बिजनेस स्टैंडर्ड - साफ-सुथरी छवि और कानूनी विशेषज्ञता ने दिलाई लोकप्रियता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, June 17, 2019 06:37 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

साफ-सुथरी छवि और कानूनी विशेषज्ञता ने दिलाई लोकप्रियता

पवन लाल /  June 15, 2018

एक बार फिर से मुंबई के माटुंगा इलाके से ताल्लुक रखने वाले 77 वर्षीय सेवानिवृत्त न्यायाधीश बेल्लूर नारायणस्वामी श्रीकृष्ण सुर्खियों में होंगे और अब उन पर निगाहें टिकी होंगी। इसकी वजह यह है कि आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक चंदा कोछड़ के खिलाफ वित्तीय लेन-देन में हितों के टकराव और उद्योगपतियों के साथ परस्पर लेन-देन पर आधारित सांठ-गांठ के आरोपों की स्वतंत्र जांचकर्ता के तौर पर पड़ताल की जिम्मेदारी उन्हें भी दी गई है जिसमें उनके पति दीपक कोछड़ भी शामिल रहे हैं। इन आरोपों की जांच के लिए गठित बी एन श्रीकृष्ण समिति को इस मामले में विभिन्न पक्षों से मदद लेनी होगी।

 
वह आईसीआईसीआई-कोछड़ मसले को प्रत्यक्ष तौर पर किस तरह से देखते हैं, इस सवाल के जवाब में श्रीकृष्ण कहते हैं, 'अभी इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि अभी तो यह मामला मेरे पास आया ही है, इसलिए इस पर अभी मेरी कोई राय नहीं हो सकती है।' हालांकि वह यह जरूर कहते हैं कि डेटा सुरक्षा और निजता का मसौदा तैयार करने से जुड़ी समिति एक-दो हफ्ते में अपना काम पूरा कर लेगी जिसके वह अध्यक्ष हैं। इसके बाद आईसीआईसीआई से जुड़े मुद्दे पर काम शुरू होगा। डेटा सुरक्षा मुद्दे के परिणाम का व्यापक असर नागरिकों की सुरक्षा और फेसबुक तथा गूगल जैसी कंपनियों एवं भारत में उनके कारोबार पर पड़ सकता है। 
 
आखिर उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक और कोछड़ के मामले की पड़ताल के लिए हामी क्यों भरी? इस पर वह कहते हैं कि उन्हें जिस किसी मामले की जिम्मेदारी दी जाती है, वह उसे एक चुनौती की तरह लेते हैं और उससे पीछे नहीं हटते अगर वह उचित है। वह कहते हैं कि आईसीआईसीआई बैंक का मुद्दा 'बेहद अहम' है लेकिन वह इस बात का अंदाजा देने से साफ इनकार करते हैं कि इस मामले में जांच कब तक पूरी होगी। स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखने वाले उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को अन्य वकील बेहद अच्छे और ईमानदार व्यक्ति के तौर पर याद करते हैं। श्रीकृष्णा अपने जवाब में कहते हैं, 'आपका अनुमान भी मेरे अनुमान जितना ही सही है।' 
 
कन्नड़ परिवार से ताल्लुक रखने वाले श्रीकृष्णा अपने परिवार की दूसरी पीढ़ी के कानूनविद् हैं। उन्होंने अपनी शुरुआत श्रमिक मामलों का मुकदमा लडऩे वाले वकील के तौर पर की थी। उन दिनों वह बंबई उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस किया करते थे और वहां से उन्होंने अपनी एक विरासत तैयार की। वर्ष 1991 में उनकी पदोन्नति हुई और वह बंबई उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बन गए। लेकिन उन्होंने दक्षिणी मुंबई में न्यायाधीशों के लिए आरक्षित आधिकारिक आवास के बजाय माटुंगा में अपने घर में ही रहने का फैसला किया। 
 
श्रीकृष्णा की आईसीआईसीआई मामले में नियुक्ति को हाल तक काफी गोपनीय रखा गया था लेकिन इससे कोई हैरानी नहीं हुई। श्रीकृष्ण के परिचित मुंबई के एक वकील निखिल साखरडांडे कहते हैं, 'वह बेहद जमीनी और बुद्धिमान व्यक्ति हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सभी लोग उनके बारे में अच्छा ही बोलते हैं।' कॉरपोरेट कानून में वकील के तौर पर विशेषज्ञता हासिल करने वाले श्रीकृष्ण की लोकप्रियता को छोड़ भी दें तो उनके चयन की एक प्रमुख वजह 2013 में वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार समिति (एफएसएलआरसी) का अध्यक्ष रहना भी है। एफएसएलआरसी ने वित्तीय क्षेत्र के नियामकीय ढांचे में व्यापक सुधार का सुझाव दिया था जिनमें ज्यादातर मौजूदा कानूनों को खत्म कर भारतीय वित्तीय संहिता बनाने, शेयर, पेंशन, बीमा और जिंस बाजार के लिए एक नियामक बनाने पर जोर दिया गया था। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय ढांचे की समीक्षा करने का सुझाव भी शामिल है। वर्ष 2017 में उन्होंने उस 10 सदस्यीय समिति का नेतृत्व किया जिसने व्यावसायिक विवादों का तेजी से समाधान निकालने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सांस्थानिक पंचाट को बढ़ावा देने की सिफारिशें केंद्रीय कानून मंत्रालय को दी थीं ताकि देश को मध्यस्थता का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाया जा सके। 
 
श्रीकृष्ण को एक सुसंस्कृत लेकिन आध्यात्मिक व्यक्ति बताया जाता है और उन्होंने कई अहम फैसले सुनाए हैं जिनमें मारिशस संधि से जुड़ा दोहरे कराधान का मामला, 1991 का मीनू बलसारा बनाम भारत सरकार मामला और सरकारी परिसरों में रहने वाले निवासियों के किराया नियंत्रण कानून की सुरक्षा से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के शहरी विकास मंत्री मनोहर जोशी के खिलाफ अवैध निर्माण के मामले से जुड़ा फैसला भी अहम था जिसे उनके दामाद ने पुणे में कराया था। इसके अलावा भी कई राष्ट्रीय स्तर के ज्वलंत मुद्दों पर बनी कई समितियों का नेतृत्व भी उन्होंने किया है। 
 
पूर्व न्यायाधीश श्रीकृष्ण के नेतृत्व में गठित एक जांच आयोग ने 1992-93 में मुंबई में हुए दंगों की जांच भी थी जिससे राज्य में काफी अशांति का माहौल बन गया था जो अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस का नतीजा था। हालांकि जांच की सिफारिशों पर कानूनन अमल नहीं किया गया। 2010 के आखिर में आंध्रप्रदेश से जुड़ी परामर्श समिति की अध्यक्षता श्रीकृष्ण ने की थी जिसके तहत तेलंगाना के लिए अलग राज्य बनाने की मांग का मूल्यांकन किया गया था।  कानूनी मामलों में महारत हासिल करने के साथ ही वह कई भाषाओं में प्रवीण हैं। वह तमिल, तेलुगू, संस्कृत, मलयालम, मराठी और अपनी मातृभाषा कन्नड़ में दक्ष हैं। उन्हें बांग्ला भाषा में भी कोई दिक्कत नहीं होती। श्रीकृष्ण बड़ी चतुराई से कहते हैं, 'आप कितनी ही भाषाएं बोल लें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, अहम बात यह है कि आप जो कहते हैं उसे दूसरे लोग समझ जाएं।'
Keyword: ICICI, bank, CBI, Chanda Kochhar,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नई लोकसभा में सुचारु रूप से हो पाएगा कामकाज?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.