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जीएसटी से बिगड़े कपड़ा और हीरा उद्यमियों के हाल

विनय उमरजी / सूरत 06 24, 2018

आशीष सुखरावाला 40 साल की उम्र में बीमा एजेंट की नौकरी के तौर-तरीके सीख रहे हैं। हाल तक वह दूसरी पीढ़ी के बुनकर थे, जिनके सूरत के औद्योगिक क्षेत्र में 100 पावरलूम थे। लेकिन नई वस्तु एïवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के तहत कर के भारी बोझ की वजह से कारोबार में नुकसान के चलते सुखरावाला को अपने लूम कबाड़ के रूप में बेचने और अपने परिसर प्लास्टिक कारोबारी को किराये पर देने के लिए मजबूर होना पड़ा।  सूरत के कपड़ा और हीरा उद्योग में बहुत से उद्यमियों की हालत सुखरावाला जैसी ही है। जीएसटी लागू होने के बाद पिछले एक साल में इस शहर के बहुत से पावरलूम मालिकों ने अपना काम-धंधा बंद कर दिया है। बहुत से कपड़ा और हीरा कारोबारियों ने दूसरे कारोबारों का रुख कर लिया है। एक समय व्यस्त रहने वाले रिंग रोड पर अब कम यातायात है। इस रोड पर कपड़े के थोक बाजार हैं। पावरलूम की आवाज से गूंजने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र शांत पड़ गया है। 

जीएसटी का असर विशेष रूप से सिंथेटिक धागा उद्योग पर पड़ा है, जिसमें उत्पादन एवं बिक्री के विभिन्न चरणों में जीएसटी की अलग-अलग दरें लगती हैं। पारवलूम सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं क्योंकि जीएसटी व्यवस्था के तहत उन पर इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड हासिल करने पर रोक लगा दी गई है।  कपड़ा कारोबारी भी प्रभावित हुए हैं। वे जीएसटी लागू होने से पहले कर के दायरे से पूरी तरह बाहर थे, लेकिन अब कपड़ा कारोबार पर 5 फीसदी जीएसटी लगता है। सूरत के 75,000 कपड़ा कारोबारियों में 90 फीसदी लघु एïवं मझोले कारोबारी हैं, लेकिन ये ही सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव चंपालाल बोथरा ने कहा कि उनका कारोबार 40 फीसदी तक घट गया है। जीएसटी से पैदा हुए मुश्किल हालातों में अपना वजूद बचाने के लिए इन कारोबारियों में से ज्यादातर बड़े कारोबारियों के लिए काम करने लगे हैं या उनसे जुड़ गए हैं। 
 
पंडेसारा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष गुजराती ने कहा, 'अब लोग कैटरिंग, हार्डवेयर एजेंसी या प्लास्टिक में अपने हाथ आजमा रहे हैं या अपने परिसर गोदाम के लिए लीज पर दे रहे हैं। अब बहुत से उद्यमी रोजगार तलाश रहे हैं, जो एक समय रोजगार देते थे। लाखों रोजगार खत्म हुए हैं।' गुजराती अपने परिसरों का एक हिस्सा प्लास्टिक प्रसंस्करण इकाई को लीज पर दे रहे हैं।  इस कहानी को आंकड़े बयां करते हैं। सूरत के कपड़ा उद्योग में विशेष रूप से साइजिंग, ट्विस्टिंग, प्रसंस्करण और बुनाई जैसे रोजगारों में क्षमता उपयोग घटकर 40 से 50 फीसदी रह गया है, जो जीएसटी से पहले 80 से 90 फीसदी था। सूरत में 6,50,000 पावरलूम हैं, जिनमें से 1,00,000 पहले ही कबाड़ के रूप में बिक चुकी हैं। भुगतान अवधि 3-4 महीने से बढ़कर 6-8 महीने हो गई है। 
 
पिछले साल इस समय सूरत में रोजाना 4 करोड़ मीटर सिंथेटिक कपड़े का उत्पादन हो रहा था, जो अब घटकर 2.5  लाख मीटर प्रतिदिन रह गया है। रोजगार में भारी कमी आई है। जीएसटी से पहले उद्योग में 17 से 18 लाख कामगार थे। यह संख्या अब घटकर महज 4 से 4.5 लाख रह गई है। दरअसल बहुत से प्रवासी कामगार अपने राज्यों में वापस लौट गए हैं।  साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतू वखारिया ने कहा, 'जीएसटी का झटका ऐसे समय लगा है, जब सिंथेटिक परिधान उद्योग की मांग घट रही थी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रत्येक महिला खरीदार की साड़ी और सलवार-सूट के रूप में सिंथेटिक कपड़े की औसत खरीद घटकर 2.5 से 3 मीटर रह गई है, जो पहले 6 से 7 मीटर थी।'
 
इसके अलावा धागे और रसायन की कीमतों में बढ़ोतरी का इस कारोबार पर इतना अधिक असर पड़ा है कि बहुत सी इकाइयां कम उत्पादन कर रही हैं। वखारिया ने कहा, 'पहले वे पखवाड़े में एक दिन बंद रहती थीं। लेकिन अब मिलें एक सप्ताह में दो से तीन दिन बंद रहती हैं।' कपड़ा और हीरा उद्योगों के कारोबार इसलिए भी प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि उन्हें कर रिफंड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश नवादिया ने कहा कि लंंबित कर रिफंड से नया निवेश और कच्चे हीरों की खरीद सुस्त पड़ी है। हालांकि नवादिया ने इन अटकलों की पुष्टि नहीं की कि बहुत से छोटे हीरा कारोबारी कर के दायरे से बचने के लिए नकद में लेनदेन कर रहे हैं। 
 
हीरा उद्योग के सूत्रों ने कहा कि जीएसटी के बाद छोटे कारोबारी बड़े कारोबारियों के साथ हाथ मिला रहे हैं क्योंकि बड़े कारोबारियों के पास कच्चे हीरे आयात करने के लिए जीएसटी पंजीकरण है। एक हीरा कारोबारी ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा, 'छोटे कारोबारियों का हीरा आयात आसानी से बड़े कारोबारियों के हीरा आयात में खप जाता है। इसके बाद वे नकद में तराशी का काम कराते हैं और अपने बड़े साझेदारों के जरिये ऊंची कीमतों पर निर्यात कर देते हैं।'
 
Keyword: textiles, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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