बिजनेस स्टैंडर्ड - 'जीएसटी दरों को छेडऩे से पहले सहज स्थिति में पहुंचना जरूरी'
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'जीएसटी दरों को छेडऩे से पहले सहज स्थिति में पहुंचना जरूरी'

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना /  06 24, 2018

वित्त सचिव हसमुख अढिया ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के क्षेत्र अधिकारियों को जीएसटी संग्रहण बढ़ाने को कहा है। हालांकि बोर्ड की चेयरपर्सन वनजा सरना ने अपने अधिकारियों के कामकाजी प्रदर्शन का बचाव किया है। सरना ने दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना को बताया कि वह अढिया को आंकड़ों और तथ्यों के साथ जवाब देंगी। बातचीत के अंश :

 
क्या आपको ऐसा लगता है कि जीएसटी संग्रह घट रहा है? यह अप्रैल में 1,000 अरब रुपये और मई में 940 अरब रुपये रहा है। वित्त सचिव हसमुख अढिया ने क्षेत्र अधिकारियों को राजस्व बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है। 
 
यह घट नहीं रहा है। यह रुझान केवल कुछ शुरुआती महीनों में दिखा था। जब हमने जीएसटी लागू किया था, तब यह 900 अरब रुपये से अधिक था। उसके बाद यह घटकर 830 अरब रुपये पर आ गया। उसके बाद बढ़कर 880 से 890 अरब रुपये पर पहुंच गया। मार्च का महीना सबसे हटकर होता है, जिसमें आम तौर पर कर संग्रह में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। इसलिए इस साल अप्रैल में मार्च का कर संग्रह 1,000 अरब रुपये के स्तर को पार कर गया। लेकिन अगर आप उससे अगले महीने के राजस्व को देखते हैं तो आप पाएंगे कि अब हम 940 अरब रुपये के आंकड़े पर पहुंच गए हैं। यह अच्छी वृद्धि को दर्शाता है। मेरा मानना है कि हमने अच्छा प्रदर्शन किया है, इसलिए हम राजस्व संग्रह और पंजीकरण से संबंधित मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए वित्त सचिव को आंकड़े मुहैया कराएंगे। वित्त सचिव हर किसी को यह कह रहे हैं कि भले ही आप अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और जीएसटी में स्थायित्व आ रहा है, लेकिन राजस्व को बढ़ाने की कोशिश कीजिए। 
 
उद्योग दरों को घटाने का दबाव बना रहा है। क्या इस पर जीएसटी परिषद अगली बैठक में विचार करेगी। 
 
बहुत औद्योगिक क्षेत्र दर में कटौती की मांग कर रहे हैं। इस पर बहुत सोच-समझकर विचार किए जाने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि हम इस समय हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं, जब जीएसटी में ठहराव आ गया है। दरों से कोई छेड़छाड़ करने से पहले हमें राजस्व के लिहाज से सहज स्थितिमें पहुंचने की जरूरत है। आखिर परिषद को ही दर में किसी फेरबदल के बारे में फैसला लेना होगा। 
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि आने वाले समय में केवल एक ही स्लैब होगा। ऐसा कितनी जल्द होने की संभावना है? 
 
इन मुद्दों पर भविष्य में विचार किया जाएगा। जीएसटी में दरों को तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है। लेकिन इसमें समय विशेष बहुत महत्त्वपूर्ण है। क्या आप अभी ऐसा करना चाहते हैं या तीन और महीने इंतजार करते हैं और यह देखते हैं कि राजस्व की क्या स्थिति है। हर साल मार्च में राजस्व बढ़ता है, लेकिन यह मई में 940 अरब रुपये रहना बहुत अच्छा है। हम दरों को तर्कसंगत बनाने का फैसला लेने में एक या दो महीने इंतजार करना पसंद करेंगे। 
 
क्या आपने जीएसटी रिटर्न को आसान बनाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है? 
 
इस प्रक्रिया का खाका तैयार किया है और इसे परिषद के सामने पेश किया है। एक मंत्री समूह इसके बारे में विचार कर रहा है। जब इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा, तब हम देखेंगे कि रिटर्न भरना कैसा रहेगा। स्वाभाविक है कि इसमें कुछ समय लगेगा क्योंकि इसे वर्तमान सिस्टम के स्थान पर लागू करना होगा। हमें सॉफ्टवेयर बनाना होगा। इस काम के लिए जीएसटीएन को कम से कम 4 महीनों की जरूरत होगी। यह सही है कि आसान रिटर्न अच्छी चीज होगी। हालांकि कारोबारी जगत जीएसटीआर 1 और 3बी रिटर्न भरने में सहज हो गया है। इसलिए अगर वर्तमान प्रणाली कुछ और महीनों जारी रहती है तो इससे कोई दिक्कत नहीं आएगी। जब हम रिटर्न प्रक्रिया के अंतिम रूप को सामने रखेंगे तो यह ज्यादा आसान होना जरूरी है। इसी दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। 
 
जीएसटीएन को एक सरकारी संस्था में तब्दील किया जा रहा है। यह बदलाव कैसे होगा? क्या इससे जीएसटीएन की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी?  
 
मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा। जीएसटीएन बहुत सारे आंकड़ों की संरक्षक है और इसके यूजर मुख्य रूप से सरकारी विभाग हैं। मुझे नहीं लगता कि इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया जाना चाहिए कि यह भविष्य में कैसे काम करेगी। यह विशेष तरीके से काम कर रही है और आगे भी ऐसे ही करती रहेगी। इसकी टीम वही रहेगी और मुझे पूरा भरोसा है कि यह बदलाव बेहतरी के लिए होगा। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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