बिजनेस स्टैंडर्ड - थोड़ी घबराहट, थोड़ी स्थिरता के बीच नजर आ रहा बाजार
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थोड़ी घबराहट, थोड़ी स्थिरता के बीच नजर आ रहा बाजार

बाजार संकेतक
देवांग्शु दत्ता /  06 26, 2018

भारत और चीन द्वारा अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाए जाने के साथ ही वैश्विक व्यापार युद्घ में तेजी आ गई है। रूस भी ऐसे ही कदम उठाने की धमकी दे रहा है और यूरोपीय संघ तथा कनाडा भी इस पर विचार कर रहे हैं। यह कुछ हद तक जैसे को तैसा की नीति है जिसने वर्ष 1929-37 के दौरान दुनिया को महामंदी में धकेल दिया था। इसका नुकसान हर देश को होगा और विश्व व्यापार का आकार बहुत घट जाएगा।  गत वर्ष भारत और अमेरिका का व्यापार करीब 126 अरब डॉलर का था। भारत ने 29 किस्म के अमेरिकी निर्यात पर शुल्क बढ़ाया है। नए शुल्क से करीब 24 करोड़ डॉलर का इजाफा होगा जो अमेरिका द्वारा हाल के दिनों में भारतीय निर्यात पर लगाए गए उच्च शुल्क की भरपाई करने का काम करेगा। 

ऐसे ही एक अन्य वैश्विक घटनाक्रम में वियना में ओपेक देशों की बैठक उत्पादन बढ़ाने की प्रतिबद्घता के साथ समाप्त हुई। परंतु अभी यह स्पष्टï नहीं है कि ओपेक इसमें कितना इजाफा कर सकता है। वेनेुजुएला और लीबिया में अस्थिरता और ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों को देखते हुए इसमें संशय है।  बहरहाल, विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी अस्थिरता के बाद अब थोड़ा ठहराव आया है। एक आकलन से पता चलता है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल एक डॉलर का बदलाव आता है तो देश के चालू खाते के घाटे में एक अरब डॉलर का बदलाव आ जाता है। अगर कीमतें कम होती हैं तो यह बात भारत के लिए फायदे का सौदा होगी। 
 
केंद्रीय बैंक की नीति से जुड़ी तीन अहम बातें बीते पखवाड़े सामने आईं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दरों में इजाफा किया। फेडरल रिजर्व अपने संकुचन कार्यक्रम को जारी रखते हुए उस बॉन्ड पोर्टफोलियो को कम करेगा जो क्वांटिटेटिव ईजिंग के दिनों में बढ़ गया था। यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने अपनी नकारात्मक नीतिगत दर बरकरार रखी, परंतु वह भी दिसंबर तक अपनी मौजूदा क्वांटिटेटिव ईजिंग को सीमित कर देगा। बैंक ऑफ जापान ने नकारात्मक ब्याज दरों को भी सीमित रखा और क्वांटिटेटिव ईजिंग भी जारी रखी। कुल मिलाकर सस्ती नकदी की आपूर्ति कम होगी और यह आगे चलकर महंगी होती जाएगी।
 
नकदी की कमी की इस संभावना के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उभरते बाजारों से दूर हो रहे हैं। उनकी बिकवाली भारत समेत हर बड़े बाजार में देखने को मिली है। यह रुपये के दबाव में आने की एक बड़ी वजह है। इसकी वजह से भारतीय बॉन्ड बाजार में भी प्रतिफल बढ़ा है।  कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मुद्रास्फीति कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं मॉनसून में देरी होने से खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं। मॉनसून में देर होती नजर आ रही है। पहले तीन सप्ताह में बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून बहुत जल्दी गति पकड़ लेगा। सरकार आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी को एलआईसी को बेचना चाहती है और उसने बीमा नियामक से जरूरी मंजूरी के लिए संपर्क किया है। इस प्रस्ताव पर नियामक प्राधिकरण के बोर्ड में चर्चा अगले सप्ताह होगी। एलआईसी का बोर्ड पहले ही इसे स्वीकृत कर चुका है। 
 
यह विचार खामियों से भरा हुआ है। एलआईसी सरकारी संस्थान है और उसके राजस्व का बड़ा हिस्सा बीमा पॉलिसी के प्रीमियम से आता है। यानी इसमें सीधे जनता की नकदी इस्तेमाल की जाएगी। अन्य बीमा कंपनियों की तरह एलआईसी को भी जोखिम से बचना चाहिए। बीमा कंपनियों को किसी भी एक कंपनी में 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रखनी चाहिए। हालांकि बीमा नियामक एलआईसी को फिलहाल इसकी इजाजत दे सकता है और कह सकता है कि वह धीरे-धीरे हिस्सेदारी कम करे। आईडीबीआई बैंक में एलआईसी की हिस्सेदारी 10.82 प्रतिशत है। सरकार के पास बैंक के 80.96 फीसदी शेयर हैं और वह इसमें से 40 प्रतिशत बेचना चाहती है। इसके लिए एलआईसी को 100 अरब रुपये व्यय करने पड़ सकते हैं। यह अनुमान 250 अरब के बाजार मूल्यांकन पर आधारित है। आईडीबीआई सबसे खस्ता सरकारी बैंकों में से एक है। उसका फंसा हुआ कर्ज 556 अरब रुपये है जो कुल अग्रिम का 28 फीसदी है। 
 
इस प्रक्रिया को विनिवेश कहना सही नहीं होगा। इसमें सरकारी पैसा लगेगा और नियंत्रण भी सरकार के पास ही रहेगा। इस बीच आईसीआईसीआई बैंक ने संदीप बख्शी को सीईओ के रूप में नियुक्त किया है जबकि चंदा कोछड़ को वीडियोकॉन मामले की जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेज दिया गया है। यह इस बात का पहला संकेत है कि आईसीआईसीआई बैंक हितों में टकराव के मामले को गंभीरता से ले रहा है।  वास्तविक विनिवेश के क्षेत्र से भी कुछ अच्छी खबर आ रही है। राइट्स का आईपीओ काफी सफल रहा। उसके लिए प्रति शेयर 180 से 185 रुपये प्रति शेयर का दायरा तय किया गया था। खुदरा शेयरधारकों और कर्मचारियों को प्रति शेयर 6 रुपये की रियायत दी गई थी। सरकार 12.6 फीसदी शेयर बेचकर 4.6 अरब रुपये की राशि जुटा सकती है। इस आईपीओ 67 गुना ज्यादा अभिदान मिला।  थोड़ी घबराहट के अलावा बाजार का रुझान गत सप्ताह कमोबेश स्थिर रहा। खुदरा निवेशक शेयरों की सीधी बिक्री कर रहे हैं लेकिन वे म्युचुअल फंड के जरिये निरंतर निवेश भी कर रहे हैं। अन्य घरेलू संस्थागत निवेशक भी एफपीआई की बिकवाली के प्रत्युत्तर में जमकर खरीद कर रहे हैं। तकनीकी तौर पर स्थिति का आकलन करना बहुत मुश्किल है। प्रमुख बाजार सूचकांक एक तय दायरे में बंधे हुए हैं। इस बीच मिडकैप और स्मॉल कैप शेयरों में काफी कमी आई है। निफ्टी 10,400 से 10,900 के बीच काम कर रही है और हमें तब तक प्रतीक्षा करनी होगी जब तक कि कोई निर्णायक पहलकदमी नहीं होती। 
Keyword: india, china, trade, भारत, चीन, अमेरिका,,
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