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प्राधिकरण ने मुनाफाखोरी-रोधी पर पूछे सवाल

दिलाशा सेठ और अर्णव दत्ता / नई दिल्ली 06 24, 2018

राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण (एनएए) ने हाल में कई प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों को यह जानने के लिए बुलाया कि उसने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का लाभ वास्तविक उपभोक्ताओं को दिया या नहीं।  एनएए ने दर्जन भर कंपनियों के साथ दिल्ली कार्यालय में बैठक की। इससे इस पर चर्चा हुई कि उन्होंने जीएसटी के बाद घटी दर का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया या नहीं और पहुंचाया तो उसका कितना लाभ दिया। उद्योग के अन्य भागीदारों के साथ भी इस बारे में बैठक करने की योजना है।
 
प्राधिकरण ने इन कंपनियों से अपने दावे के समर्थन में अतिरिक्त डेटा मुहैया कराने को कहा है। सरकार के अधिकारी ने कहा, 'हम कंपनियों के साथ इस बात पर अनौपचारिक चर्चा कर रहे हैं कि उन्होंने जीएसटी का लाभ किस तरह से ग्राहकों को दिया है।' अगर प्राधिकरण कंपनी के गणित से पूरी तरह संतुष्टï नहीं होती है, तो वह जीएसटी आयुक्त को मुनाफाखोरी-रोधी शिकायत दर्ज करने के लिए कह सकता है। हालांकि उद्योग मुनाफाखोरी दिशानिर्देशों में स्पष्टïता की कमी को लेकर चिंतित है। सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण से मुलाकात करने वाले अधिकांश एफएमसीजी दिग्गज ग्राहकों को दिए गए लाभ को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। पुराने मूल्य निर्धारण फॉर्मूले के कारण काफी भंडार बचा हुआ है जो एफएमसीजी कंपनियों के लिए ग्राहकों को कर छूट का लाभ देने में बड़ी बाधा बन रही है। इसके साथ ही कितना लाभ दिया जाना है, उसकी गणना का कोई स्पष्टï फॉर्मूला नहीं होना भी परेशानी का सबब है।
 
जीएसटी प्रणाली के तहत जीएसटी लाभों में दरों में कटौती और इनपुट कर क्रेडिट शामिल हैं। जीएसटी परिषद ने 10 नवंबर की बैठक में 200 से ज्यादा चीजों की दरों में कटौती की थी। यह कटौती 15 नवंबर से प्रभावी है। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एम एस मणि ने कहा, 'प्राधिकरण द्वारा परामर्शक दृष्टिïकोण अपनाया गया है जो कारोबार के लिए अच्छा संकेत है।' उन्होंने कहा कि कई मामलों में व्यापारिक साझेदारों के पास जीएसटी में बदलाव के दौरान जमा भंडार के कारण भी मुनाफाखोरी-रोधी के दृष्टिïकोण से उनका मूल्यांकन करना कठिन है।
 
पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'इन बैठकों से औपचारिक जांच के साथ ही उद्योग को इस संबंध में पर्याप्त दस्तावेज जुटाने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि इससे प्राधिकरण भी उद्योग की समस्याओं और चिंता को समझ सकेगा क्योंकि सरकार की ओर से मुनाफाखोरी-रोधी अनुपालन के लिए कोई प्रणाली जारी नहीं की गई है। जैन ने कहा कि इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर अगले कुछ दिनों में एफएमसीजी क्षेत्र से इतर भी प्राधिकरण की बैठक हो। आईटीसी के प्रवक्ता ने कहा, 'हमने ग्राहकों को जीएसटी का लाभ पहुंचाया है और इस बारे में प्राधिकरण को भी बता दिया गया है।' एचयूएल समय के अभाव के कारण ग्राहकों को कर छूट का लाभ नहीं पहुंचा पाई। लेकिन उसने गणना के आधार पर स्वेच्छा से सरकार को 1.60 अरब रुपये देने की पेशकश की थी। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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