बिजनेस स्टैंडर्ड - अंतत: सही कदम
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अंतत: सही कदम

संपादकीय /  June 19, 2018

सोमवार को आईसीआईसीआई बैंक के निदेशक मंडल ने आखिरकार यह उजागर कर ही दिया कि वह बैंक को हिलाकर रख देने वाले आरोपों के बारे में क्या कदम उठाने जा रहा है। बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी चंदा कोछड़ पद पर बनी रहेंगी लेकिन उन्हें मौजूदा जांच के चलने तक छुट्टी पर रहना होगा।  जांच समिति का नेतृत्व जाने माने कानूनविद-जांचकर्ता न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण को सौंपा गया है। यह समिति इस बात का परीक्षण करेगी कि आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन के बीच के मामलों में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं। इस संबंध में हाल के दिनों में चंदा कोछड़ के खिलाफ हितों के टकराव के आरोप लगे हैं। अंतरिम तौर पर बैंक ने एक मुख्य परिचालन अधिकारी तैनात किया है जो कोछड़ की अनुपस्थिति में बोर्ड को रिपोर्ट करेगा। अधिकांश पर्यवेक्षकों का मानना है कि बोर्ड ने आखिरकार सही कदम उठाया है और अगले कुछ महीनों तक बैंक का परिचालन सुरक्षित रहेगा। न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण द्वारा जांच कराने का अनुरोध भी बढिय़ा निर्णय है। 

 
बहरहाल इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने अनिश्चितता को लंबे समय तक कायम रहने दिया। बैंक में उच्चतम स्तर पर ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत पर बहुत पहले ध्यान दिया जाना चाहिए था। ऐसा न करके निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक ने अंशधारकों के हितों की रक्षा के अपने ही दायित्व निर्वहन में चूक की है। बैंक कोछड़ को दोषमुक्त करार देने के लिए कितनी हड़बड़ी में था उसे इस बात से समझा जा सकता है कि उसने मार्च में ही एक वक्तव्य जारी कर दिया था। वह वक्तव्य अस्पष्टता का नमूना था, उसमें जांच के बारे में कुछ भी विस्तार से नहीं बताया गया था कि उसे कैसे अंजाम दिया जाएगा, जांच कौन करेगा और निष्कर्ष किस आधार पर निकाले जाएंगे। 
 
इससे बैंक के बोर्ड की विश्वसनीयता पर बहुत असर पड़ा। तथ्य यह है कि बैंक किसी व्यक्ति से बड़ा है और मौजूदा हालात में बोर्ड को कॉर्पोरेट नेतृत्व का बचाव करता हुआ नहीं नजर आना चाहिए था। यही निर्णय अगर कुछ सप्ताह पहले लिया गया होता तो बहुत बेहतर होता। इसमें भी दो राय नहीं कि चंदा कोछड़ ने जांच की अवधि के लिए अगर खुद अपना पद छोड़ दिया होता तो उनकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाती। दुर्भाग्यवश संकेत यह गया है कि बैंक की सीईओ और बोर्ड दोनों को जनता और निवेशकों का दबाव बनने पर सही कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। इससे उनके भविष्य के निर्णयों को लेकर कोई भरोसा नहीं पैदा होता। 
 
उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड जल्दी ही एक नए चेयरमैन का चयन करेगा क्योंकि मौजूदा चेयरमैन का कार्यकाल इस महीने के अंत में समाप्त हो रहा है। ऐसे में न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण के नेतृत्व वाली जांच को भी प्राथमिकता देकर तेजी से निपटाया जाना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जांच के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। चंदा कोछड़ का कार्यकाल मार्च में समाप्त होना है। अगर बख्शी को उनका उत्तराधिकारी बनाना है तो बैंक को यह बात कह देनी चाहिए और बदलाव की व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। चूंकि जांच की मियाद तय नहीं है ऐसे में चंदा कोछड़ की स्थिति को देखते हुए अगर बोर्ड शीर्ष प्रबंधन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दे तो बेहतर होगा। यह बैंक के जमाकर्ताओं और निवेशकों के भी हित में होगा। बैंक के बहीखातों का भी ध्यान रखना होगा क्योंकि वह फंसे कर्ज के दायरे से बाहर नहीं है। बैंक को जनता को अपने स्थायित्व और संचालन की गुणवत्ता के बारे में आश्वस्त करने में कड़ी मेहनत करनी होगी।
Keyword: ICICI, bank, CBI, Chanda Kochhar,
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