बिजनेस स्टैंडर्ड - पीएनबी का दावा, नहीं मिला ईमेल
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पीएनबी का दावा, नहीं मिला ईमेल

सोमेश झा / नई दिल्ली June 21, 2018

आरबीआई ने नवंबर, 2016 को भेजा था ईमेल
स्विफ्ट सिस्टम को मजबूत करने की दी थी सलाह
पीएनबी ने नहीं कराया था स्विफ्ट का ऑडिट
धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई कर रही पीएनबी की जांच

बिजनेस स्टैंडर्ड पीएनबी का दावा, नहीं मिला ईमेलपंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने दावा किया है कि उसे नवंबर 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से जारी वह अहम निर्देश नहीं मिला था जिसमें सभी वाणिज्यिक बैंकों को धोखाधड़ी से बचने के लिए अपनी जोखिम व्यवस्था को मजबूत करने को कहा गया था।  केंद्रीय जांच ब्यूरो पीएनबी में 143 अरब रुपये की धोखाधड़ी की जांच कर रहा है। हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी पर इस गबन का आरोप है।

सीबीआई जांच इस बात पर टिकी है कि बैंक ने आरबीआई द्वारा समय-समय पर जारी सुझावों का पालन नहीं किया। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए दस्तावेजों में सीबीआई जांच के दौरान दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिलता है। पीएनबी ने दावा किया कि उसे आरबीआई द्वारा 30 नंवबर, 2016 को भेजा गया अहम ईमेल नहीं मिला। इस गोपनीय ईमेल में केंद्रीय बैंक ने एक सर्वेक्षण के दौरान स्विफ्ट व्यवस्था में पाई गई खामियों के बारे में बताया था। 2016 में कराए गए इस सर्वेक्षण में पीएनबी सहित कई बैंक शामिल थे।

आरबीआई ने एक परिपत्र के जरिये सभी वाणिज्यिक बैंकों के मुख्य कार्यकारियों को स्विफ्ट प्रणाली को मजबूत करने के लिए संबंधित बोर्ड से फरवरी 2017 तक मंजूरी लेने को कहा था। पीएनबी में हुई अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी के केंद्र में स्विफ्ट प्रणाली ही है। आरबीआई ने साथ ही बैंकों को स्विफ्ट के जरिये 1 जनवरी, 2015 से हुए सभी लेनदेन का सत्यापन करने का निर्देश दिया था ताकि खाताबही में इनका हिसाब किताब सुनिश्चित किया जा सके।

अगर पीएनबी ने 2016 में अपनी स्विफ्ट व्यवस्था का ऑडिट कराया होता तो शायद धोखाधड़ी का पहले ही पता चल जाता। बैंक ने इस साल जनवरी में सीबीआई और दूसरी जांच एजेंसियों को 143 अरब रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी दी थी। आरबीआई और पीएनबी ने इस बारे में ईमेल से भेजी प्रश्नावली का जवाब नहीं दिया। दिलचस्प बात है कि सभी अन्य बैंकों ने आरबीआई का ईमेल मिलने की पुष्टि की थी लेकिन पीएनबी इससे अनभिज्ञ था।

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों ने धोखे से बैंक से 143 अरब रुपये का सुरक्षित ऋण हासिल किया था। ये ऋण पीएनबी के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मैसेजिंग सिस्टम स्विफ्ट के जरिये जारी किए थे। 7 साल तक यह धोखाधड़ी पकड़ में नहीं आ सकी क्योंकि स्विफ्ट पीएनबी के कोर बैंकिंग सिस्टम से नहीं जुड़ा था। आरबीआई और पीएनबी के बीच हाल में हुए पत्र व्यवहार के मुताबिक इस साल फरवरी में पीएनबी ने इस बात से इनकार किया कि उसे नवंबर 2016 में कोई परिपत्र मिला था।

पीएनबी के साथ धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद आरबीआई ने 16 फरवरी को सभी बैंकों को एक ईमेल भेजकर उसके द्वारा जारी द्वारा विभिन्न परिपत्रों के बारे में अनुपालन रिपोर्ट मांगी। इस पर पीएनबी के महाप्रबंधक अश्विनी वत्स ने 20 फरवरी को जवाब देते हुए कहा कि बैंक को नवंबर, 2016 का परिपत्र नहीं मिला।

आरबीआई ने फिर पीएनबी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी सुनील मेहता को 7 मार्च को एक पत्र लिखकर नंवबर 2016 के ईमेल डिलिवरी नोटिफिकेशन की प्रतिलिपि भेजी। इस पर पीएनबी ने कहा कि उसे परिपत्र खोलने के लिए पासवर्ड मिला था लेकिन परिपत्र नहीं मिला। जांच के दौरान आरबीआई के महाप्रबंधक पंकज एक्का ने सीबीआई को बताया कि दोनों ईमेल 30 नवंबर को 11 मिनट के अंतराल पर पीएनबी को भेजे गए थे। 

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