बिजनेस स्टैंडर्ड - भारत-चीन आयात बाधा खत्म करने की हो पहल
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भारत-चीन आयात बाधा खत्म करने की हो पहल

शुभायन चक्रवर्ती /  June 28, 2018

भारत समेत कई देशों के उत्पादों की एक व्यापक शृंखला पर आयात शुल्क कम करने की घोषणा के बावजूद सरकार और उद्योग व्यापार की मौजूदा बाधाओं और चीन के आयात में कमी को ध्यान में रखते हुए भारत की निर्यात संभावनाओं को लेकर काफी सतर्क हैं। गुरुवार को चीन के वित्त मंत्रालय ने घोषणा की थी कि भारत, बांग्लादेश, लाओस, दक्षिण कोरिया और श्रीलंका के आठ हजार से भी अधिक उत्पादों से आयात शुल्क घटाया जाएगा। चीन ने इसे एशिया-प्रशांत व्यापार समझौते (एपीटीए) के तहत शुल्क रियायत व्यवस्था केरूप में शुल्क दरों को समायोजित करने वाला कदम बताया था।

 
भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने बुधवार को ट्वीट में कहा, 'चीन भारत, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, लाओस और श्रीलंका से 8,549 प्रकार की वस्तुओं केआयात पर शुल्क में या तो कटौती करेगा या फिर खत्म कर देगा। इन वस्तुओं में रसायन, कृषि एवं चिकित्सकीय उत्पाद, सोयाबीन, कपड़े, इस्पात और एल्युमीनियम उत्पाद शामिल हैं।  व्यापार असंतुलन कम करने के लिए अच्छी खबर।' हालांकि चीन ने उत्पादों की सूची जारी नहीं की है, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठï अधिकारियों ने यह पुष्टि की है कि गुरुवार की शाम तक कोई भी आधिकारिक सूचना भारत नहीं पहुंची है। एक अधिकारी ने कहा कि हम चीन में हो रही प्रगति पर नजर रखेंगे लेकिन अंतिम सूची महत्त्वपूर्ण होगी। वर्तमान में जिन विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार होता है, उनमें व्यापार के लिए चीन को तकनीकी बाधाओं को खत्म करने की भी जरूरत होगी।
 
व्यापार में काफी अड़चनें रहती हैं, खासकर उनके संबंध में जो गैर-शुल्क प्रकृति वाले होते हैं। यह बात फार्मा क्षेत्र के लिए सटीक रही है, जिसे भारत द्वारा सबसे अधिक महत्त्वाकांक्षी क्षेत्रों में से एक समझा जाता है और जिसे चीन द्वारा आयात शुल्क कम करने के अपने हालिया कदम में शामिल किया है। मार्च में चीन के वाणिज्य मंत्री झोंग शान जब दिल्ली आए थे तब उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार असमानता खत्म करने के लिए फार्मा क्षेत्र को एक प्रमुख क्षेत्र माना। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भारत के फार्मास्यूटिकल्स निर्यातकों के 240 आवेदनों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी जो चीन में लंबित हैं। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय आवेदनों के लिहाज से चीन खाद्य एवं दवा प्रशासन के साथ नियामकीय बाधाएं काफी ज्यादा हैं। हाल में समीक्षा नीति में हुए ताजा बदलावों में यह बात सामने आई है कि चीन में स्थानीय स्तर पर तैयार की गई नई दवाओं की प्राथमिकता से समीक्षा की जाती है। 
 
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय कहते हैं, 'चीन सरकारी उद्यम द्वारा संचालित अर्थव्यवस्था है और सरकारी कंपनियां हीं ज्यादातर आयात के ऑर्डर देती हैं। कृषि जिंसों और फार्मा उत्पादों की बाजार तक पहुंच से जुड़ी समस्या बरकरार है। इन समस्याओं का समाधान पहले करना होगा क्योंकि जमीनी स्तर का निर्यात इसके बगैर नहीं बढ़ सकता है।' एशिया-प्रशांत व्यापार समझौता (एपीटीए) कई दशकों से अच्छी तरह चल रहा था लेकिन इसके तहत कवर किए जाने वाली वस्तुओं की सूची बेहद कम थी। चीन ने इसका विस्तार करने का फैसला किया जिससे दूसरे देशों से होने वाले निर्यात में इसे निश्चित रूप से मदद मिलेगी लेकिन इसकी वजह से अब चीन के व्यापार साझेदार उन पर ज्यादा आयात करने का दबाव भी बना रहे हैं ताकि व्यापार घाटे में कमी लाई जा सके।
 
भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देशों के बीच सबसे पुराने तरजीही व्यापार समझौता एपीटीए पर 1975 में हस्ताक्षर किया था लेकिन उस वक्त से समझौते में विस्तार के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया गया। हाल में चीन ने जो शुल्क कटौती की घोषणा की है उसकी वजह जनवरी 2017 में एशिया-प्रशांत व्यापार समझौते पर हुई चर्चा है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ व्यापार विशेषज्ञ और प्रोफेसर विश्वजित धर कहते हैं कि कई नियमों की वजह से निर्यातकों के लिए अब व्यापार ज्यादा जटिल साबित होगा। 
Keyword: india, china, trade, भारत-चीन आयात,
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