बिजनेस स्टैंडर्ड - उतार पर वैश्विक फंडों का भारतीय खुमार
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उतार पर वैश्विक फंडों का भारतीय खुमार

जश कृपलानी और समी मोडक /  June 26, 2018

इस समय भारत पर विदेशी निवेशकों का दांव आम राय से 100 आधार अंक कम
2015 के मुकाबले यह घटा 800 आधार अंक
वैश्विक फंडों का भारत के प्रति आकर्षण 2013 के बाद सबसे निचले स्तर पर

बिजनेस स्टैंडर्ड उतार पर वैश्विक फंडों का भारतीय खुमारवे दिन हवा हुए, जब विदेशी निवेशकों के लिए भारत दुलारा था। उस समय भारत को अपने हिस्से से ज्यादा विदेशी निवेश मिलता था। वैश्विक फंडों की भारत के प्रति चाहत वर्ष 2013 के बाद अब सबसे निचले स्तर पर है। इसकी वजह कच्चे तेल के बढ़ते दाम और रुपये की कमजोरी है, जिससे आर्थिक संकेतक अचानक गड़बड़ाने लगे हैं।  इस समय एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट सूचकांक में भारत पर विदेशी फंडों के दांव यानी ओवरवेट पर आमराय महज 100 आधार अंक ज्यादा है। यह वर्ष 2015 से 800 आधार अंक कम है।

सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने इमर्जिंग मार्केट सूचकांक में भारत को जो वेटेज दे रखा है, वह 8.5 प्रतिशत है। जबकि आम राय से भारत का वेटेज सिर्फ 9.5 फीसदी है। जाहिर है, यह महज एक प्रतिशत ज्यादा है। इस सूचकांक को जेहन में रखकर ही विदेशी निवेशक दांव लगाते हैं। उनके पास 15 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियां हैं। विदेशी ब्रोकरेज के उपलब्ध कराए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 तक भारत विदेशी निवेशकों की आंख का तारा था और तब आम राय से वेटेज सबसे अधिक 16 प्रतिशत था।

इसका मतलब यह है कि उभरते बाजारों में निवेश किए जा रहे हर 100 डॉलर में से 16 डॉलर भारत को मिले, जो अब गिरकर 9.5 डॉलर रह गया है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) एमएससीआई के दिए गए वेटेज का अनुसरण करते हैं, जबकि सक्रिय फंड अपने विवेक का इस्तेमाल करते हैं। मॉर्गन स्टैनली के इक्विटी रणनीतिकार जोनाथन गार्नर ने कहा कि तीन वर्ष पहले निवेशक जरूरत से ज्यादा ओवरवेट पोजिशन ले रहे थे, लेकिन अब वे अपना निवेश घटा रहे हैं।

मॉर्गन स्टैनली ने हाल में भारत पर अपनी ओवरवेट स्थिति 50 आधार अंक घटाई है। उन्होंने कहा कि भारत को लेकर हम अब भी ओवरवेट हैं, लेकिन पहले से कम। हम तेल के प्रति भारत की संवेदनशीलता पर नजर रखे हुए हैं। हमारे निवेश वाले देशों में तेल और जीडीपी के ज्यादा अनुपात के लिहाज से भारत तीसरे नंबर पर है। भारत के प्रति ओवरवेट में कमी ऐसे समय में आई है, जब विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।

इस साल अभी तक अमेरिकी ईटीएफ फंडों ने करीब 4 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। इसलिए अब जब भी ये फंड नया निवेश करेंगे तो भारत को पिछली बार की तुलना में कम निवेश मिलेगा। इसका असर प्रदर्शन पर पड़ेगा। इस साल रुपये में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट हुई है। गिरते रुपये से विदेशी निवेशकों का डॉलर में रिटर्न भी प्रभावित होता है। 

 

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