बिजनेस स्टैंडर्ड - अमेरिका-चीन के व्यापार युद्घ से घबराया रुपया
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अमेरिका-चीन के व्यापार युद्घ से घबराया रुपया

अनूप रॉय और देव चटर्जी / मुंबई 06 28, 2018

बिजनेस स्टैंडर्ड अमेरिका-चीन के व्यापार युद्घ से घबराया रुपयाअमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्घ के चलते डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखी जा रही है। बुधवार को उभरते बाजारों की मुद्राओं में सबसे ज्यादा रुपये में गिरावट दर्ज की गई और वह डॉलर के मुकाबले 19 माह के निचले स्तर पर आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.55 फीसदी फिसलकर 68.63 पर बंद हुआ, जो 24 नवंबर 2016 के रिकॉर्ड निचले स्तर 68.87 से महज 29 पैसे ही ऊपर है। हालांकि भारत मुद्रा युद्घ से दूर बना हुआ है लेकिन उसके पास अपने निर्यात को समायोजित करने के लिए रुपये में अवमूल्यन करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं है।

चीन भी अपनी मुद्रा का लगातार अवमूल्यन कर रहा है। डॉलर के मुकाबले चीनी मुद्रा रेमिनबी में 0.44 फीसदी की गिरावट आई है। डीबीएस में समूह मुख्य अर्थशास्त्री और प्रबंध निदेशक तैमूर बेग ने कहा कि वैश्विक व्यापार में चीन के महत्व को देखते हुए कहा जा सकता है कि जब चीनी मुद्रा दबाव में हो तो दुनिया भर में इसका असर पडऩा लाजिमी है। ऐसे में डॉलर को सुरक्षित निवेश माना जा रहा है।

व्यापार युद्घ से जुड़े घटनाक्रम रुपये और उभरते बाजारों की अन्य मुद्राओं पर आगे और दबाव डाल सकते हैं। बेग ने कहा, '2018 की शुरुआत से ही विदेशी मुद्रा विनिमय पर दबाव बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका में दरें बढऩे से डॉलर मजबूत हो रहा है। इसके बावजूद हमारा मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया इस साल 60 से 69 के दायरे में रहेगा।' मुद्रा डीलरों का कहना है कि अगस्त तक रुपया 70 के स्तर पर पहुंच सकता है और भारतीय रिजर्व बैंक रुपये को ज्यादा सहारा देने के लिए आगे नहीं आएग, क्योंकि सभी उभरते बाजारों की मुद्रा में गिरावट आ रही है।

बजाज ग्रुप में वित्त प्रमुख प्रवाल बनर्जी ने कहा, 'कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भारत के तेल आयातक देश होने की वजह से रुपये के स्थिर रहने या उसमें सुधार आने की संभावना नहीं है। रुपये में गिरावट आ रही है और हम ऐसा होते स्पष्टï तौर पर देख सकते हैं।' विशेषज्ञों ने कहा कि रुपया अगर 70 तक पहुंचता है तो कई भारतीय कंपनियों को परेशानी हो सकती है। कई कंपनियां लंबे समय के लिए हेजिंग नहीं करती हैं।

फस्र्ट रैंड बैंक के ट्रेजरी प्रमुख हरिहर कृष्णमूर्ति ने कहा, 'माह के अंत में डॉलर की मांग बढऩे से रुपये पर दबाव बढ़ा है। कई कंपनियों ने हेज नहीं किया है। समस्या यह है कि जब निर्यातक 66-67 के स्तर पर डॉलर की बिकवाली कर रहे थे तब आयातकों ने उसकी हेजिंग नहीं की और सोचा था कि रुपये में ज्यादा गिरावट नहीं आएगी।' कृष्णमूर्ति को उम्मीद है कि इस स्तर पर निर्यातकों की ओर से डॉलर की इअच्छी बिकवली की जा सकती है जिससे आयातकों की मांग पूरी हो सकती है। इससे रुपये को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर रुपया हेजिंग के दबाव में आता है तो रिजर्व बैंक 2013 की तरही ही डॉलर जमा योजना ला सकता है। इसके जरिये 30 से 35 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं और विदेशी निवेशकों की ओर से की जाने वाली बिकवाली की उससे भरपाई की जा सकती है। इस साल विदेशी निवेशकों ने इक्विटी और डेट में करीब 6.9 अरब डॉलर की बिकवाली की है। फिलहाल आरबीआई की  मुद्रा बाजार से दूरी बाजार को परेशान कर रहा है।

प्रवाल बनर्जी ने कहा, 'पहले आरबीआई अक्सर रुपये की गिरावट का थामने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करता था लेकिन हाल के दिनों में आरबीआई उतनी सक्रियता नहीं दिखा रहा है। इसके साथ ही पूंजी उगाही में डॉलर का प्रवाह सीमित होने से भी हालात चिंताजनक बन रहे हैं। अगर सरकार की ओर से कोई उपाय नहीं किए जाते हैं तो निकट भविष्य में स्थितियां बदलने की संभावना कम ही है।'

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