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मॉनसून सक्रिय होने से बढ़ेगा खरीफ का रकबा

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 06 27, 2018

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कुछ ठहराव के बाद पूर्वी, मध्य, दक्षिणी और पश्चिमी भारत के क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से फिर से सक्रिय हो गया है। ये वे क्षेत्र हैं जहां मुख्य रूप से दलहन, तिलहन, कपास और धान की खेती की जाती है। भारी बारिश से लेकर बहुत भारी बारिश तक का पूर्वानुमान है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से बुआई में वृद्घि होने की उम्मीद है। जैसा कि सरकार ने घोषणा की है न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से 50 फीसदी अधिक होने की उम्मीद है। धान के मामले में बारिश के मौजूदा चरण में झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में धान की रोपाई में तेजी आएगी। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। हालांकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मॉनसून की जल्द शुरुआत के बाद निष्क्रिय पडऩे से बुआई कम रही है।  हालांकि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तर भारत के राज्यों में मॉनसून आने में देरी की वजह से न केवल मैदानी भागों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, बल्कि इस क्षेत्र में खरीफ की प्रमुमख फसलों की बुआई पर भी असर पड़ा है। दूसरी तरफ मॉनसून में होने वाली देरी और इसके अनियमित रहने से कुल बुआई पर असर पड़ सकता है। इसका असर महाराष्ट्र और गुजरात में भी अनुभव किया जा सकता है। 
 
तमिलनाडु का अधिक खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य   
 
तमिलनाडु सरकार ने 2017-18 के 1.094 करोड़ टन और 2016-17 के 52.4 लाख टन के मुकाबले 2018-19 में 1.1 करोड़ टन खाद्यान्न का लक्ष्य रखा है। खाद्यान्न के अलावा तिलहन, कपास और गन्ने का उत्पादन 47.5 लाख टन रहने की उम्मीद है। तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर दुरैक्कन्नू ने कहा कि 2018-19 में क्षेत्र और फसल के मुताबिक प्रौद्योगिकी इस्तेमाल की योजना बनाने से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। खाद्यान्नों में चावल उत्पादन पहले की तरह ही अव्वल रहेगा। हालांकि, कावेरी डेल्टा क्षेत्र में खाद्यान्न उत्पादन, विशेषकर धान की खेती के लिए मॉनसून के अलावा, कावेरी नदी से सिंचाई की व्यवस्था पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। 
   
महाराष्ट्र के रकबे में आ सकती है कुछ गिरावट 
 
महाराष्ट्र के कुल रकबे में थोड़ी कमी देखी जा सकती है। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों से बारिश में फिर से सुधार होने के बावजूद कुछ किसानों ने सोयाबीन से हटकर कपास की खेती का रुख कर लिया है, जिससे महाराष्ट्र के खरीफ रकबे में 1-2 फीसदी की कमी आने की संभावना है। भले ही सरकार ने 2019 तक महाराष्ट्र को अकाल मुक्त करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य बनाया है, फिर भी खरीफ फसल की बुआई बारिश पर ही निर्भर रहेगी।' 
मॉनसून में देरी होने से खरीफ की शुरुआती बुआई पर असर पड़ता है। महाराष्ट्र में किसान खरीफ फसल की कटाई के समय बेहतर आमदनी को लेकर आशंकित हैं। कृषि जिंसों की कीमतों में आई हालिया तेजी को लेकर वे इस साल जबरदस्त बुआई के लिए जब तक उत्साहित नहीं होंगे, तब तक उनकी यह आशंक बनी रह सकती है।
 
पश्चिम बंगाल में धान सामान्य, पटसन में कमी
 
पश्चिम बंगाल में दक्षिण पश्चिम मॉनसून के समय पर आने से राज्य में खरीफ के मौसम में धान की सामान्य पैदावार होने की उम्मीद है। राज्य में सालाना करीब 1.5 करोड़ टन चावल का उत्पादन होता है, जिसका 70 फीसदी हिस्सा खरीफ मौसम में उगाया जाता है। हालांकि, कोलकाता की एक पटसन मिल के मालिक घनश्याम शारदा के मुताबिक पिछले वर्ष पटसन की कम कीमत मिलने की वजह से इस वर्ष पटसन की बुआई में 15-20 फीसदी की कमी देखी जा रही है। इस साल पश्चिम बंगाल में पटसन की 70 लाख गांठों (एक गांठ का वजन 170 किलोग्राम होता है) का उत्पादन होने के आसार हैं। कृषि विशेषज्ञ प्रणव चटर्जी ने कहा, 'यदि मॉनसून का रुझान सामान्य रहता है तो हमें खरीफ के मौसम में 40 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई की उम्मीद है।' एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'पिछले हफ्ते तक कुछ जिलों में बारिश में 8-9 फीसदी की कमी रही। हालांकि स्थिति में अब सुधार हुआ है और हमें सामान्य बुआई की उम्मीद है।' भारत के कुल चावल उत्पादन में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 14-16 फीसदी तक रहती है।
 
तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में बुआई पर लगा ब्रेक
 
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मॉनसून की उम्मीद के मुताबिक शुरुआत होने के बाद तीसरा हफ्ता सूखा रहने से इन दोनों राज्यों में बुआई की दर धीमी पड़ गई। दोनों राज्यों के अधिकारी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि बुआई में फिर से तेजी आएगी। खरीफ मौसम में दोनों राज्यों का सामान्य रकबा लगभग 40 लाख हेक्टेयर है। आंध्र प्रदेश में धान के बाद मूंगफली और कपास प्रमुख फसलें हैं, जबकि तेलंगाना में धान और मक्के के बाद फसलों के कुल रकबे के करीब 50 फीसदी पर कपास की खेती की जाती है। तेलंगाना कृषि विभाग में अतिरिक्त निदेशक के विजय कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'इस समय तक हम तेलंगाना में 10-12 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुआई कर चुके होते थे लेकिन अभी तक केवल 7-8 लाख हेक्टेयर पर ही बुआई हो पाई है। यह स्थिति सुखद नहीं है।' अधिकारियों के मुताबिक आंध्र प्रदेश में केवल 2 लाख हेक्टेयर पर ही बुआई की गई है जो कि इस दौरान होने वाली बुआई से 30 फीसदी कम है।
 
उत्तर भारत के राज्यों में खरीफ की बुआई पर असर 
 
उत्तर भारत के राज्यों में मॉनसून आने में देरी की वजह से बुआई प्रभावित हो रही है। औसत आधार पर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर में धान, दलहन और तिलहन की बुआई कम रही है। उत्तर भारत के कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में उत्पन्न होता है जिसमें नकदी और खाद्यान्न फसल दोनों शामिल हैं। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर में धान की बुआई में पिछले वर्ष के मुकाबले 50 फीसदी से भी अधिक की कमी आई है। प्रमुख दलहन फसलों की बात करें तो उत्तर प्रदेश और राजस्थान को छोड़कर सभी राज्यों ने पिछले खरीफ मौसम के मुकाबले कम बुआई दर्ज की है। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में प्रमुख दलहन फसलों की बुआई में 50 फीसदी से भी अधिक की कमी आई है। 
 
(साथ में मुंबई, लखनऊ, बेंगलूरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता से संवाददाता)
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, मॉनसून, दलहन, तिलहन, कपास, धान,
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