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एचडीएफसी एमएफ ने वितरकों को दिए शेयर, उद्योग नाखुश

जश कृपलानी और समी मोडक / मुंबई 06 24, 2018

आईपीओ से पहले वितरकों को आवंटित किए शेयर, उद्योग ने हितों के टकराव का उठाया मामला
निजी नियोजन के जरिये 140 वितरकों को दिए 1.5 अरब मूल्य के शेयर
1,050 रुपये के भाव पर आवंटित किए गए शेयर
सूत्रों के अनुसार 1,400 से 1,500 रुपये के बीच रह सकता है आईपीओ का मूल्य दायरा
कंपनी की कुल बिक्री में वितरकों का योगदान है करीब 70 फीसदी

बिजनेस स्टैंडर्ड एचडीएफसी एमएफ ने वितरकों को दिए शेयर, उद्योग नाखुशकरीब 23 लाख करोड़ रुपये के कारोबार वाले म्युचुअल फंड उद्योग ने देश के सबसे मुनाफेदार फंड हाउस एचडीएफसी एमएफ द्वारा वितरकों को शेयर आवंटित करने पर आपत्ति जताई है। वितरक निवेशकों और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी होते हैं। अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ से पहले एचडीएफसी एमएफ ने निजी नियोजन के जरिये अपने 140 वितरकों को करीब 1.5 अरब रुपये मूल्य के शेयर आवंटित किए हैं।

एचडीएफसी एमएफ 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों का प्रबंधन करती है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास जमा कराए गए आईपीओ दस्तावेज में इस तरह के आवंटन के प्रावधान का स्पष्टï उल्लेख किया गया है, जिसे उद्योग जगत ने गलत करार दिया है। शेयर आवेदन पत्र के अनुसार वितरकों को 5 रुपये अंकित मूल्य वाला शेयर 1,050 रुपये के भाव पर आवंटित किया गया है। वितरकों को इस भाव पर कुल 14.4 लाख शेयर दिए गए।

कई लोगों को लगता है कि यह आवंटन आईपीओ कीमत से काफी कम दाम पर दिए गए हैं। हालांकि आईपीओ के मूल्य दायरे का निर्णय निर्गम खुलने के कुछ दिन पहले तय किया जाएगा। लेकिन खबरों और निवेश बैंकिंग सूत्रों के अनुसार आईपीओ का मूल्य दायरा 1,400 से 1,500 रुपये के बीच रह सकता है। इस आधार पर फंड हाउस का मूल्यांकन करीब 307 अरब रुपये होगा। लेकिन 1,050 रुपये प्रति शेयर के आधार पर एचडीएफसी एमएफ का मूल्यांकन 215 अरब रुपये बैठता है।

एक फंड हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, 'यह हितों के टकराव का मामला है। स्पष्ट तौर पर वितरकों का झुकाव फंड हाउस के प्रति होगा क्योंकि उसमें उनकी शेयरधारिता होगी। आदर्श स्थिति में वितरक को निवेशक के प्रति ईमानदार होना चाहिए। इससे गलत तरीके से बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है। म्युचुअल फंडों की योजनाओं की बिक्री में वितरकों का योगदान सबसे अधिक होता है।' इस बारे में पक्ष जानने के लिए एचडीएफसी एमएफ को ईमेल भेजा गया लेकिन उसका जवाब नहीं आया।

सूत्रों ने कहा कि बाजार के कई भागीदारों ने इस मसले पर सेबी से संपर्क किया है और इसकी स्वीकार्यता के बारे में स्पष्टïीकरण की मांग की है। यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उद्योग की कई कंपनियां निर्गम लाने वाली हैं। अक्टूबर 2017 में आईपीओ लाने वाली रिलायंस एमएफ पहली एएमसी थी। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ और यूटीआई एमएफ की भी निकट भविष्य में आईपीओ लाने की योजना है। एचडीएफसी एमएफ का निजी नियोजन उसके पैनल में शामिल वितरक साझेदारों के लिए खरीद के लिए 21 से 26 अप्रैल तक खुला था।

सूत्रों ने कहा कि इस पेशकश की काफी मांग देखी गई और फंड हाउस ने 140 वितरकों को शेयर आवंटित किए हैं। वितरक आवंटित शेयरों को एक साल तक बेच नहीं सकते हैं। म्युचुअल फंड उद्योग के लिए वितरक अहम होते हैं क्योंकि फंड हाउस की पहुंच उतनी व्यापक नहीं होती है। एचडीएफसी एमएफ के मामले में कंपनी की कुल प्रबंधन वाली परिसंपत्तियों में करीब 70 फीसदी योगदान वितरकों का है, शेष सीधे बिक्री के जरिये आती हैं, जिसमें निवेशकखुद फंड हाउस से सीधे खरीद करते हैं।

इक्विटी खंड की ब्रिकी में वितरकों की हिस्सेदारी 85 फीसदी से अधिक होती है। निर्गम दस्तावेज में एचडीएफसी एमएफ ने अपने कारोबार में वितरकों के महत्त्व को रेखांकित नहीं किया है। वित्त वर्ष 2018 में एएमसी का करीब एक-चौथाई प्रबंधन वाली संपत्तियां शीर्ष 200 वितरकों के जरिये आई हैं, जिनमें बैंक शामिल नहीं हैं। हालांकि कुछ लोगों को लगता है कि वितरकों को छूट देना जरूरी है।आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल ने कहा, 'वितरक एमएमसी के विकास के साझेदार होते हैं इसलिए वितरकों को कुछ प्रोत्साहन देना तार्किक है।'

एचडीएफसी एमएफ अपने आईपीओ में भी वितरकों के लिए विशेष कोटा रखना चाहती है।  समझा जाता है कि सेबी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।वैल्यू रिसर्च के मुख्य कार्याधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से बातचीत में पहले कहा था, 'एचडीएफसी एमएफ अपनी सफलता के लिए वितरकों की अहसानमंद है। इसलिए आईपीओ में उनके लिए शेयर आरक्षित करना वितरकों को प्रोत्साहित करने का अच्छा जरिया है। यह शेयर विकल्प की तरह नहीं है।'

मई में सेबी की वेबसाइट पर कहा गया है कि एचडीएफसी एमएफ को पिछले उल्लंघन के मूल्यांकन के लिए स्थगित रखा गया है। फंड हाउस ने आईपीओ को पिछली तिमाही में लाने का लक्ष्य रखा था। निवेश बैंकरों का कहना है कि सेबी की मंजूरी मिलते ही आईपीओ बाजार में आ जाएगा। प्रवर्तक कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) की कंपनी में 57 फीसदी हिस्सेदारी है और वह 4 फीसदी शेयर बेच सकती है, वहीं ब्रिटेन की स्टैंडर्ड लाइफ इन्वेस्टमेंट्स के पास 38 फीसदी हिस्सेदारी है और वह आईपीओ के जरिये अपनी 8 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है।

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