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आईबीसी से बिजली क्षेत्र को राहत कम

श्रेया जय और सोमेश झा / नई दिल्ली June 21, 2018

बिजली क्षेत्र की फंसी संपत्तियों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक का रुख नरम होने की संभावना कम है, जो आईबीसी नियमों के तहत विशेष व्यवस्था की मांग कर रहा है। वहीं निजी उत्पादकों को नुकसान पहुंचा रहे मसलों के समाधान के लिए केंद्र सरकार कर्ज के पुनर्गठन और सुधार योजनाओं पर जोर दे सकती है। बिजली क्षेत्र के विभिन्न हिस्सेदारों, कोयला एवं बिजली मंत्रालय के अधिकारियों और रिजर्व बैैंक के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करने के बाद वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार ने कहा कि रिजर्व बैंक ने अपनी फरवरी की अधिसूचना को दोहराते हुए कहा है कि उसमें फंसी हुई बिजली संपत्तियों के पुनर्गठन के लिए पर्याप्त व्यवस्था है और किसी विशेष व्यवस्था की जरूरत नहींं है।
 
इस साल फरवरी महीने में रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए अनिवार्य कर दिया था कि अगर कर्ज भुगतान में एक दिन की भी चूक होती है तो उसे चूक के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। अधिसूचना में दबाव वाले खातों के समाधान की कार्यवाही को 180 दिन के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है।   बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कुमार ने कहा, 'रिजर्व बैंक ने कहा है कि अधिसूचना में फंसी हुई बिजली संपत्तियों के पुनर्गठन से नहीं रोका गया है। अगर कोई चूक है, तब भी नहीं। एक समय सीमा के भीतर पुनर्गठन संभव है।' 
 
इसके पहले केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने रिजर्व बैंक से अनुरोध किया था कि बिजली क्षेत्र को और समय मुहैया कराया जाए। बिजली ओर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह ने कहा था कि खराब कर्ज के लिए रिजर्व बैंक का समाधान 'अव्यावहारिक' है और इसमें बदलाव किए जाने की जरूरत है।  बिजली क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सरकार से कहा कि  फंसी हुई संपत्ति के मामले में किसी भी सुधार योजना के लिए समय सीमा पर विचार किए जाने की जरूरत है और रिजर्व बैंक को इसके लिए विस्तार देने का सुझाव दिया। एसोसिएशन आफ पावर प्रोड्यूसर्स (एएपी) के महासचिव एके खुराना ने कहा, 'बिजली क्षेत्र बहुत ज्यादा नियमन के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में शामिल है। हकीकत यह है कि इस समय आए संकट की बहुत ज्यादा वजहें बाहरी हैं। ऐसे में बिजली क्षेत्र के लिए अलग तरीके से समाधान के रास्ते की जरूरत है। अगर राहत दी जाती है तो इससे समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी।' 
 
इस समय बिजली क्षेत्र का संकट दूर करने के लिए 3 योजनाएं तैयार की गई हैं।  भारतीय स्टेट बैंक का सबसे ज्यादा बकाया है। स्टेट बैंक प्रायोगिक योजना के तहत कुछ संपत्तियों का चयन करने जा रहा है, जिसके कर्ज का बोझ फंडिंग एजेंसी के साथ मिलकर उठाएगा।  इस क्षेत्र को कर्ज देने वाले बिजली वित्त निगम (पीएफसी) ने 3 संपत्तियों के लिए रुचि पत्र आमंत्रित किया है, जिनमें वह कर्जदाता है। इसमें कुछ प्रमुख वैश्विक निवेशकों ने शुरुआती रुचि दिखाई है। इस क्षेत्र के एक और कर्जदाता आरईसी लिमिटेड का बिजली उत्पादन में बकाया कम है। उसने भी बिजली मंत्रालय की ओर से बेल आउट योजना का मन बनाया है। माना जा रहा है कि आरईसी विशेष उद्देश्य इकाई का गठन करेगी।
 
रिजर्व बैंक के सर्कुलर के खिलाफ न्यायालय जाने वाला संगठन भी बैठक में हुआ शामिल
 
भारतीय रिजर्व बैंक की फरवरी की अधिसूचना के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायायल में याचिका दाखिल करने वाला संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (आईपीपीएआई) ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया। उद्योग लॉबी समूह ने सरकार के सामने मांग की एक सूची पेश की, जिसमें निजी उत्पादकों को राहत देने के लिए कोष के गठन से लेकर कार्यबल गठित करने, लागत और अवधि की सीमा खत्म करने, जिसके तहत सरकारकी कंपनी एनटीपीसी को परियोजनाएं दी गई हैं, शामिल हैं। आईपीपीएआई ने यह भी आरोप लगाया है कि एनटीपीसी अपने शुल्क का बचाव कर रही है और सरकारी समर्थन से इस क्षेत्र में पिछले दरवाजे से घुस रही है। संगठन ने सरकार से कहा है कि एनटीपीसी का 'अनटर्मिनेबल पीपीए' हटाकर निजी कारोबारियों को जगह दी जाए।
Keyword: IBC, power, debt, RBI,,
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