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आईसीआईसीआई बैंक को नई दिशा देंगे चतुर्वेदी

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली June 29, 2018

शायद बहुत कम लोगों को याद होगा कि गिरीश चंद्र चतुर्वेदी को 26 अप्रैल, 2010 को राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति का विशेष महानिदेेशक बनाया गया था। आईसीआईसीआई बैंक ने आज कहा कि उसने चतुर्वेदी को बोर्ड में तीन साल के लिए स्वतंत्र निदेशक और गैर-कार्यकारी अंशकालिक चेयरमैन बनाया है।  उन्हें यह जिम्मा ऐसे समय मिला है, जब देश का निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक अपनी छवि पर आंच और अपनी मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोछड़ के खिलाफ निजी लाभ के लिए पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच का सामना कर रहा है।  आईसीआईसीआई बैंक ने शुक्रवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज को सूचना दी कि चेयरमैन के रूप में तीन साल के लिए उनकी नियुक्ति रविवार या नियुक्ति के लिए आरबीआई की मंजूरी मिलने की तारीख से प्रभावी हो जाएगी। यह पद एमके शर्मा (स्वतंत्र निदेशक एवं चेयरमैन) का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हुआ है। 
 
चतुर्वेदी पहले नौकरशाह रह चुके हैं। वह 1977 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए थे। वह संप्रग सरकार में वित्तीय सेवा विभाग में अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं। वर्ष 2011 में वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में आए थे। उस समय केयर्न-ïïवेदांत खरीद विवाद अपने चरम पर था और पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी के सचिव एस सुंदरेशन दूसरे मंत्रालय में चले गए थे।  चतुर्वेदी राष्ट्रमंडल खेल समिति में भी शामिल थे। उस समय रेड्डी शहरी विकास मंत्रालय में थे। उत्तर प्रदेश कैडर के ये नौकरशाह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में नए थे। इसलिए वह शुरुआत के कुछ दिनों में सभी संयुक्त सचिवों और निदेशकों के पास जाते थे और व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपना परिचय देते थे। पदानुक्रम को लेकर सजग नौकरशाह में ऐसा होना बहुत दुर्लभ है। इससे पहले वह केंद्रीय वित्त मंत्रालय में करीब 4 साल तक रहे। इसमें वह वित्तीय सेवा विभाग में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव रहे। यहां से उन्हें बैंकिंग का कौशल मिला। 
 
आईसीआईसीआई के वर्तमान चेयरमैन एमके शर्मा का कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो रहा है। चतुर्वेदी की नियुक्ति के लिए बैंक शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत होगी। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से सोशल पॉलिसी में स्नातकोत्तर और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है।  बोर्ड को उम्मीद है कि चतुर्वेदी बोर्ड में होने वाली चर्चाओं को 'परिपक्व और दूरदर्शी' बनाएंगे। बीएसई को दी सूचना में कहा गया है, 'इससे बोर्ड के स्तर पर आसानी से नेतृत्व में बदलाव सुनिश्चित होगा और शेयरधारकों की चिताएं दूर होंगी।'
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