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सेबी ने बदले नियम, अब पूंजी जुटाना होगा सरल

बीएस संवाददाता / मुंबई 06 21, 2018

बिजनेस स्टैंडर्ड सेबी ने बदले नियम, अब पूंजी जुटाना होगा सरलभारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पूंजी जुटाने की गतिविधियों को तेज करने के लिए इससे संबंधित नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। बाजार नियामक ने स्टॉक एक्सचेंजों, क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजटरी जैसी बाजार से जुड़ी बुनियादी संस्थाओं (एमआईआई) से संबंधित नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी है। इसके तहत इन संस्थाओं के आला पदाधिकारियों के कार्यकाल की सीमा तय की गई है।

नए नियमों के मुताबिक किसी कंपनी को आईपीओ खुलने से दो दिन पहले इसकी कीमत सार्वजनिक करनी होगी। अभी यह अवधि 5 दिन है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आईपीओ लाने वाली कंपनी को बाजार के उतार-चढ़ाव से बेहतर ढंग से निपटने में मदद मिलेगी, साथ ही आईपीओ लाने वाली कंपनी को अब 3 साल की वित्तीय जानकारी देने की जरूरत होगी जबकि अभी यह अवधि 5 साल है।

सेबी ने साथ ही आईपीओ का प्रबंधन करने वाले निवेश बैंकर से जुड़े म्युचुअल फंडों और बीमा कंपनियों को प्रमुख निवेशक की श्रेणी में भाग लेने की अनुमति दे दी है। अलबत्ता बाजार नियामक ने एसएमई कंपनियों के आईपीओ में प्रमुख निवेशकों के लिए उपलब्ध शेयरों की कीमत 10 करोड़ रुपये से घटाकर 2 करोड़ रुपये कर दी है।

सेबी ने साथ ही प्रवर्तक समूह की परिभाषा बदलकर करीबी रिश्तेदारों को भी इसमें शामिल कर दिया है। बाजार नियामक ने समूह कंपनियों की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए उन कंपनियों को भी जोड़ दिया है जिनके साथ लगातार लेनदेन चलता है।  इस बीच सेबी ने एमआईआई में प्रबंध निदेशकों का कार्यकाल सीमित कर दिया है। अब कोई व्यक्ति इस पद पर अधिकतम 3 कार्यकाल तक रह सकता है और एक संस्थान में दो कार्यकाल से अधिक नहीं रह सकता।

बिजनेस स्टैंडर्ड सेबी ने बदले नियम, अब पूंजी जुटाना होगा सरल

इससे बीएसई के प्रमुख आशीष चौहान को दूसरा कार्यकाल खत्म होने पर नंवबर 2022 में पद छोडऩा पड़ सकता है। इस पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 75 साल कर दी गई है। सेबी ने मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट्यूशन के प्रबंधन से जुड़े प्रमुख अधिकारियों की परिभाषा में भी बदलाव किया है, जो सीधे तौर पर प्रबंध निदेशक या गवर्निंग बोर्ड को रिपोर्ट करते हैं। हाल के घटनाक्रम के बाद यह कदम उठाया गया है, जहां वरिष्ठ पदों पर कर्मियों की नियुक्ति हुई, लेकिन इनकी भूमिका परामर्शक की थी ताकि प्रबंधन से जुड़े प्रमुख अधिकारियों के दायरे से ये बाहर रह सकें।

सेबी ने क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लिए न्यूनतम हैसियत की अनिवार्यता में बदलाव किया है और इसे 3 अरब रुपये से एक अरब रुपये कर दिया है, लेकिन इसे जोखिम आधारित बनाया है। इसके अलावा सेबी ने अधिग्रहण संहिता और पुनर्खरीद के नियमों की समीक्षा की ताकि इसकी भाषा को सरल बनाया जा सके, अनावश्यक प्रावधान को हटाया जा सके और इसे नए कंपनी अधिनियम 2013 के मुताबिक बनाया जा सके।

नए नियम में खुली पेशकश की कीमत में इजाफा करने के लिए इसकी निविदा की अवधि की घोषणा से एक दिन पहले तक का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। प्राइम डेटाबेस के संस्थापक पृथ्वी हल्दिया ने कहा, पिछले कुछ सालों में पूंजी बाजार ने काफी बदलाव देखे हैं, जो न सिर्फ नियामकीय मोर्चे पर हुए हैं बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के ढांचे व आकार के हिसाब से भी हुए हैं। नियम काफी जटिल हो गए थे।

बाजार नियामक ने कहा कि वह जल्द ही चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सचिव, कॉस्ट अकाउंटेंट व निगरानी एजेंसियों जैसी इकाइयों को प्रशासित करने के लिए चर्चा पत्र जारी करेगा ताकि इनकी जिम्मेदारियों को प्रतिभूति कानून के दायरे में लाया जा सके। सेबी इन इकाइयों को प्रशासित करने की कोशिश कर रहा है, जो सूचीबद्ध कंपनियों के साथ काम करते हैं जहां अरबों रुपये की सार्वजनिक रकम निवेशित होती है।

शार्दुल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर योगेश चंदे ने कहा, प्रतिभूति कानून के तहत थर्ड पार्टी असाइनमेंट लेने वाली इकाइयों से जुड़े सेबी के विभिन्न नियमों में संशोधन के लिए जारी चर्चा पत्र चौकाने वाले हैं। न्यायिक व अर्धन्यायिक फोरम के सामने ये पारंपरिक रूप से विवादास्पद मसले रहे हैं किक्या इन सेवा प्रदाताओं पर सेबी का न्यायाधिकार क्षेत्र है या नहीं। सेबी ने नैशनल सेंटर फॉर फाइनैंशियल एजुकेशन के गठन की घोषणा की, जो वित्तीय शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां चलाएगा।

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