बिजनेस स्टैंडर्ड - माली हालत देखकर ही खरीदें एनबीएफसी के एनसीडी
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माली हालत देखकर ही खरीदें एनबीएफसी के एनसीडी

संजय कुमार सिंह /  June 17, 2018

गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को बैंकों से रकम जुटाने में अच्छी खासी मुश्किल हो रही है। इक्रा रेटिंग्स मानती है कि इसी कारण एनबीएफसी द्वारा इस वित्त वर्ष में जारी होने वाले गैर परिवर्तनीय ऋणपत्रों की कुल कीमत नया रिकॉर्ड बना सकती है। इससे पहले 2013-14 में इन कंपनियों ने एनसीडी के जरिये 423.83 अरब रुपये जुटाए थे, जो अभी तक एक वित्त वर्ष में एनसीडी से जुटने वाली रकम के मामले में रिकॉर्ड है। पिछले कुछ समय में ऐसे कई निर्गम जारी किए गए हैं, जो 9 फीसदी या उससे ज्यादा प्रतिफल दे रहे हैं, इसीलिए निवेशक इन एनसीडी को भी हाथोहाथ ले सकते हैं। लेकिन निवेश करने से पहले उन्हें अच्छी तरह से छानबीन कर लेनी चाहिए।

 
प्रतिफल पर तो कोई भी निवेशक सबसे पहले नजर डालता है। लेकिन उसके बाद एनसीडी जारी करने वाली एनबीएफसी की साख पर ध्यान देना चाहिए। सेबी से पंजीकृत निवेश सलाहकार फर्म पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'मैं ऐसी किसी कंपनी में रकम लगाने को तैयार नहीं हूं, जिसकी रेटिंग एएए से कम हो। लेकिन अगर आप ज्यादा प्रतिफल हासिल करने के लिए थोड़ा जोखिम उठाने से परहेज नहीं करते हैं तो आप एए रेटिंग वाली कंपनी में भी निवेश कर सकते हैं।' सबसे बेहतर साख वाले एनसीडी में ही निवेश करने की जिद के पीछे उनकी वजह यह है कि भारत में साख यानी क्रेडिट की रेटिंग एक ही झटके में बहुत नीचे जा सकती है। राघव कहते हैं कि कई म्युचुअल फंड कंपनियां भी एनसीडी में निवेश करती हैं, इसलिए एनसीडी में निवेश करने का दूसरा रास्ता है क्रेडिट रिस्क फंड में रकम लगाना। ये फंड एए से कम रेटिंग वाले एनसीडी में भी रकम लगाते हैं, लेकिन वे काफी ठोकने-बजाने यानी शोध करने के बाद ही ऐसा जोखिम उठाते हैं। राघव प्रतिष्ठिïत आवास ऋण कंपनियों (एचएफसी) के एनसीडी में निवेश करने की भी सलाह देते हैं। उनकी राय है, 'चूंकि आवास ऋण के भुगतान में चूक बहुत कम होती है, इसलिए नामी-गिरामी आवास ऋण कंपनियों के एनसीडी में चूक यानी डिफॉल्ट होने की आशंका भी बहुत कम होती है।' साथ ही वह ऐसी स्थापित कंपनियों के एनसीडी में ही निवेश करने की सलाह देते हैं, जो मानती हैं कि डिफॉल्ट करने उनकी प्रतिष्ठïा पर बहुत बड़ा बट्टïा लग जाएगा।
 
एक और बात का ध्यान रखें। निवेश के समय और उसके बाद भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर बारीक नजर बनाए रखें। इसमें भी कंपनी पर चढ़े कर्ज के स्तर पर खास ध्यान दीजिए। मुंबई के वित्तीय योजनाकार अर्णव पांड्या कहते हैं, 'कोई कंपनी आज आप से 9 फीसदी से अधिक प्रतिफल का वायदा कर सकती है, लेकिन कुछ साल बाद अगर उसकी वित्तीय स्थिति चरमरा गई तो प्रतिफल तो छोडि़ए आपकी पूंजी भी डूब सकती है।' उनकी राय में किसी भी कंपनी के गैर परिवर्तनीय ऋणपत्रों में तीन से पांच साल के लिए ही रकम लगानी चाहिए। उससे ज्यादा समय के लिए निवेश करना समझदारी की बात नहीं है। वह कहते हैं, 'अगर कुछ साल बाद कंपनी की माली हालत पतली होती है तो आप भी मुश्किल में फंस सकते हैं।' कंपनी आपको प्रतिफल की जो भी दर बताती है, वह चक्रवृद्घि दर ही होनी चाहिए। राघव कहते हैं, 'कई बार कंपनियां आपको ऊंचा प्रतिफल देने का वायदा तो करती हैं, लेकिन उनका गणित धोखाधड़ी भरा होता है।' मान लीजिए कि आपने 1 लाख रुपये का निवेश किया है और पांच साल के बाद आपको 1,53,862 रुपये वापस मिलते हैं। इस हिसाब से आपको 9 फीसदी चक्रवृद्घि दर पर ही प्रतिफल मिला है। लेकिन कंपनी कह सकती है कि 10.77 फीसदी प्रतिफल दे रही है। इसमें खेल यह है कि आपको मिले साधारण ब्याज 53,862 रुपये को पांच (निवेश की अवधि पांच साल) से भाग दे दिया जाता है। ऐसे में साधारण ब्याज की दर 10.77 फीसदी ही बैठती है। ऐसी तिकड़मों में नहीं फंसना चाहिए। 
 
एनसीडी में मासिक, तिमाही, छमाही और वार्षिक भुगतान के विकल्प मौजूद हैं। पांड्या कहते हैं, 'यदि आप लंबे-लंबे अंतराल पर अपना भुगतान लेते हैं तो चक्रवृद्घि प्रभाव के कारण आपको मिलने वाले प्रतिफल की दर ज्यादा होगी।' मगर एनसीडी के ऊंचे प्रतिफल को देखकर अपने डेट पोर्टफोलियो को इन्हीं से न भर लें। पांड्या की सलाह है, 'चूंकि इन कंपनियों को ऋण देने में जोखिम बहुत अधिक होता है, इसीलिए इन्हें कम ब्याज दर पर बाजार से उधार नहीं मिल पाता। इसी कारण ये ऊंचे प्रतिफल की बात करती हैं। लेकिन ऋण जोखिम के कारण आपको अपने डेट पोर्टफोलियो में इनकी हिस्सेदारी 15-20 फीसदी से अधिक नहीं रखनी चाहिए।'
 
आखिर में उपलब्ध विकल्पों पर भी ठीक से विचार करें। बैंक सावधि जमा (एफडी) की ब्याज दरें बढ़ रही हैं। तीन वर्ष की एफडी पर भारतीय स्टेट बैंक आज 6.70 फीसदी की दर से ब्याज दे रहा है, लेकिन डीसीबी जैसे कुछ बैंक इसी अवधि की एफडी पर 7.75 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। साथ ही एनसीडी पर आपको ब्याज के रूप में जो आय होगी, उस पर आपको सीमांत दर से कर चुकाना होगा। राघव कहते हैं, 'अगर किसी व्यक्ति को नियमित आय की जरूरत नहीं है तो डेट फंड में रकम लगाना उसके लिए बेहतर होगा क्योंकि वहां तीन वर्ष के बाद ही वह इंडेक्सेशन लाभ हासिल करने के योग्य हो जाएगा।' 
 
भारत सरकार का बचत बॉन्ड भी अच्छा विकल्प है क्योंकि उसमें भी 7.75 फीसदी प्रतिफल मिलता है। बुजुर्गों के लिए अच्छा होगा कि वे वरिष्ठï नागरिक बचत योजना को तरजीह दें क्योंकि उसमें 8.3 फीसदी प्रतिफल हासिल होता है और धारा 80 सी के तहत कर लाभ भी मिलता है। उनके लिए 8 से 8.3 फीसदी प्रतिफल देने वाली प्रधानमंत्री वय वंदना योजना का भी विकल्प है। सबसे बड़ी बात है कि सरकार की इन योजनाओं में डिफॉल्ट यानी रकम डूबने की कोई गुंजाइश ही नहीं होती।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NBFC,,
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