बिजनेस स्टैंडर्ड - हर महीने सरकार के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन करेगा विपक्ष
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हर महीने सरकार के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन करेगा विपक्ष

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली June 17, 2018

कांग्रेस शामिल हो या नहीं, शेष विपक्षी दलों ने एकता दिखाने के लिए हर महीने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ एक प्रदर्शन करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) की लड़ाई में शनिवार शाम को 4 मुख्यमंत्रियों की ओर से मिला समर्थन मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष की एकता प्रदर्शन का एक हिस्सा था।  इसके पहले इस तरह का प्रदर्शन जनता दल सेकुलर के नेता एचडी कुमारस्वामी के कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान 23 मई को हुा था। उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी में आधे अधूरे मन से विपक्ष साथ आया था। 
 
कांग्रेस पार्टी ने जहां हाल के विपक्षी एकता के प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया है, वहीं चिर प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी एक साथ आ गए हैं। शनिवार शाम को केरल के मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनरई विजयन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्ती और कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर केंद्र सरकार से अपील की कि आप सरकार और नौकरशाही के बीच गतिरोध खत्म किया जाना चाहिए। 
 
रविवार को वाम दलों के नेता व कार्यकर्ता आप के प्रधानमंत्री कार्यालय तक जाने वाले मार्च में शामिल हुए। पदयात्रा में शामिल माकपा के प्रमुख सीताराम येचुरी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि विपक्ष की एकता साझी विरासत बचाओ अभियान की कवादयों को बहाल करने की कवायद है।  कृषि संकट, पेट्रोल व डीजल के दाम में तेज बढ़ोतरी, नौकरियां न मिलने जैसे जनता से जुड़े मसलों पर राज्य की राजधानियों में साझा विरोध प्रदर्शन भी किया जा सकता है। रविवार को नीति आयोग की संचालन परिषद की चौथी बैठक के पहले 4 मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। बनर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि दिल्ली सरकार की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। बनर्जी ने कहा कि दिल्ली में चल रहे संकट को लेकर मांग रखी गई तो प्रधानमंत्री ने इसके उत्तर में कुछ भी नहींं कहा।
 
कांग्रेस रविवार के प्रदर्शन से भी दूर रही। कांग्रेस के दो मुख्यमंत्रियों, पंजाब के अमरिंदर सिंह और पुदुच्चेरी के वी नारायणसामी ने 4 मुख्यमंत्रियों की प्रधानमंत्री से की गई अपील में हिस्सा नहीं लिया।  बहरहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन, जो कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी हैं, आप के समर्थन में आए। सोरन ने कहा, 'दिल्ली में जो हो रहा है, वह निश्चित रूप से संवैधानिक मानकों का उल्लंघन और देश के संघीय ढांचे के विपरीत है।' बिहार में कांग्रेस के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल ने भी आप का समर्थन किया है।
 
साझी विरासत बचाओ अभियान पिछले साल जनता दल यूनाइटेड से नाराज नेता शरद यादव ने शुरू किया था। उन्होंने पहली बैठक अगस्त में दिल्ली में की, उसके बाद उन्होंने मुंबई, इंदौर व जयपुर में बैठकें की। इस बैठक में सभी प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए थे।  
 
केंद्र व राज्यों के चुनाव साथ कराने के मसले पर व्यापक बहस के पक्ष में प्रधानमंत्री
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने पर आज व्यापक चर्चा कराने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा होने पर आर्थिक बचत होगी। कुछ समय से केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने के विचार पर गौर कर रही है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने के मुद्दे पर इस बात को ध्यान में रखते हुए चर्चा का आह्वान किया कि ऐसा होने पर आर्थिक बचत होगी और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा। 
 
नीति आयोग ने पिछले साल वर्ष 2024 से लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराने का सुझाव दिया था ताकि चुनाव प्रचार मोड की वजह से प्रशासन में व्यवधान कम से कम हो सके। बैठक में अपने संबोधन के समापन में मोदी ने यह भी कहा कि भारत में कृषि के क्षेत्र में कंपनियों द्वारा निवेश बहुत ही कम है। उन्होंने राज्य सरकारों से कृषि के क्षेत्र में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतियां बनाने का अनुरोध भी किया। अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर मोदी ने कहा कि दुनिया को अपेक्षा है कि भारत जल्द ही पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने राज्यों को प्रोत्साहित किया कि वे वित्त आयोग को बेहतर सुझाव दें कि किस प्रकार से परिणामोन्मुख निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है और खर्चों में सुधार किया जा सकता है।                           
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