बिजनेस स्टैंडर्ड - अर्थव्यवस्था-वित्त मंत्रालय के बारे में बताती जेटली की फेसबुक पोस्ट
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, July 21, 2018 09:28 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

अर्थव्यवस्था-वित्त मंत्रालय के बारे में बताती जेटली की फेसबुक पोस्ट

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  06 27, 2018

गत सप्ताह कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली ने सोशल मीडिया पर दो अहम घोषणाएं कीं जो तुरंत ही बहुत बड़ी खबर बन गईं। ये उन लोगों के लिए बहुत ही आश्वस्त करने वाली थीं जो देश की वृहद आर्थिक स्थिति और पेशेवर अर्थशास्त्रियों के साथ सरकार के व्यवहार को लेकर चिंतित रहते हैं। ध्यान देने वालों ने पाया होगा कि उन फेसबुक पोस्ट से वित्त मंत्रालय के हालात के बारे में भी काफी कुछ संकेत मिलता है। जेटली का पहला वक्तव्य अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद चुनौतियों के बारे में था।

ध्यान रहे कि तकनीकी तौर पर जेटली वित्त मंत्रालय के प्रभारी नहीं हैं क्योंकि वह शल्य चिकित्सा के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और वित्त मंत्रालय का काम अस्थायी रूप से रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल देख रहे हैं। परंतु उनका वक्तव्य दिखाता है कि एक बड़ी शल्य चिकित्सा से उबरने के बाद भी उनका सोच एकदम वित्त मंत्री वाला है और वह इस बात पर केंद्रित हैं कि सरकार को ऐसे समय में क्या करना चाहिए जब वैश्विक माहौल प्रतिकूल हो और सरकार के चार साल के किए कराए पर पानी फिरने की आशंका हो।

व्यापक तौर पर उनका संदेश राजकोषीय विवेक का इस्तेमाल करने और कर अनुपालन बढ़ाने का जिक्र करता है ताकि बिना राजकोषीय घाटा बढ़ाए विकास कार्यों के लिए धन मुहैया कराया जा सके। परंतु उनका यह संकेत भी उतना ही अहम है कि पेट्रोल और डीजल पर बढ़ाए गए उत्पाद शुल्क में कोई कमी नहीं की जाएगी। यह शुल्क बढ़ोतरी उस वक्त की गई थी जब तेल कीमतें एकदम निचले स्तर पर थीं। कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सरकार पर पेट्रोल और डीजल का उत्पाद शुल्क कम करने का भारी दबाव पड़ा था क्योंकि उनकी खुदरा कीमतें बहुत बढ़ गई थीं। अब तक सरकार वह दबाव झेलने में कामयाब रही है।

फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है और तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने उत्पादन थोड़ा बढ़ाने का निर्णय लिया है। माना जा सकता है कि इससे सरकार का तेल क्षेत्र से जुड़ा जोखिम कुछ कम होगा। अगर कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहती है तो सरकार तेल के मोर्चे पर चिंतित नहीं रहेगी। अन्य चिंताएं अभी भी बरकरार रहेंगी और जेटली का पहला वक्तव्य उनके बारे में एकदम सटीक है। निश्चित तौर पर सकल घरेलू उत्पाद में समग्र करों की हिस्सेदारी वर्ष 2014-15 के 10 फीसदी से बढ़कर 2017-18 में 11.6 फीसदी हो गई है लेकिन तथ्य यह है कि इस 1.6 फीसदी की वृद्धि का बड़ा हिस्सा पेट्रोल और डीजल पर बढ़े हुए करों की वजह से हासिल हुआ है।

अगर तेल से आए करों को हटा दिया जाए तो जीडीपी में गैर तेल कर की हिस्स्ेदारी 8.77 फीसदी से बढ़कर केवल 9.68 फीसदी तक ही पहुंच सकी है। इसके विपरीत राज्यों की बात करें तो उन्हें कच्चे तेल की कम कीमतों का कोई खास लाभ नहीं हो सका है। जीडीपी में तेल उत्पादों पर उनकी कर हिस्सेदारी वर्ष 2014-15 के 1.29 फीसदी से घटकर 2018-19 में 1.24 फीसदी रह गई। कुछ हद तक ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनका कर यथामूल्य था। परंतु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि केंद्र ने तेल क्षेत्र का इस्तेमाल अपने कर-जीडीपी अनुपात में सुधार के लिए किया है जबकि राज्यों ने यह अवसर गंवा दिया।

इस संदर्भ में जेटली इस जरूरत को रेखांकित करते हैं कि केंद्र को कर-जीडीपी अनुपात में अगले कुछ वर्ष के दौरान 1.5 प्रतिशत अंकों का और सुधार करना होगा। यह मोदी सरकार की राजकोषीय नीति का रुख दर्शाता है। अहम बात यह है कि जेटली कहते हैं जीडीपी में तेल कर की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे में 1.5 फीसदी की पूरी वृद्घि अन्य क्षेत्रों से ही हासिल करनी होगी। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि तेल करों में आगे और इजाफा नहीं होगा। चालू वर्ष में पहले ही जीडीपी में केंद्रीय करों की हिस्सेदारी 12.1 फीसदी तक होने वाली है जो पिछले वर्ष से 0.5 फीसदी अधिक है।

अब यह तय करने का काम अगली सरकार का होगा कि कर संग्रह में प्रस्तावित वृद्घि का हिस्सा अनुपालन और कवरेज बढ़ाने से आएगा या कर दरों में बदलाव से।  जेटली की दूसरी पोस्ट में मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे का जिक्र है। किसी कैबिनेट मंत्री द्वारा बीते चार सालों के दौरान आर्थिक नीति निर्माण में सुब्रमण्यन के अनेक योगदानों का उत्साहपूर्वक जिक्र करना एक अस्वाभाविक घटना है। कुछ लोग इसकी व्याख्या आपनी स्नेह और भरोसे के रिश्ते के रूप में भी कर रहे हैं।

ऐसे भी लोग हैं जो यह मानते हैं कि जेटली ऐसा करके मोदी सरकार की उस प्रतिष्ठïा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं जो दो साल में तीन अर्थशास्त्रियों के सरकार का साथ छोडऩे के कारण दांव पर लग गई है। क्या जेटली की पोस्ट पेशेवर अर्थशास्त्रियों को यह आश्वस्त कर रही है कि सरकार अपने साथ काम करने वाले अर्थशास्त्रियों के अच्छे काम और योगदान की सराहना करने में पीछे नहीं हटती।  बहरहाल, पर्यवेक्षक वित्त मंत्रालय में बनी एक विशिष्टï स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हैं जहां एक मुख्य आर्थिक सलाहकार, जेटली के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में अपना इस्तीफा दे देता है और जेटली उसकी विदाई की घोषणा सोशल मीडिया पोस्ट पर करते हैं। अतीत में कभी वित्त मंत्रालय में ऐसी स्थिति नहीं बनी थी जहां वरिष्ठï नौकरशाहों को भी दो कैबिनेट मंत्रियों से संवाद रखना पड़ता था। उनमें से कई यह उम्मीद कर रहे होंगे कि स्थितियां जल्दी स्पष्टï हों। 

Keyword: arun jaitley, कैबिनेट मंत्री, अरुण जेटली, सोशल मीडिया,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या ट्रांसपोर्टरों का हड़ताल पर जाना है वाजिब?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.