बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-सौदों पर पेमेंट फर्मों को कमीशन नहीं देगा स्टेट बैंक
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ई-सौदों पर पेमेंट फर्मों को कमीशन नहीं देगा स्टेट बैंक

मयंक जैन / नई दिल्ली 06 24, 2018

भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए अपने भुगतान पार्टनर फर्मों से राजस्व में हिस्सेदारी को लेकर अपने हाथ रोक लिए हैं। ऑनलाइन भुगतान के लिए बैंक सेवा प्रदाताओं (एग्रीगेटर्स) की सेवाएं लेता है, जिससे कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) गेटवे के माध्यम से  डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर भुगतान किया जा सके। बैंक इस सुविधा के लिए एकत्र किए गए कमीशन में से सेवा प्रदाताओं को हिस्सा देता है।  स्टेट बैंंक ने 14 मई को भेजे गए ई मेल में अपने भुगतान पार्टनरों को सूचित किया है कि अगर उसके पेमेंट गेटवे से 1,000 रुपये से कम का भुगतान होता है तो वह कमीशन नहीं देगा। साथ ही गैर एसबीआई डेबिट कार्ड से लेन देन पर भी वह कमीशन नहीं देगा। 
 
इस ई मेल को बिजनेस स्टैंडर्ड ने देखा है, जिसमें इस तरह के फैसले के लिए कोई तर्क नहीं दिया गया है, जबकि यह 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को युक्तिसंगत' बनाने का मामला है। एमडीआर डिजिटल ट्रांजेक् शन की लागत है, जो सामान्यतया कारोबारी उस समय लेते हैं, जब ग्राहक अपना कार्ड स्वाइप कराकर भुगतान करता है। इस एमडीआर का बंटवारा भुगतान प्रक्रिया में शामिल सभी हिस्सेदारों के बीच होता है, जिनमं बैंक, कार्ड नेटवर्क और भुगतान सेवा प्रदाता शामिल हैं।  बहरहाल डिजिटल लेन देन को गति देने के लिए भारत सरकार ने ग्राहकों के 2000 रुपये तक के लेन देन पर पर एमडीआर की प्रतिपूर्ति करने का फैसला किया है। यह 8 बड़े बैंकों के माध्यम से किया जा रहा है, जिनमें एसबीआई शामिल है। इन बैंकों को लेन देन की वास्तविक राशि के आधार पर सरकार से प्रतिपूर्ति मिलती है और वे भुगतान फर्मों को इसमें से हिस्सा देते हैं, जो उनके समझौतों व नीतियोंं पर निर्भर है। 
 
एसबीआई की ओर से भेजे गए ई मेल में कहा गया है कि बैंक दरअसल 2,000 रुपये तक के प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत पाता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में ट्रांजेक्शन पर एमडीआर मेंं कटौती कर दी थी और 2,000 रुपये तक के डेबिट कार्ड ट्रांजेक् शन पर 0.40 प्रतिशत सेवा शुल्क तय कर दिया था, जिसका भुगतान सरकार को करना होता है।  ई मेल में कहा गया है, 'जैसा कि आप जानते हैं कि बैंक 2,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर का दावा आरबीआई/भारत सरकार से करता है। इस तरह का दावा पहली बार इस महीने किया जाएगा।' इसमें कहा गया है कि बैंक ने फैसला किया है कि भुगतान सेवा प्रदाताओं को 'उचित प्रतिपूर्ति' की जाएगी, जो एसबीआई पेमेंट गेटवे के माध्यम से हो रहा है।
 
नई राजस्व साझेदारी व्यवस्था के मुताबिक अगर ग्राहक एसबीआई के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करता है तो सुविधा प्रदाता को बमुश्किल कुछ मिल पाता है। उदाहरण के लिए अगर 1,000 रुपये तक का लेन देन होता है तो कोई कमीशन नहीं मिलता जबकि 1,000 रुपये से 2,000 रुपये तक के लेन देन पर बैंक लेन देन के कुल मूल्य का 0.05 प्रतिशत राजस्व और लागू कर देता है। बहरहाल अगर एसबीआई कार्ड से लेन देन हुआ है तो बैंक लेन-देन का 0.15 प्रतिशत कमीशन के रूप में सेवा प्रदाताओं को देता है। 
 
इस फैसले का असर सेवा प्रदाता उद्योग पर पडऩा तय है। पेयू, सीसीएमेन्यू और बिलडेस्क जैसी कंपनियों के माध्यम से अरबों रुपये का डिजिटल भुगतान होता है और करीब सभी पेमेंट एग्रीगेटरों के पास एसबीआई पेमेंट गेटवे है। एक भुगतान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने एसबीआई के ई मेल की पुष्टि करते हुए कहा, 'हम अपने टॉप लाइन और मुनाफे पर इस फैसले के असर का आकलन कर रहे हैं। उद्योग विरोधी इस कदम का असर पडऩा तय है क्योंकि करीब सभी बड़ी ई सेवाओं से एसबीआई का पेमेंट गेटवे जुड़ा हुआ है और बड़ी मात्रा में लेन देन एसबीआई के माध्यम से होता है।' 
 
उन्होंने कहा कि यह सर्कुलर 1 जनवरी से लागू होगा, जिसका मतलब यह है कि इसका असर पहले के लेन देन पर भी पड़ेगा, जो कारोबार पिछले 5 महीने में हो चुका है। इसके बारे में भुगतान फर्मों की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। उन्होंंने कहा, 'आप स्टेट बैंक जैसे बड़े बैंक से इस तरह से कैसे उम्मीद कर सकते हैं। उनके लिए कुछ करोड़ रुपये मामूली बात है, लेकिन हमारा कारोबार इसी राजस्व पर निर्भर है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हमसे कोई संपर्क नहीं किया गया।'  अनुमान के मुताबिक एसबीआई की 8,00,000 से ज्यादा प्वाइंट आफ सेल मशीनें हैं और इसके पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल 7 बड़ी सेवा प्रदाता कंपनियां करती हैं। 
Keyword: bank, loan, debt, SBI,,
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