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गिरावट के बाद भी अच्छा प्रतिफल दे रहे छोटे और मझोले शेयर

जयदीप घोष / नई दिल्ली June 19, 2018

मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों के लिए उतार-चढ़ाव वाला समय रहा है। निफ्टी मिड-कैप 100 और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 वर्ष 2018 के शुरू से अब तक 11 प्रतिशत और 16.1 प्रतिशत गिर चुके हैं। इससे कई निवेशकों में ऐसे शेयरों और म्युचुअल फंड योजनाओं में अपने निवेश को लेकर आशंका पैदा हो गई है।  इन तेज गिरावट की कई वजह हैं। इनमें एक यह है कि इन कई शेयरों का मूल्यांकन तेजी से बढ़ गया था। उदाहरण के लिए, इंडियन होटल्स, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, इंडियाबुल्स वेंचर्स और कई अन्य शेयर इस गिरावट के बाद भी 100 गुना के पी/ई अनुपात पर कारोबार कर रहे हैं। निफ्टी मिड-कैप 100 और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 मौजूदा समय में 52.7 गुना और 67.3 गुना के पी/ई पर कारोबार कर रहे हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि लगभग 30 प्रतिशत मिड-कैप शेयर और अन्य सूचकांकों के 18 प्रतिशत शेयर अभी भी तेजी के साथ कारोबार कर रहे हैं। 
 
अन्य कारण म्युचुअल फंड योजनाओं के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पुनर्वर्गीकरण मानक हैं। बाजार नियामक ने पिछले साल अक्टूबर में पुनर्वर्गीकरण दिशा-निर्देशों की पेशकश की थी। हालांकि म्युचुअल फंड उद्योग ने हाल ही में स्वयं की स्थिति में बदलाव शुरू किया है, क्योंकि इस पर अमल के लिए 30 जून की समय-सीमा तेजी से नजदीक आती जा रही है। इन दिशा-निर्देशों के तहत, लार्ज-कैप फंड बड़ी कंपनियों या टॉप-100 कंपनियों में 80 प्रतिशत तक शेयर रख सकते हैं। वहीं मिड-कैप फंडों का मिड-कैप शेयरों में 65 प्रतिशत और मल्टी-कैप फंडों का इक्विटी में 65 प्रतिशत निवेश हो सकता है। एक म्युचुअल फंड के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'काफी हद तक पुनर्वर्गीकरण हो चुका है। लेकिन अगले कुछ सप्ताहों में बिकवाली का अगला दौर देखने को मिलेगा।'
 
लेकिन यह दिलचस्प है कि भारी गिरावट के बावजूद मिड- और स्मॉल-कैप सूचकांकों दोनों ने एक साल की अवधि के दौरान अच्छा प्रतिफल दिया है। इसलिए जिन निवेशकों ने इन दो सेगमेंट में एक साल पहले प्रवेश किया था वे अभी भी फायदे में बने हुए हैं। एक वर्ष की अवधि के दौरान निफ्टी मिड-कैप 100 और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 ने 5.2 प्रतिशत और 2.9 प्रतिशत का प्रतिफल दिया। यदि आप दीर्घावधि पर विचार करें तो हालात इन सेगमेंट (मिड- और स्मॉल-कैप) में भी दीर्घावधि निवेशकों के लिए हालात काफी बेहतर दिखेंगे। इसलिए, ऐसा नहीं है कि निवेशकों वक्रांगी या मनपसंद बेवरिजेज जैसे शेयरों को छोड़कर भारी नुकसान हुआ हो। वक्रांगी और मनपसंद बेवरिजेज के ऑडिटरों ने कंपनियों से जरूरी जानकारी नहीं मिलने की वजह से इस्तीफे दे दिए थे।
 
निवेश विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हालात में दीर्घावधि निवेशकों के लिए मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में कुछ मुनाफावसूली करने के लिए अच्छा समय है। निवेश सलाहकार अरुण केजरीवाल कहते हैं, 'यदि आपके शेयरों में तेजी है तो बिक्री कर कुछ नकदी जुटाने के लिए यह अच्छा समय है। लेकिन जिन लोगों ने देर से निवेश किया है और उनके शेयर नुकसान में चल रहे हैं तो वे निवेश में बने रहें।' हालांकि यह याद रखें कि निवेश से जल्द निकलते हैं तो पूंजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत का कर लगेगा, लेकिन यदि आपको 100,000 रुपये से अधिक का लाभ मिल रहा हो तो बिकवाली कर निकल जाना समझदारी है। 
 
अन्य बाजार विश्लेषकों की भी यही सलाह है। एक फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'जब तक संपूर्ण बाजार परिदृश्य में बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक इनमें से कई शेयरों में गिरावट का कोई कारण नहीं दिख रहा है। इसलिए निवेशकों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।' मिड- और स्मॉल-कैप म्युचुअल फंडों में निवेशकों के लिए सलाह है कि वे फिलहाल इंतजार करें। मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'जब तक पुनर्वर्गीकरण की तारीख (30 जून) तक किसी म्युचुअल फंड योजना में खरीद-बिक्री न करें। इन योजनाओं में होने वाले बदलावों का अंदाजा अभी नहीं लगाया जा सकता। इसलिए स्थिति स्पष्टï होने तक इंतजार करें।'
 
केजरीवाल का मानना है कि दूसरी तरफ, नकदी से संपन्न नए निवेशकों के लिए अवसर बरकरार रहेंगे। उन्होंने कहा, 'इन निवेशकों को अपने शेयरों की पहचान करनी चाहिए और इनमें बड़ी गिरावट पर खरीदारी करनी चाहिए।' निवेश विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अक्सर उन शेयरों या म्युचुअल फंडों को खरीदते हैं जिनमें पहले ही अच्छी तेजी आ चुकी हो। ये निवेशक समझते हैं कि अभी तेजी और आएगी और वे एक साल या इससे कम समय में 50 से 100 प्रतिशत प्रतिफल हासिल कर लेंगे। लेकिन ऐसा शायद ही होता है। मिड- और स्मॉल-कैप शेयर जैसे जोखिमपूर्ण सेगमेंट में निवेश करते हुए भी श्रेष्ठï रणनीति यह है कि अच्छे शेयर खरीदे जाएं। यदि किसी तरह की अल्पावधि समस्याएं दिख रही हों तो इंतजार कर लें। या फिर एसआईपी विकल्प अपनाएं। 
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