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आईटी फर्मों ने नए निवेश पर लगा रखा है ब्रेक

कृष्ण कांत / मुंबई June 18, 2018

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने नकदी संरक्षण के लिए नए निवेश पर ब्रेक लगा रखा है और ऐसा तब किया गया है जबकि शेयर बाजारों को खुश रखने के लिए शेयर पुनर्खरीद और लाभांश इनका तरजीही जरिया बन गया है। इसके परिणामस्वरूप देश की अग्रणी आईटी कंपनियों ने कई वर्षों में पहली बार अपनी परिसंपत्तियों में गिरावट दर्ज की है। पांच अग्रणी आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा की संयुक्त परिसंपत्तियां 2017-18 के आखिर में घटकर 2,774 अरब रुपये रह गईं जबकि एक साल पहले यह 2,801 अरब रुपये रही थी। 

इसकी तुलना में आईटी क्षेत्र की परिसंपत्तियां वित्त वर्ष 2017 में 15.3 फीसदी बढ़ी और वित्त वर्ष 2012 और वित्त वर्ष 2017 के बीच सालाना 19.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। शेयरों की पुनर्खरीद से इनके शेयरों की कीमतें चढ़ी हैं। इस क्षेत्र का संयुक्त बाजार पूंजीकरण इस साल मार्च के आखिर के मुकाबले 16.9 फीसदी बढ़ा है क्योंकि उच्च पुनर्खरीद कीमत की उम्मीद में निवेशकों की ऊंची बोली से इसकी कीमतें बढ़ी। आईटी कंपनियों के शेयर अभी वित्त वर्ष 2018 के शुद्ध लाभ के 21 गुने पीई पर कारोबार कर रहे हैं, जो तीन साल में इनका सर्वोच्च मूल्यांकन अनुपात है और मार्च 2017 के आखिर के 16.6 गुने के मुकाबले ज्यादा है। 

टीसीएस को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है और मार्च के आखिर के मुकाबले यह 29 फीसदी ऊपर है। शुक्रवार को टीसीएस ने 160 अरब रुपये की शेयर पुनर्खरीद योजना की घोषणा की थी, वहीं नैसडेक में सूचीबद्ध कॉग्निजेंट ने अपना पुनर्खरीद कार्यक्रम साल की तीसरी तिमाही तक पूरा करने की बात कही है, जो पहले साल के आखिर तक होना था। पुनर्खरीद ने इस क्षेत्र को इक्विटी पर अपना रिटर्न बढ़ाने में मदद की है जबकि इनकी आय की रफ्तार कमजोर रही है व मार्जिन सिकुड़ा है। 

तीन साल तक फिसलने के बाद वित्त वर्ष 2018 में नेटवर्थ पर इक्विटी का औसत रिटर्न साल दर साल के हिसाब से 90 आधार अंक ज्यादा रहा। परिचालन मार्जिन में गिरावट हालांकि जारी रही और वित्त वर्ष 2018 में यह 50 आधार अंक फिसला। विप्रो की बैलेंस शीट सबसे ज्यादा सिकुड़ी और वित्त वर्ष 2018 के आखिर में इसकी परिसंपत्तियां 7 फीसदी घटकर 629 अरब रुपये की रही, जो वित्त वर्ष 2017 के आखिर में 677 अरब रुपये रही थी। इस अवधि में इन्फोसिस की परिसंपत्तियां 5.2 फीसदी घटकर 656 अरब रुपये की रह गई जबकि टीसीएस की परिसंपत्तियां 0.6 फीसदी घटकर 875 अरब रुपये की रही। 

हालांकि एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा की परिसंपत्तियों या बैलेंस शीट में इजाफा जारी रहा और वित्त वर्ष 2018 में यह क्रमश: 9.6 फीसदी व 13.7 फीसदी बढ़ा। नैसडेक में सूचीबद्ध कॉग्निजेंट ने भी इस रुख को पलट दिया और कैलेंडर वर्ष 2017 में साल दर साल के हिसाब से परिसंपत्तियों में 21 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की। हालांकि कैलेंडर वर्ष 2017 की यह बढ़त कैलेंडर वर्ष 2016 में कंपनी की परिसंपत्तियों में 4.2 फीसदी की गिरावट के बाद देखने को मिली।

पिछले दो सालों में इन अग्रणी कंपनियों ने शेयरधारकों से 350 अरब रुपये के शेयरों की पुनर्खरीद की है, जिसकी अगुआई टीसीएस ने फरवरी 2017 में 160 अरब रुपये की पुनर्खरीद से की। कंपनी ने एक बार फिर 160 अरब रुपये की पुनर्खरीद का ऐलान किया है और कंपनी को इस महीने यह पूरा होने की उम्मीद है। विप्रो ने दो साल में दो बार 135 अरब रुपये के शेयरों की पुनर्खरीद की है। इन्फोसिस ने कैलेंडर वर्ष 2017 की आखिरी तिमाही में 130 अरब रुपये के शेयरों की पुनर्खरीद की थी। 

इसके अलावा इन कंपनियों ने तीन सालों में संचयी तौर पर 624 अरब रुपये का लाभांश भी दिया। टीसीएस सबसे ज्यादा लाभांश देने वाली कंपनी है और अगला स्थान इन्फोसिस का है।
Keyword: सूचना प्रौद्योगिकी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज, विप्रो, एचसीएल टेक, टेक महि,
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