बिजनेस स्टैंडर्ड - विशेष पुनरुद्धार पैकेज की उम्मीद
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विशेष पुनरुद्धार पैकेज की उम्मीद

टीई नरसिम्हन / चेन्नई 06 25, 2018

केरल में संकटग्रस्त काजू प्रसंस्करण उद्योग राज्य सरकार से विशेष पुनरुद्धार पैकेज की उम्मीद कर रहा है। फिलहाल यह उद्योग अधिक मजदूरी और श्रमिक संघों के मसलों की वजह से फंसे कर्ज (एनपीए) के बढ़ते बोझ तले अंतिम सांसे ले रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री इस पैकेज की घोषणा से पहले बैंकों और श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। उद्योग पहले ही इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर चुका है।  उद्योग ने राज्य से वेतन संरचना में बदलाव और इसके साथ कार्य-निष्पादन की शर्तें जोडऩे की सिफारिश की है। कुछ बैंकों ने उद्योग को फिर से ऋण देना शुरू कर दिया है। इससे कुछ कारखानों को काम शुरू करने में मदद मिली है। श्रमिकों की अनिश्चित हड़ताल के बाद काम बंद कर दिया गया था।

केरल स्थित काजू प्रसंस्करणकर्ता एवं निर्यातक संघ के सचिव आई निजामुद्दीन ने कहा कि मुख्यमंत्री से श्रमिक संघों के नेताओं और बैंकों के साथ मुलाकात करने की उम्मीद है। हम इन बैठकों से कुछ सकारात्मक निर्णय निकलकर आने की उम्मीद कर रहे हैं और उद्योग पहले की तरह फिर से उत्पादन शुरू कर सकेगा। राज्य में 865 से अधिक कारखानों में से लगभग 90 प्रतिशत बंद हो गए थे और कुल 3,00,000 श्रमिकों में से 2,50,000 बेरोजगार हो गए थे, क्योंकि ऊंचे वेतन और बढ़ते एनपीए ने इन इकाइयों के परिचालन को प्रभावित किया था। दस साल पहले ये इकाइयां देश के तकरीबन 85 प्रतिशत काजू का प्रसंस्करण किया करती थीं। निजामुद्दीन ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान इन बंद इकाइयों में से करीब पांच प्रतिशत फिर से शुरू हो चुकी हैं।
 
राज्य सरकार ने कहा है कि विभिन्न बैंकों के साथ बातचीत के जरिये हाल ही में उसने 170 से अधिक निजी कंपनियों की फिर से काम शुरू करने में मदद की है और सरकार निजी क्षेत्र के प्रसंस्करणकर्ताओं के वित्त पोषण के लिए बैंकों और वित्तीय एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कर रही है। राज्य की मत्स्य पालन, बंदरगाह अभियांत्रिकी और काजू उद्योग मंत्री जे मर्सीकुट्टïी अम्मा ने विधानसभा में कहा कि अब तक 176 निजी कारखानों के लिए पुनरुद्धार पैकेज प्रस्तुत किया जा चुका है और बैंक ऋणों का पुनर्गठन करते हुए कारखानों को फिर से खोलने और श्रमिकों का रोजगार सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने 31 मई, 2018 तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की है।
 
सरकार सीधे अफ्रीकी देशों से कच्चे काजू का आयात करने के लिए भी कदम उठा रही है और राज्य में इकाइयों के लिए पर्याप्त कच्चे काजू प्राप्त करने केविकल्प तलाशने केलिए एक काजू बोर्ड का भी गठन किया गया है। भारतीय काजू निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसीआई) के चेयरमैन आरके भूदेस ने कहा कि अन्य राज्यों के मुकाबले केरल में काजू उत्पादन की लागत काफी ज्यादा है, क्योंकि कुछ साल पहले राज्य द्वारा वेतन में बहुत अधिक वृद्धि की गई थी। जहां अन्य राज्यों में यह वेतन तकरीबन 1,000-1,800 रुपये प्रति बोरी (80 किलोग्राम) है, वहीं केरल में यह 3,400 रुपये प्रति बोरी है। इसके अलावा अन्य राज्यों में उद्योग मशीनीकरण और स्वचालित प्रक्रिया द्वारा उत्पादकता में सुधार करने में सक्षम रहा है, जिसके लिए कुछ निवेश की आवश्यकता होती है।

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