बिजनेस स्टैंडर्ड - एएआर नियमों से दोहरे जीएसटी का भय
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 20, 2018 01:45 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

एएआर नियमों से दोहरे जीएसटी का भय

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 06 19, 2018

उलझन बढ़ी

एएआर के समक्ष यह मसला आया था कि रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत क्या आयातक को आईजीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा
आयातक को सीआईएफ मूल्य पर आईजीएसटी का भुगतान करना होगा

बिजनेस स्टैंडर्ड एएआर नियमों से दोहरे जीएसटी का भयअथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएआर) के एक आदेश से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत उन सामानों पर दोहरे कराधान का भय बढ़ गया है, जिनका आयात लागत, बीमा और ढुलाई (सीआईएफ) के आधार पर होता है।  एएआर, उत्तराखंड ने नियम बनाया है कि आयातक सो सीआईएफ वैल्यू और समुद्री माल ढुलाई वाले हिस्से पर भी एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का भुगतान करना होगा।  एएआर के समक्ष यह मसला आया था कि रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत क्या आयातक को आईजीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा, अगर सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्त करने वाले दोनोंं ही भारत के बाहर के हों। सामान्यतया सेवा प्रदाता को को जीएसटी प्रस्तुत करना होता है, लेकिन आरसीएम के तहत खरीदार को भी यह करना पड़ेगा। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि दोहरा कराधान होगी क्योंकि आयातक को सीआईएफ मूल्य पर आईजीएसटी का भुगतान करना होगा।  ईवाई इंडिया में पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि जीएसटी के तहत वस्तुओं के आयात पर कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है, वहीं अन्य सामान जैसे कच्चा तेल का आयात करने वालों को संभवत: रिफंड नहीं मिलेगा और इस तरह से उनकी लागत बढ़ जाएगी।  यह मसला कई अन्य न्यायालयों के समक्ष भी लंबित है। यहां तक कि जीएसटी के इन प्रावधानोंं की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है।

खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'ये मामले विभिन्न न्यायालयों में प्रावधान की संवैधानिक वैधता तय किए जाने को लेकर लंबित हैं, क्योंकि भारतीय आयातक सेवा प्राप्तकर्ता नहीं हैं।'  उन्होने कहा कि वैधानिक प्रावधानों में कहा गया है कि सेवा प्रदाता को भुगतान के लिए जिम्मेदार बताया गया है और इस मामले में आयात करने वाला सेवा प्राप्त कर्ता नहीं है। सीआईएफ फ्री ऑन बोर्ड से अलग है। विक्रेता तब तक सामान की जिम्मेदारी लेता है, जब तक कि वह खास स्थान या खरीदार तक पहुंच नहीं जाता, वहीं वे सामान को भेज देने के बाद जवाबदेह नहीं होते।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बिनानी पर अदालत का फैसला अन्य मामलों के लिए बनेगा नजीर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.