक लीजिए।' चुनाव करते वक्त लोकेशन, परियोजना की गुणवत्ता और डेवलपर की साख तथा कामकाज के तरीके पर सबसे ज्यादा ध्यान दीजिए। ज्यादा छूट पाने के चक्कर में इन बातों पर किसी भी सूरत में समझौता मत कीजिए।
Keyword: real estate, property, संपत्ति रियल एस्टेट मकान,
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