बिजनेस स्टैंडर्ड - सूचीबद्ध रिटेल कंपनियों की कमाई जून तिमाही में होगी कम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, July 18, 2018 10:30 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

सूचीबद्ध रिटेल कंपनियों की कमाई जून तिमाही में होगी कम

राम प्रसाद साहू /  06 24, 2018

जून तिमाही में सूचीबद्ध खुदरा कंपनियों के राजस्व में दबाव दिख सकता है क्योंकि इस क्षेत्र की ऑनलाइन कंपनियां ज्यादा छूट दे रही हैं और इसके ही अनुसार परंपरागत खुदरा विक्रेता भी पेशकश कर रहे हैं। ऑनलाइन ऑफर और प्रचार से जुड़ी गतिविधियां मई महीने में तेज थीं। वित्तीय सेवा कंपनी जेफरीज के विश्लेषकों का कहना है कि दो बड़ी वैश्विक प्रतिद्वंद्वी (एमेजॉन और फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण करने के बाद वॉलमार्ट) कंपनी का 70 फीसदी ऑनलाइन खुदरा बिक्री पर नियंत्रण है। ऑनलाइन प्रतिस्पद्र्धा में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है क्योंकि इसके जरिये ही बाजार हिस्सेदारी में तेजी आ सकती है। ऑनलाइन कंपनियों के अलावा फ्यूचर समूह ने ज्यादा विज्ञापन और प्रचार-प्रसार के जरिये आक्रामक योजनाओं की पेशकश की। डीमार्ट की तर्ज पर बिग बाजार और रिलायंस स्मार्ट भी रोजाना कम कीमत वाली योजनाओं की पेशकश कर रही है। 

 
अगर छूट का रुझान बरकरार रहता है और छूट की पेशकश में आगे तेजी आती है तो यह इस क्षेत्र के वृद्धि रुझान के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि ज्यादातर खुदरा कंपनियों के शेयरों ने पिछले साल सेंसेक्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है और अब उनकी निगाह इस पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि आक्रामक प्रचार-प्रसार किया गया है लेकिन संरचनात्मक बदलाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के शोध निदेशक का मानना है कि चुनिंदा सेगमेंट मसलन किराना आदि में ऑनलाइन कंपनियों की तरफ से प्रतिस्पद्र्धा में तेजी आ सकती है। उन्हें बाजार की गतिविधियों में अहम बदलाव की उम्मीद नहीं है। शेयरखान के कौस्तुभ पावस्कर का भी मानना है कि ऑनलाइन कंपनियों की तरफ से बड़े पैमाने पर दी जा रही छूट का ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि देश में ऑनलाइन खरीदारी की रफ्तार बेहद कम है। 
 
अगर दुनिया भर में परंपरागत खुदरा विक्रेताओं को ज्यादा चुनौतीपूर्ण स्थिति महसूस होती है विशेषतौर पर ऑनलाइन क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियों से तो कमाई पर दबाव पड़ सकता है। इस पर निगाह रखने की जरूरत है।  जून की तिमाही में सूचीबद्ध खुदरा कंपनियों की कमाई में कमी दिखने के आसार हैं। इस क्षेत्र में फिलहाल इसी बात की चिंता है कि मार्च तिमाही में समान स्टोर में बिक्री (एसएसएस) की वृद्धि में कमी आने के बाद जून की तिमाही का प्रदर्शन भी कम रहने की उम्मीद है।  एसएसएस की वृद्धि से कम से कम एक साल में स्टोरों के परिचालन के प्रदर्शन का अंदाजा मिलता है। शेयरखान के पावस्कर जैसे विश्लेषकों का मानना है कि एसएसएस वृद्धि जून की तिमाही में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कम रह सकता है। मार्च तिमाही में पैंटालून (आदित्य बिड़ला फैशन या एबीएफआरएल) ने कम आधार की वजह से एक साल पहले की अवधि के मुकाबले 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की। शॉपर्स स्टॉप और इजी डे (फ्यूचर रिटेल) ने तीन से चार फीसदी तक की गिरावट दर्ज की। रिलायंस ट्रेंड्स, फ्यूचर समूह (पैंटालूंस), रेनोवेशन वर्क (शॉपर्स स्टॉप) से कड़ी टक्कर मिलने, बिक्री प्रचार के कम दिनों (सभी कंपनियों के लिए) और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी कीमतों की वजह से कम वृद्धि हुई। मार्च तिमाही के दौरान छूट वाले कम दिन इसलिए दिए गए क्योंकि दिसंबर में साल के अंत के दौरान दिए जाने वाले सेल की शुरुआत जल्दी अमूमन सामान्य समयसीमा से करीब 10 दिन पहले हो गई थी। एवेन्यू सुपरमार्ट्स ने वित्त वर्ष 2018 में एसएसएस की प्रत्याशित वृद्धि के मुकाबले कम यानी 16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जबकि वित्त वर्ष 2017 में इसने 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी। हालांकि सितंबर तिमाही में एसएसएस की वृद्धि में तेजी आने की संभावना है क्योंकि लोगों के खर्च करने की रफ्तार में सुधार दिख सकता है। इसके अलावा बेहतर मॉनसून की वजह से उपभोक्ता मांग में भी तेजी बनी रह सकती है। यह खुदरा विक्रेताओं के लिए सकारात्मक रुझान है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि नजदीकी अवधि में कुछ दबाव दिख सकता है लेकिन संगठित क्षेत्र की परंपरागत खुदरा कंपनियों के लिए लंबी अवधि का रुझान बेहतर होगा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कंपनियों में सालाना 12 फीसदी से ज्यादा वृद्धि हो सकती है जैसा कि पिछले तीन सालों में देखा गया है। इस क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के मांग रुझान में सुधार दिखने की उम्मीद है। इसके अलावा आर्थिक नजरिये में भी सुधार दिख रहा है जिससे ग्राहकों की धारणा में तेजी आएगी और वे सोच-समझकर खर्च करेंगे। क्रिसिल के श्रीनिवासन का कहना है कि जीएसटी जैसी पहल से संगठित क्षेत्र के खिलाडिय़ों की बाजार हिस्सेदारी में तेजी आ सकती है। उनका मानना है कि स्टोर की तादाद में बढ़ोतरी और बड़े संगठित आउटलेट से खरीद को तरजीह देने का ग्राहकों का रुझान बढ़ेगा और इससे पंरपरागत खुदरा विक्रेताओं को भी मांग में तेजी दिखेगी। 
 
इसी पृष्ठभूमि के आधार पर ज्यादातर विश्लेषकों ने प्रमुख रिटेल शेयरों में तेजी का अनुमान लगाया है। उन्होंने एवेन्यू सुपरमाट्र्स और वी मार्ट को छोड़कर ट्रेंट शॉपर्स, एबीएफआरएल और फ्यूचर रिटेल के लिए उनकी लक्षित कीमत में एक साल की अवधि के दौरान 15 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।
Keyword: FMCG, Q3,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दुग्ध निर्यात पर प्रोत्साहन का किसानों को मिलेगा लाभ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.