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ऑनलाइन वीडियो की दुनिया की क्या हैं परिस्थितियां?

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  June 22, 2018

कहा जा रहा है कि वर्ष 2018 की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान स्टार इंडिया के ऐप हॉट स्टार पर 20.2 करोड़ लोग पहुंचे। इससे पिछले साल 11.3 करोड़ लोगों ने इस ऐप का इस्तेमाल किया था। वीडियो इंटेलिजेंस फर्म विडूली के मुताबिक चूचू टीवी इस समय यूट्यूब पर सबसे बड़ा प्री स्कूल ब्रांड है। दुनिया भर में उसके 1.75 करोड़ सबस्क्राइबर हैं। गत वर्ष इनकी तादाद 1.40 करोड़ थी। एयरटेल डिजिटल टीवी और डिश टीवी के बाद अब जल्दी ही टाटा स्काई भी नेटफ्लिक्स और अन्य वीडियो ऐप की सेवाएं देने वाला है। 

 
डिजिटलीकरण के बारे में आमतौर पर अच्छी ही चर्चा देखने को मिलती है। बिजनेस अखबारों में कॉर्ड कटिंग (टीवी से दूरी) और युवाओं के बढ़ते ऑनलाइन इस्तेमाल आदि के बारे में आलेख देखने को मिलते ही रहते हैं। अगर आपको तीन बातें पता हों तो कह सकते हैं कि इन बातों का कोई खास अर्थ नहीं है।  पहली बात, कॉर्ड कटिंग अमेरिका की हकीकत है भारत की नहीं क्योंकि यहां टीवी अभी काफी अच्छी स्थिति में है। टीवी की पहुंच 91.5 करोड़ लोगों तक है जो रोज औसतन तीन घंटे टीवी देखते हैं। यह भी सच है कि भारत दुनिया का सबसे तेज गति से विकसित होता ऑनलाइन बाजार है। करीब 42.4 करोड़ भारतीय ऑनलाइन रहते हैं। इनमें से करीब 30 करोड़ के पास बढिय़ा ब्रॉडबैंड कनेक्शन है। मनोरंजन प्रदान करने वाली करीब 35 ऐप अनुमानित 30 अरब रुपये का विज्ञापन राजस्व अर्जित करती हैं। यह टीवी उद्योग के 660 अरब रुपये के राजस्व का बमुश्किल 4.5 फीसदी है। ध्यान देने वाली बात है कि ऑनलाइन देखी जाने वाली सामग्री में से तीन चौथाई टीवी के ही कार्यक्रम होते हैं।
 
कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि डिजिटल मीडिया बढ़ेगा नहीं, निश्चित रूप से वह बढ़ेगा। परंतु हमें इसे लेकर अति उत्साह से परे कुछ ढंग से सोचना होगा। देश के मीडिया बाजार में हर तरह के मीडिया के लिए पर्याप्त जगह है। इसमें ऑनलाइन के लिए भी पर्याप्त जगह है। वह किसी का स्थानापन्न नहीं बल्कि एक अन्य विकल्प है। उदाहरण के लिए, देश में 10 करोड़ परिवार ऐसे भी हैं जिनके घरों में टीवी नहीं है। अमेरिका में नेटफ्लिक्स 8 से 12 डॉलर में वही चीजें देकर बाजार में हलचल मचा सकता है जो पारंपरिक टीवी प्रति माह 40 से 80 डॉलर में मुहैया कराता है। भारत में टीवी पर औसतन 2 से 3 डॉलर मासिक की राशि खर्च की जाती है।
 
दूसरा, हॉटस्टार जोरशोर से आईपीएल के दौरान अपनी सफलता का दावा कर सकता है लेकिन यह जानकारी भी हॉटस्टार के एनालिटिक्स से सामने आई है, न कि किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष से। चूचू टीवी के आंकड़े यूट्यूब ने जारी किए हैं। रोकू या अन्य प्लेटफॉर्म पर इसका प्रदर्शन तथा इस ऐप पर उपयोगकर्ता कितनी देर ठहरते हैं इसकी जानकारी नहीं मिलती।  तीसरे पक्ष के मजबूत आंकड़ों की गैरमौजूदगी ऑनलाइन जगत की एक बड़ी समस्या है। मैं बीते 17 साल से मीडिया की कवरेज कर रही हूं और ट्रैफिक, बिताए गए समय, राजस्व आदि के मानकों पर इसका विश्लेषण करना सबसे अधिक कठिन है। अगर मैं टीवी शो, चैनलों  या समूचे नेटवर्क के आंकड़ों की तुलना करना चाहूं तो ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च परिषद (बार्क) के पास आंकड़े हैं। प्रिंट मीडिया की बात करें तो इस काम के लिए इंडियन रीडरशिप सर्वे और ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के आंकड़े मौजूद हैं।  
 
आप कह सकते हैं कि ऑनलाइन में कॉमस्कोर, नीलसन, ऐप एनी, सिमिलरवेब और अन्य तरीके हैं। बहरहाल, कई वीडियो ऐप और वेबसाइट तीसरे पक्ष के अंकेक्षण या अपने आंकड़ों के आकलन की मंजूरी नहीं देतीं क्योंकि उसके लिए अपने सर्वर में पहुंच देनी होती है। अगर सर्वसम्मति से शीर्ष 10 स्ट्रीमिंग ब्रांड की सूची बनाई जाए तो भी ऑनलाइन को लेकर कोई मजबूत और निरपेक्ष आंकड़ा सामने नहीं आता है। अगर इस उद्योग को अपने विज्ञापन राजस्व बढ़ाना है तो उस लिहाज से यह बहुत बड़ी कमी है। 
 
मीडिया एजेंसियां वीडियो ऐप की बात करते हैं तो केवल इसलिए क्योंकि वहां मिलने वाला कमीशन टीवी पर मिलने वाले एक फीसदी कमीशन की तुलना में बेहतर होता है।  परंतु वे ऑनलाइन उपभोक्ताओं को जिन दरों की पेशकश करते हैं वे अभी भी टीवी की दरों की तुलना में बेहद मामूली होती हैं। वहां तक पहुंचने के लिए वीडियो ऐप को निरंतर बड़े आंकड़ों की आवश्यकता होती है। उन्हें एक पैमाना भी चाहिए जिसे आधार बनाकर आकलन किया जा सके। क्या ऑनलाइन फर्में बार्क की तरह एक मानक विकसित कर सकती हैं?
 
तीसरी बात, अधिकांश ऐप और ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म अभी नए हैं। परंतु अगर उन्हें दर्शकों और विज्ञापनदाताओं के बीच गंभीरता से लिया जाना है तो उन्हें मीडिया फर्मों की तरह सोचना शुरू करना होगा। जरा नेटफ्लिक्स पर विचार करते हैं जो दुनिया की सबसे बड़े स्ट्रीमिंग ब्रांड्स में से एक है। नेटफ्लिक्स अब कोई प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है बल्कि यह एक स्टूडियो है जो इसके आंकड़ों का विश्लेषण करके कुछ बेहतरीन कंटेंट तैयार करती है और सबस्क्रिप्शन  की मदद से पैसे कमाती है। दर्शकों और राजस्व के प्रति उसका रुख उतना ही पारंपरिक है। 
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