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लघु वित्त बैंकों में और आएगी तेजी, मगर कितनी

श्रीपद एस आटे /  June 17, 2018

लघु बैंकों में तब्दील हुईं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में निवेशक काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं। उज्जीवन फाइनैंशियल सर्विसेस, एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक और इक्विटास होल्डिंग्स के शेयरों में पिछले तीन महीने के दौरान 11 से 20 प्रतिशत तक की तेजी आई है। मार्च तिमाही में मजबूत प्रदर्शन और संभावनाएं दुरस्त होने से इन शेयरों के प्रति निवेशकों का उत्साह खासा बढ़ा है। विश्लेषकों को लगता है कि इन शेयरों की कीमतों में आगे भी तेजी आ सकती है। दिसंबर 2017 तक नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और ऋण माफी आदि से नए लघु वित्त बैंकों (एसएफ बी) पर असर पड़ा था। हालांकि मार्च तिमाही में प्रदर्शन सुधरने से इनके मुनाफे में वित्त वर्ष 2018 में मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो एक अच्छा संकेत है। इस प्रदर्शन के बाद इन बैंकों के तेजी से आगे बढऩे की उम्मीद है, जिससे इनके प्रति निवेशकों के उत्साह का पता चलता है। 

 
ब्रोकिंग कंपनी निर्मल बांग में विश्लेषक मनीष ओसवाल ने कहा, 'ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और अब जीएसटी का असर समाप्त होने से लघु बैंक ग्राहक जुटाने और उत्पादों की क्रॉस-सेलिंग (मौजूदा ग्राहकों को अतिरिक्त वित्तीय ोजनाओं की बिक्री) पर ध्यान देंगे। इससे इनके ऋण खातों, खुदरा जमा और गैर-ऋण फीस इनकम में इजाफा होगा।' मिसाल के तौर पर वित्त वर्ष 2019 में इनके ऋण खाते में 25 से 38 प्रतिशत इजाफा होने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक हालात सुधरने और कस्बाई क्षेत्रों में लोगों की जेब भरने से इन बैंकों को कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
 
जमा योजनाओं में बदलाव से ऐसे समय में आय बढ़ेगी जब दूसरी वित्त कंपनियां ब्याज दरों में तेजी और बॉन्ड पर प्राप्तियां बढऩे से प्रभावित हो सकती हैं। बैंकों में तब्दील होने के बाद इनकी कम ब्याज देनदारी वाली जमाओं में तेजी से इजाफा हुआ है, जिससे रकम के महंगे स्रोतों की हिस्सेदारी कम हो गई है। उदाहरण के लिए उज्जीवन में बैंक ऋण या डिबेंचर की हिस्सेदारी मार्च अंत तक कम होकर 25 प्रतिशत रह गई थी, जो एक साल पहले 75 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2017 के 10.5 प्रतिशत के मुकाबले उधारी पर औसत लागत मार्च 2018 तिमाही में 9.4 प्रतिशत रह गई।
 
ये बैंक  अपने चालू एवं बचत खाते भी तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज में सहायक उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता कहते हैं, 'ये खाते जमा रकम के सबसे सस्ते स्रोत होते हैं। हालांकि इनके साथ एक खामी भी है। सस्ती खुदरा जमा रकम तक पहुंच से एसएफबी को कमाई बढ़ाने में मदद मिलेगी, हालांकि इन बैंकों को खर्च एवं आय का अनुपात नियंत्रित करना होगा। शाखा विस्तार और बैंकिंग ढांचे में निवेश से इनका खर्च बढ़ सकता है। कुछ लोगों की नजर में गैर-सूक्ष्म वित्त ग्राहकों को ऋण आवंटित करने से इन लघु बैंकों को फायदा होगा, जबकि कुछ लोग इसे लेकर उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि सूक्ष्म-वित्त ऋण कारोबारी ऋण के मुकाबले अधिक प्रतिफल देते हैं। अगर ये बैंक गैर-सूक्ष्म ऋणों के मद में आवंटन बढ़ाते तो उस स्थिति में देखने वाली बात यह होगी कि परिसंपत्ति मिश्रण किस तरह मार्जिन पर असर डालता है।
 
इन बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। सामान्य मॉनसून के अनुमान और ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी बढऩे से ऋण वसूली में तेजी से वित्त वर्ष 2019 में परिसंपत्ति गुणवत्ता में और अधिक सुधार दिखना चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए कई विश्लेषक एसएफबी के शेयरों को लेकर उत्साहित हैं। उन्हें इनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में 10 से 17 प्रतिशत सुधार की उम्मीद है। हालांकि कुछ खास मामलों में इनके शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन से बढ़त सीमित रह सकती है। उदाहरण के लिए एयू बैंक का शेयर इसके वित्त वर्ष 2019 के बुक वैल्यू के सात गुना ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है। लिहाजा, शेयरों में गिरावट निवेशकों के लिए रकम लगाने का अच्छा अवसर हो सकता है।  
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NBFC,,
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