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पति-पत्नी भी नहीं चलाएंगे एक दूसरे के एटीएम कार्ड

प्रियदर्शिनी माजी /  06 24, 2018

एटीएम से रकम निकालना हाल ही में बेंगलूरु के एक दंपती को खासा महंगा पड़ गया। एटीएम में जब कार्ड डाला गया तो उससे रकम नहीं निकली, लेकिन खाते में से रकम काट ली गई। जब पति-पत्नी ने इसकी शिकायत की तो बैंक ने उसे खारिज कर दिया। बौखलाकर वे लोग इस मामले को उपभोक्ता अदालत में ले गए। वहां तकरीबन चार साल तक मुकदमा चला और अदालत ने उनके खिलाफ फैसला दिया। अपने फैसले में उसने कहा कि एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करने का अधिकार उसी व्यक्ति को है, जिसका बैंक खाता है।

 
विशेषज्ञ भी उपभोक्ता अदालत के इस फैसले से सहमत हैं। टेरेंशिया के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी संदीप नेरलेकर कहते हैं, 'बैंक, लोकपाल और उपभोक्ता अदालत ने शिकायत खारिज करके एकदम ठीक किया क्योंकि बैंक की शर्तों के मुताबिक खाताधारक अपने एटीएम का पिन किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बता सकता, परिजनों को भी नहीं।' विशेषज्ञों की राय में एटीएम से रकम निकालने के लिए अपना कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को देना गैर कानूनी है। इसीलिए यदि बैंक 'हस्तांतरण निषेध के नियम' को आधार बनाकर आपका दावा खारिज करता है तो वह बिल्कुल सही है।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि आपको आपात स्थिति में भी किसी परिजन के कार्ड का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। एन्ट्रस्ट फैमिली ऑफिस इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजमोहन कृष्णन कहते हैं, 'किसी अन्य के कार्ड का इस्तेमाल कर रकम निकालने से बचिए क्योंकि इससे अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अपने रिश्तेदार के खाते में पड़ी रकम निकालनी है तो उसके लिए दूसरे विकल्प तलाशिए।' अगर आप गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं, घर में ही बंधकर रह जाते हैं या शारीरिक रूप से पूरी तरह अक्षम हो जाते हैं तो ऐसे वैकल्पिक रास्ते ढूंढिए, जिनके जरिये आपके परिजन आपके खाते से रकम निकाल सकें।
 
इसके लिए सबसे आसान विकल्प धारक के नाम का चेक काटना और उस धारक को रकम निकालने के लिए भेज देना। लेकिन ऐसा चेक जारी करेंगे तो धारक को बैंक की शाखा तक जाना पड़ेगा और रकम निकालने के लिए कतार में खड़ा रहना पड़ेगा। यह पुराना तरीका है, जिसमें समय लग सकता है। जो लोग तकनीक में माहिर हैं और नेट बैंकिंग तथा मोबाइल बैंकिंग की सुविधा का इस्तेमाल करते हैं, वे आरटीजीएस, एनईएफटी या आईएमपीएस के जरिये किसी अन्य व्यक्ति के खाते में रकम भेज सकते हैं। लेकिन इस तरह के लेनदेन के लिए समय भी नियत होता है और अधिकतम रकम की सीमा भी तय होती है। मसलन यूपीआई के जरिये आप किसी व्यक्ति को एक बार में 1 लाख रुपये तक की ही रकम भेज सकते हैं।
 
अगर आप बिस्तर से उठने की हालत में नहीं हैं तो किसी को अपना नॉमिनी बनाने से आपको बहुत फायदा नहीं होगा। हालांकि नॉमिनी या (नॉमिनी की गैर मौजूदगी में) कानूनी वारिस को आपके खाते में पड़ी रकम हासिल करने का अधिकार होता है, लेकिन वह रकम तभी निकाल पाएगा, जब खाताधारक का निधन हो जाए। बैंक नॉमिनी को खाता तभी सौंपते हैं, जब खाताधारक की मृत्यु हो जाती है। ऐसी हालत में सबसे अच्छा तरीका है बैंक में संयुक्त बचत खाता खोलना। अगर आपने ऐसा संयुक्त खाता खोला है, जिसमें दोनों खाताधारकों अथवा जीवित खाताधारक को खाता चलाने का अधिकार है तो दोनों खाताधारक यानी पति और पत्नी अकेले भी खाते में जमा और निकासी आदि कर सकते हैं। उस सूरत में दोनों खाताधारकों के दस्तखतों की जरूरत भी नहीं होती। विशेषज्ञ पावर ऑफ अटॉर्नी देने की सलाह भी देते हैं। जिस व्यक्ति के पास पावर ऑफ अटॉर्नी होती है, वह खाताधारक के नाम पर पहले से तय सीमा के भीतर तमाम तरह के बैंकिंग कामकाज कर सकता है।
Keyword: ATM, bank,,
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