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एयर इंडिया के निजीकरण में बाजार की परिस्थितियां बनीं बाधा: जयंत सिन्हा

अरिंदम मजूमदार /  June 29, 2018

सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया का निजीकरण करने की नागरिक विमानन मंत्रालय की योजना का कोई नतीजा नहीं निकला। हालांकि नागरिक विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा इसे असफलता नहीं मानते हैं और उनका कहना है कि विमानन कंपनी में बदलाव की प्रक्रिया जारी है। जयंत सिन्हा ने अरिंदम मजूमदार से एक साक्षात्कार में सरकार की चार साल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि विमानन क्षेत्र में आए बदलाव का राजनीतिक फायदा सरकार को मिलेगा। बातचीत के संपादित अंश: 

 
सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में से एक एयर इंडिया को वैश्विक स्तर की विमानन कंपनी बनाना भी है। अब यह बात साफ हो गई है कि सरकार के स्वामित्व के साथ ऐसा संभव नहीं है। ऐसे में विनिवेश की प्रक्रिया में नाकाम रहने के बाद आगे का क्या रास्ता बचता है?
 
जैसा कि हमारे मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि बाजार के हालात और उद्योग की गतिशीलता से ही विनिवेश की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। आप भी यह जानते हैं कि हमने एक प्रक्रिया शुरू की लेकिन हमें कोई बोली नहीं मिली। फिलहाल बाजार के हालात और उद्योगों की गतिशीलता पर तेल की कीमतों, ऊंची ब्याज दरों और मुद्रा में उतार-चढ़ाव का असर है। इन्हीं वजहों से यह जरूरी है कि हम अपना मूल्यांकन करें और भविष्य के कदम का फैसला करें। मंत्रियों का एआईएसएएम समूह ऐसा करेगा। हम इसकी निगरानी करेंगे साथ ही बाजार की परिस्थितियों, उद्योगों की गति का आकलन करते हुए सही समय में सही फैसला करेंगे। 
 
लेकिन ऐसे अवरोध तो हमेशा बने रहेंगे। विनिवेश के लिए फिर कभी सही वक्त नहीं आएगा। पिछले जून में जब विनिवेश की प्रक्रिया शुरू हुई उस वक्त भी तेल की ऊंची कीमतों का पूर्वानुमान लगाया गया था। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों को दोषी क्यों ठहराया जा रहा है?
 
इस प्रक्रिया को पूरा करने का बीड़ा हमें ही उठाना है और ऐसी प्रक्रिया में काफी वक्त लगता है क्योंकि हमें प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति कंपनी बनानी थी। पहले पेशकश की शर्तों का फैसला करने से लेकर सभी जरूरी मंजूरी हासिल करना और फिर इसे सरकारी प्रक्रिया के हिसाब से पेश करने स्वाभाविक रूप से वक्त लगता है। हमने पूरी प्रक्रिया में ईमानदारी बरतने और उसे गोपनीय रखने में जरूरी वक्त लिया। इसके बाद भी हमें बोली नहीं मिली। जब फैसला लिया गया था उस वक्त बाजार की परिस्थितियां काफी अनुकूल थीं लेकिन अब बाजार और उद्योग के हालात ज्यादा अनुकूल नहीं है। ऐसे में हमें इन सभी पहलुओं पर विचार करना है और इसके हिसाब से ही आगे बढऩा है। 
 
क्या आप मानते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया असफल रही?
 
सबके पास अपने हिसाब से सोचने का अधिकार है। लेकिन मैं कहूंगा कि हमने सबसे बड़े रणनीतिक विनिवेश प्रक्रिया की शुरुआत की। हमने बिक्री के लिए बेहद संतुलित पेशकश की। लेकिन आखिरकार सबकुछ बाजार पर निर्भर करता है कि लोग एयर इंडिया में 76 फीसदी हिस्सेदारी लेने के लिए इच्छुक हैं या नहीं। मेरा मानना है कि सरकार ने वही किया जो सही और जरूरी था। अब हमें बाजार की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करना है और आगे बढऩा है। 
 
इस पेशकश के लिए आखिर प्रतिकूल प्रतिक्रिया क्यों मिली?
 
मैं इस बात का अंदाजा नहीं लगाऊंगा कि लोग क्यों बोली लगाते हैं या नहीं लगाते। मेरा मानना है कि हमने संपूर्ण प्रक्रिया का अनुसरण किया। सभी जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराईं गईं। लेन-देन सलाहकार ने उन सभी पक्षों के साथ संवाद किया जिनकी दिलचस्पी इसमें थी। इसके बाद हमें उनकी राय के बारे में बताया गया कि आखिर कोई बोली क्यों नहीं लगाई गई। हम इसका आकलन करेंगे और अगले कदम के बारे में फैसला करेंगे। 
 
क्या आगामी लोकसभा चुनावों से पहले इसके लिए वक्त बचा होगा?
 
मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
 
कई सालों से अब तक एयर इंडिया के प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं आया है। इसकी बाजार हिस्सेदारी भी घट रही है और इसके बेड़े को लेकर भी कोई ठोस योजना नहीं है। ऐसे में एयर इंडिया का क्या भविष्य है?
 
मैं इन सभी बातों को खारिज करता हूं। एयर इंडिया में काफी सफल बदलाव देखा गया है। आप सभी मानकों के आधार पर इस विमानन कंपनी का आकलन करें तो आप पाएंगे कि इसमें काफी बदलाव दिखा है। एयर इंडिया के मुश्किलों के दौर से गुजरने की वजह यह है कि हम पर कर्ज का भारी बोझ है और विमानन कंपनी के विलय की प्रक्रिया अच्छी तरह पूरी नहीं की गई। इसके अलावा द्विपक्षीय अधिकारों से जुड़े कई फैसलों की वजह से एयर इंडिया पर असर पड़ा। यह सब कुछ पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुआ। हमारी सरकार के कार्यकाल में हमने इसमें काफी सुधार किया है। भविष्य के लिए हमने एयर इंडिया में वैश्विक विमानन कंपनी के तौर पर सुधार की रणनीति बनाई है जिसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेटवर्क हो। एयर इंडिया के पास पर्याप्त विमान बेड़ा और स्लॉट है। यह दुनिया के प्रमुख शहरों तक सीधी विमान सेवा के जरिये अपने हवाई यात्रियों को नए अनुभव देगी। 
 
क्या आपकी सरकार ने विमानन क्षेत्र के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं जिसे आप चुनावों में अपनी सफलता के तौर पर दर्शा पाएंगे?
 
हमारी सरकार के लिए विमानन क्षेत्र सफल रहा है। 48 महीनों में हमने विमानन क्षेत्र का कायापलट इस तरह किया है कि अब यह मुख्यधारा का एक वैकल्पिक परिवहन साधन बन चुका है। हमारे आकलन के मुताबिक पांच करोड़ भारतीय देश में उड़ान भर रहे हैं। 'उड़ान' योजना के जरिये हमने 32 हवाईअड्डे जोड़े हैं और जब भी हमने एक नए हवाईअड्डे की शुरुआत की तो कनेक्टिविटी को लेकर नागरिकों की तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया देखी गई। मैं आपको इलाहाबाद का उदाहरण दूंगा जहां कुंभ मेला शुरू होगा। इलाहाबाद में कई नई हवाई कनेक्टिविटी बनी है। अब आप पर्यटन के लिहाज से कुंभ मेला पर इसके असर की कल्पना कर सकते हैं। आप सूरत के व्यापार पर इसके असर का अंदाजा लगाए जब यहां एक दिन में 20 उड़ान की सेवाएं शुरू हो जाएगी। इसी वजह से जब इन हवाईअड्डïों की शुरुआत हुई तब इसका स्वागत काफी उत्साह से किया गया। इसी वजह से जब राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के लिहाज से जब इन हवाईअड्डïों की शुरुआत हुई थी तब इससे सरकार की उपलब्धियों का अंदाजा मिला और यह उत्साहजनक है। 
 
एयर ओडिशा और एयर डेक्कन का प्रदर्शन नए मार्गों पर सफलतापूर्वक संचालन के लिहाज से उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। क्या आप ऐसा सोचते हैं कि इन मार्गों पर उड़ान की इजाजत देते वक्त सरकार को विमानन कंपनियों के वित्तीय प्रोफाइल को लेकर ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है?
 
क्षेत्रीय विमानन कंपनी के तौर पर एयर डेक्कन और एयर ओडिशा बेहतर मिसाल है। दुनिया भर में इन विमानन कंपनियों की मौजूदगी है जो मेट्रो हवाईअड्डे पर सहायक के तौर पर काम करती हैं। अगर भारत 150-200 क्षेत्रीय हवाईअड्डïों को खोलता है तो ऐसी जिम्मेदारी उठाने के लिए इन विमानन कंपनियों का सक्षम होना जरूरी है। सरकार ने उनके कारोबार को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। विमानों को किराये पर देने के लिहाज से प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। उनकी वृद्धि के लिए जो कुछ भी करने की जरूरत थी वह सबकुछ किया जा रहा है। 
 
यात्रियों की तादाद बढऩे से हवाईअड्डे की क्षमता को लेकर संकट जैसी स्थिति बनी है? नभ निर्माण जैसी परियोजना के नतीजे 15-20 साल में दिखेंगे ऐसे में तात्कालिक समाधान क्या है?
 
नभ निर्माण योजना से 15-20 सालों में हवाईअड्डे की क्षमता पांच गुना हो जाएगी। यह सही है। लेकिन हम हर दिन हवाईअड्डे की क्षमता में सुधार के लिए विभिन्न बिंदुओं पर काम कर रहे हैं। हम कई मोर्चे पर काम कर रहे हैं, मसलन डिजीयात्रा में सुधार लाने, नए टर्मिनल का निर्माण करने और ज्यादा ऑनलाइन चेक-इन की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। हमने चेक इन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बैगेज टैग को खत्म कर दिया है और नए एयरोब्रिज का निर्माण करते हुए नए पार्किंग स्टैंड भी तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा क्षमता बढ़ाने के लिए पुराने हवाईअड्डे पर नए रनवे भी तैयार कर रहे हैं। हम 12 नए एयरपोर्ट टर्मिनल और 14 नए हवाईअड्डे का निर्माण कर रहे हैं। अगले पांच सालों में अगर आप इन सभी चीजों को जोड़कर देखें तो हवाईअड्डे की क्षमता के लिहाज से हम 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। हवाईअड्डïों पर गतिशीलता बढ़ाने के लिए हवाईअड्डों से जुड़ी मेट्रो कनेक्टिविटी और राजमार्ग के बारे में भी हम सोच रहे हैं। 
Keyword: aviation, air india, jayant sinha, एयर इंडिया विमानन,
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