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घाटे वाली कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2018 सबसे खराब

कृष्ण कांत / मुंबई June 15, 2018

भारतीय कंपनी जगत के प्रदर्शन पर नुकसान उठाने वाली कंपनियों का असर पड़ा और 1,794 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 2017-18 में 4.42 लाख करोड़ रुपये रहा। साल के दौरान 344 कंपनियों ने संयुक्त रूप से 1.8 लाख करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया, जो 2016-17 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा है और यह एक दशक में सबसे ज्यादा है। लाल निशान वाली कंपनियों ने पिछले पांच सालों में संचयी तौर पर 4.85 लाख करोड़ रुपये गंवाए। इसकी तीन चौथाई रकम इन्होंने पिछले तीन साल में गंवाए। 
 
सामान्य अवधारणा के उलट ये सभी नुकसान सरकारी बैंकों व अन्य कॉरपोरेट लेनदारों के संचयी फंसे कर्ज के चलते नहीं हुए हैं। सूचीबद्ध बैंकों की हिस्सेदारी 2017-18 के दौरान संयुक्त रूप से कंपनियोंं के नुकसान में आधी से कम रही (850 अरब रुपये)। कंपनियों का संयुक्त नुकसान (बैंकों को छोड़कर) 2017-18 के दौरान करीब 50 फीसदी बढ़कर 946 अरब रुपये पर पहुंच गया, जो एक साल पहले 650 अरब रुपये रहा था। नमूने में शामिल कंपनियोंं के संयुक्त राजस्व में नुकसान उठाने वाली कंपनियों की हिस्सेदारी 14 फीसदी रही जबकि कॉरपोरेट वेतन व पारिश्रमिक में 17 फीसदी और ब्याज भुगतान में 50 फीसदी हिस्सेदारी रही।
 
यह विश्लेषण विभिन्न क्षेत्रों की 1,794 कंपनियों के 10 साल के वार्षिक वित्तीय आंकड़ों पर आधारित है। इससे उन कंपनियों को अलग रखा गया है जिनका सालाना राजस्व 2017-18 में 0.25 अरब रुपये से कम था। इस नमूने को होल्डिंग कंपनियों की सूचीबद्ध सहायक के लिए भी समायोजित किया गया है। कुल मिलाकर नमूने में शामिल कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 2017-18 में 4.42 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले के 4.56 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 5 फीसदी कम है। अगर नुकसान उठाने वाली कंपनियोंं को अलग कर दिया जाता तो भारतीय कंपनी जगत का शुद्ध लाभ 2016-17 में साल दर साल के हिसाब से 40 फीसदी बढ़ता। 
 
भारतीय कंपनी जगत का शुद्ध लाभ पिछले चार सालों में से तीन साल घटा है। 2017-18 में बड़ा घाटा दर्ज करने वाली प्रमुख कंपनियों में रिलायंस कम्युनिकेशंस (239 अरब रुपये), टाटा टेली महाराष्ट्र (98.4 अरब रुपये), पंजाब नैशनल बैंक (1.21 अरब रुपये), आईडीबीआई बैंक (81.3 अरब रुपये) और आइडिया सेल्युलर (41.7 अरब रुपये) शामिल हैं। दिवालिया समाधान वाली कंपनियों में से कई मसलन वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज (2016-17 में 27.1 अरब रुपये का नुकसान), भूषण स्टील (2016-17 में 36.2 अरब रुपये का नुकसान) और आलोक इंडस्ट्रीज (30.8 अरब रुपये का नुकसान) ने 2017-18 के वित्तीय नतीजे घोषित नहीं किए हैं। 
 
विश्लेषकों ने कहा, आय में बढ़त की रफ्तार के लिहाज से यह साल दशक का सबसे खराब साल रहा और इस दौरान खास तौर से गहन पूंजी वाली, निवेश व विदेशी व्यापार से जुड़े क्षेत्रों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, कंपनियोंं की आय कभी भी साल 2008 के लीमन संकट के स्तर से पूरी तरह सुधर नहीं पाई। हाल के वर्षों में नोटबंदी व जीएसटी के क्रियान्वयन से पैदा हुए आर्थिक गतिरोध से यह और बढ़ा। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, रिलायंस जियो की तरफ से शुरू हुए टैरिफ वॉर ने ज्यादातर दूरसंचार कंपनियां वित्तीय रूप से अव्यावहारिक बना दिया। ज्यादातर पुरानी कंपनियां अब नुकसान दर्ज कर रही हैं। चार सूचीबद्ध दूरसंचार कंपनियों रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा टेली महाराष्ट्र, आइडिया सेल्युलर और एमटीएनएल ने शुद्ध स्तर पर 400 अरब रुपये से ज्यादा गंवाए।
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