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बैठक पक्की न होने से ममता की चीन यात्रा रद्द

नम्रता आचार्य /  June 22, 2018

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चीन रवाना होने से कुछ घंटे पहले ही अपनी यात्रा रद्द कर दी। चीन की तरफ से बैठकों की पुष्टि नहीं किए जाने की वजह से ममता को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। ममता आठ दिन के दौरे पर शुक्रवार रात चीन रवाना होने वाली थीं। इस साल मार्च में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आदेश में पर ममता बनर्जी ने चीन जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए सहमति जताई थी। ममता भारत सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत एक शिष्टमंडल का नेतृत्व करने वाली थीं। अंतरराष्ट्रीय विभाग भारत सहित दुनिया भर के राजनीतिक दलों के साथ संबंधों के आदान-प्रदान का प्रभार संभालता है और चीन का दौरा करने वाले नेताओं की मेजबानी करता है तथा उनके साथ बातचीत करता है। इस यात्रा के दौरान उन्हें कई राजनीतिक बैठकें करने के साथ ही चीन की कंपनियों के प्रमुख सीईओ के साथ भी बातचीत करनी थी। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बताया कि यात्रा रद्द करने के बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश सचिव वी के गोखले को जानकारी दे दी गई है। सुषमा अभी विदेश में हैं।

 
बनर्जी ने शुक्रवार को ट्वीट किया, 'पिछले दिन तक सभी चीजें ठीक चल रही थीं लेकिन दुर्भाग्यवश उचित स्तर पर राजनीतिक बैठकों की पुष्टि नहीं हो पाई। चीन में हमारे राजदूत ने सूचित किया है कि आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत उचित स्तर पर राजनीतिक बैठकों की पुष्टि नहीं हुई है। लिहाजा, आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत शिष्टमंडल के साथ चीन की मेरी यात्रा का कोई महत्त्व नहीं है।' पश्चिम बंगाल ने राज्य में चीन के निवेश में ऐसे वक्त में काफी दिलचस्पी दिखाई जब भारत सरकार ने चीन की महत्त्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना 'वन बेल्ट वन रोड' पर गंभीर रूप से एतराज जताया था जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा निर्माण पहल माना जा रहा है। इस साल जनवरी में करीब 30 चीनी कंपनियों ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल सरकार के अहम वैश्विक निवेश सम्मेलन में हिस्सा लिया था। 
 
ममता ने अपने ट्वीट में कहा, 'मैं चाहती हूं कि आने वाले दिनों में भारत और चीन की दोस्ती बनी रहे। यह दोनों देशों के हित में है कि दोस्ती गहरी हो।' विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखा जबकि एक संवाददाता सम्मेलन में अमित मित्रा ने कहा, 'शुक्रवार की रात हम चीन की यात्रा पर जाने वाले थे लेकिन चीन की तरफ से कोई पुष्टि न होने से हम अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकते थे। राजनीतिक बैठकों की उचित स्तर पर पुष्टि न होने से आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत चीन की यात्रा करने का कोई मतलब नहीं था। दुर्भाग्यवश आखिर में हमें यह यात्रा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा।'
 
ममता ने फेसबुक पर लिखी एक पोस्ट में कहा, 'इस साल मार्च में विदेश मंत्री ने मुझसे सिफारिश की थी कि मैं चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के साथ भारत सरकार के आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत एक शिष्टमंडल के नेतृत्व पर विचार करूं। '  मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर सहमत हो गईं थीं और उन्होंने उनसे (सुषमा से) कहा कि चूंकि यह देश के हित से जुड़ा मामला है तो वह जून 2018 के आखिरी हफ्ते में किसी समय चीन की यात्रा करना चाहेंगी। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और भारत में चीन के राजदूत के बीच पत्राचार से एक कार्यक्रम तय हुआ। पेइचिंग स्थित सूत्रों ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने अपने अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री सोंग ताओ के अलावा किसी और वरिष्ठ नेता के साथ ममता की बैठक की व्यवस्था नहीं की थी। लेकिन भारतीय राजनीति में ममता के दर्जे को देखते हुए भारत ने चीन की सत्तारूढ़ पार्टी सीपीसी की सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के एक सदस्य के साथ उनकी बैठक का प्रस्ताव दिया था। ममता ने कहा कि चीन में हमारे राजदूत ने कार्यक्रम को सफल बनाने की बहुत कोशिश की लेकिन भारतीय राजदूत ने उचित स्तर पर राजनीतिक बैठकों का चीन को जो प्रस्ताव दिया था आखिरी वक्त पर उसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
 
ममता पश्चिम बंगाल में चीन का निवेश बढ़ाने के प्रयासों के तहत पेइचिंग और शांघाई में चीनी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की एक बैठक को संबोधित करने वाली थीं। उन्हें 30 जून को वापस कोलकाता आना था। चीन में होने वाली कारोबारी बैठक के दौरान बंगाल के उद्योगपतियों और सीईओ के भी रहने की उम्मीद थी। ममता इससे पहले सिंगापुर, ब्रिटेन और जर्मनी में भी निवेश को लेकर रोडशो आयोजित करा चुकी हैं। चीन दार्जिलिंग चाय, जूट, समुद्री खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प और परिधानों का आयात बंगाल से करता है।  
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