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प्रतिभाशाली युवाओं पर कांग्रेस का नया दांव

अर्चिस मोहन /  06 25, 2018

पिछले कुछ हफ्तों से लुटियन दिल्ली के एक कॉन्फ्रेंस हॉल में 35 युवक-युवतियां कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेताओं को सुन रहे हैं। ये युवक-युवतियां कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित एक महीने की अवधि वाले फेलोशिप प्रोग्राम का हिस्सा हैं। देश के विभिन्न इलाके और अलग-अलग आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले इन सब लोगों की उम्र 30 साल से कम ही है। लेकिन इनमें कुछ ऐसी समानता है जो भारतीय राजनीति में मिलना बेहद असामान्य है। सामाजिक कार्यों और नीति निर्माण में उनकी दिलचस्पी की वजह से इन सभी युवाओं का चयन फेलोशिप के लिए किया गया है। लेकिन विडंबना की बात यह है कि कांग्रेस जैसी पार्टी में इन युवक-युवतियों के आवेदन को अन्य लोगों के मुकाबले इसलिए तरजीह दी गई क्योंकि इनका संबंध ऐसे परिवारों से है जिनका कोई भी करीबी रिश्तेदार राजनीति में सक्रिय नहीं है। 

 कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई नैशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने इस फेलोशिप की पहल की जिसका नेतृत्व रुचि गुप्ता कर रही हैं। वहीं इस पहल को पार्टी के शोध विभाग के प्रमुख और राज्यसभा सदस्य राजीव गौड़ा का समर्थन भी मिला। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि इस फेलोशिप की सफलता से कांग्रेस पार्टी में प्रतिभाशाली युवाओं को लाने की ऐसी कवायद बार-बार दोहराई जा सकती है। इस फेलोशिप प्रोग्राम का इस्तेमाल पार्टी की अन्य टीमों के लिए एक नमूने के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा जिनमें शोध विभाग, रणदीप सुरजेवाला के नेतृत्व वाले संचार विभाग, प्रवीण चक्रवर्ती के नेतृत्व वाला डेटा एनालिटिक्स विभाग जैसे अन्य विभाग शामिल हैं।  एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रमुख अमित शाह पन्ना प्रमुखों को प्रेरित कर 2019 में जीत सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने प्रत्येक राज्य में गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं की तकरीबन 100 सदस्यों एक कोर टीम बनाने का फैसला किया है जो कांग्रेस पार्टी की विचारधारा पर भरोसा करते हैं। दोनों का ही लक्ष्य 2019 में पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं तक पहुंच बनाने का है। 
 
अब तक पी चिदंबरम, जयराम रमेश, शशि थरूर, सलमान खुर्शीद और अन्य नेताओं ने फेलोशिप वाले इस समूह को संबोधित किया है। एनएसयूआई ने इस फेलोशिप के बारे में सोशल मीडिया और देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में सूचना दी थी। चयन टीम के एक सदस्य ने बताया कि छोटे शहरों के लोगों को जानबूझ कर चुना गया। इस समूह को रुचि गुप्ता, प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी, कर्नाटक सोशल मीडिया प्रमुख श्रीवत्स और वकील मोहम्मद खान ने भी संबोधित किया जो ऐसे ही गैर-राजनीतिक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। 
 
गुप्ता के मुताबिक पार्टी का लक्ष्य प्रतिभाशाली छात्रों को अपने साथ जोडऩे और एनएसयूआई को राजनीति में प्रवेश का माध्यम बनाने, किसी व्यक्ति के बजाय मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा कराना है। इसके अलावा यह विचारों और विचारधारा के लिए एक मंच के तौर पर कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक और समकालीन भूमिका को रेखांकित करेगी। गुप्ता कहती हैं, 'युवाओं को राजनीति में नीति को समझने की सीख देना, विभिन्न नीतियों की अंतनिर्हीत वैश्विक नजरिये की तारीफ करना और यह बताना भी बेहद जरूरी है कि चुनावी राजनीति ही एकमात्र राजनीति नहीं होती।' इस फेलोशिप के कई प्रतिभागियों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भाजपा के लिए वोट दिया था लेकिन वह बेहद भ्रमित थे।
 
मुंबई के एक 25 वर्षीय वकील अनीश जाधव कहते हैं, 'मैं सामाजिक रूप से उदार व्यक्ति हूं। मेरा किसी भी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि मुझे एक ऐसे पक्ष को चुनने की जरूरत है जो देश की प्रगति में योगदान देता है और ऐसे मुद्दों पर जोर नहीं देता जो हमें पीछे ले जा सकता है।' हाल तक जाधव महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए काम कर रहे थे। दिल्ली के एक कॉलेज में स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा अवंतिका मोहन का कहना है, 'देश जिन समस्याओं का सामना कर रहा है उनमें वंशवादी राजनीति सिर्फ एक समस्या है। मुझे ऐसा लगता है कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुकाबले यह समस्या बेहद छोटी है।' 
 
25 वर्षीय विजेता वीरप्पा सालियान ऐसे प्रतिभागी हैं जिनकी तलाश एनएसयूआई के फेलोशिप के लिए थी। सालियान ने अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान अपनी पढ़ाई छोड़ दी। मंगलूरु में कन्नड़ माध्यम में पढ़ाई करने वाले सालियान कहते हैं, 'अन्ना हजारे के प्रयोग और 2014 में भाजपा की जीत के संदेशों से मुझे यह महसूस हुआ कि संप्रग की पहली और दूसरी पारी की सरकार के कार्यकाल के दौरान जिस तरह के कानून पारित किए गए, उस लिहाज से वह सरकार देश के लिए काम कर रही थी।'
 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस प्रयोग का परीक्षण राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में होगा। गुप्ता और अन्य लोगों का भी कहना है कि यह प्रयोग सफल हो या असफल राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी लंबी पारी की तैयारी में जुटी है ताकि कांग्रेस पार्टी में प्रतिभाशाली नेता शामिल हो सकें जिनका नेतृत्व कभी महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरू ने किया था।
Keyword: congress, youth, education,,
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