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बाजार में पतंजलि का प्रवेश शुरू में रहा चुनौतीपूर्ण

अर्णव दत्ता /  06 28, 2018

पतंजलि से चुनौती मिलने और वृहद स्तर पर समस्याओं से घरने के बाद आयुर्वेद दिग्गज डाबर अपना प्रदर्शन सुधारने पर ध्यान दे रही है। बेहतर बिक्री और मार्जिन की मदद से कंपनी आयुर्वेद की फिर से बढ़ती लोकप्रियता का लाभ उठाने की संभावना तलाश रही है। डाबर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने अर्णव दत्ता के साथ अपनी योजनाओं के बारे में विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
हाल की तिमाहियों में डाबर की बिक्री में सुधार आया है। इसमें आपको कैसे सफलता मिली?
 
वर्ष 2016-17 के अंत और 2017-18 के शुरू में हम धीमी मांग, नोटबंदी और पतंजलि से प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारकों की वजह से हम दबाव से जूझ रहे थे। नोटबंदी और जीएसटी हमारे स्वयं के ढांचे के जरिये बाजार में गहराई तक जाने की जरूरत का संकेत थे। इस तरह से, इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए हर जगह से रकम जुटाने की कोशिश की गई। विज्ञापन और प्रोत्साहन खर्च में कमी की गई, बोनस में कमी की गई। ग्रामीण बाजार में, हमने पोर्टफोलियो को विभाजित किया और इसे हेल्थकेयर तथा पर्सनल केयर में बांटा गया, बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया। हमने 400 कर्मियों को भी जोड़ा। इन उपायों से हमें हाल की तिमाहियों में अच्छा लाभांश हासिल करने में मदद मिली।
 
क्या आप भविष्य में मांग में तेजी आने की उम्मीद कर रहे हैं?
 
टूथपेस्ट, शैम्पू, हेयर ऑयल जैसी कई श्रेणियों में उद्योग की वृद्घि दर अभी भी धीमी बनी हुई है। होम एंड पर्सनल श्रेणी की वृद्घि दर दो वर्ष के निचले स्तर पर है। ऊंची वृद्घि दर का सपना अभी कुछ दूर बना हुआ है।
 
आप 2016 और 2017 में कुछ खास श्रेणियों में पतंजलि के हाथों बाजार भागीदारी गंवा चुके हैं। आयुर्वेद पोर्टफोलियो के लिए आपकी क्या रणनीति है?
 
पिछली दो तिमाहियों में हमारी उद्योग की औसत वृद्घि की तुलना में ज्यादा मजबूत रफ्तार से हमें हनी और ओरल केयर जैसी श्रेणियों में बाजार भागीदारी पुन: बढ़ाने में मदद मिली। विभिन्न श्रेणियों के लिए हमारी रणनीतियां अलग अलग हैं। हर्बल या आयुर्वेदिक ओरल केयर उत्पादों का आकार बढ़कर 25 प्रतिशत हो गया है, इसलिए हमें उपभोक्ताओं के लिए कई और विकल्प पेश करने पर ध्यान देना होगा। 
 
क्या आप मानते हैं कि संकट में फंसने के बावजूद पतंजलि का प्रवेश चुनौतीपूर्ण रहा?
 
हां, यह सही है। आयुर्वेद बाजार का आकार बढ़ा है जिससे हमारी वृद्घि की रफ्तार मजबूत हुई है। पहले की तुलना में अब हम सभी श्रेणियों के अपने आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग में ज्यादा तेजी देख रहे हैं और यह कारक हमारे प्रदर्शन में अहम योगदान दे रहा है। अल्पावधि में, पतंजलि की वजह से हमें समस्याओं का सामना करना पड़ा। लेकिन दीर्घावधि में इससे बाजार का आकार बढ़ा है। कुल मिलाकर, यह एक ऐसी नई कंपनी है जो व्यवधान पैदा कर सकती है और उसके परिणामस्वरूप भागीदारी बढ़ा सकती है। 
 
योजनाएं बनाने के बावजूद दो वर्षों से आपने किसी ब्रांड का अधिग्रहण क्यों नहीं किया है?
 
हम इस संदर्भ में लगातार तलाश कर रहे हैं, लेकिन निजी इक्विटी (पीई) कंपनियों की भरमार की वजह से मूल्य निर्धारण में बड़ा इजाफा हुआ है। पीई द्वारा ऊंचे मूल्यांकन की वजह से कई सौदे हाथ से निकल गए। हम हनीटस जैसे हेल्थकेयर ब्रांडों का दायरा बढ़ाएंगे। हम हर साल कुछ ब्रांडों का चयन करेंगे।
Keyword: patanjali, FMCG, Dabur, पतंजलि सुनील दुग्गल,
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