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धीमी रफ्तार, सफर का लंबा इंतजार

शाइन जैकब / नई दिल्ली June 15, 2018

कहा जाता है कि समय किसी का इंतजार नहीं करता लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय रेलवे में सफर करने वालों के लिए ट्रेनों का इंतजार करना उनकी नियति बन गया है। उद्योग की रिपोर्टों के मुताबिक पिछले 3 महीने में सभी ट्रेनों में देरी का औसत समय 53 मिनट है जबकि 3 जून को खत्म हुए सप्ताह में ट्रेनों के समय पर चलने की औसत दर गिरकर 65 फीसदी रह गई है। लेकिन बहुत यात्री इस बात से अनभिज्ञ है कि उनकी ट्रेन क्यों देर से चल रही है।

 रेलवे बोर्ड में यातायात सदस्य मोहम्मद जमशेद के मुताबिक रेलवे में गति अवरोधकों की संख्या पिछले साल 2,500 थी जो अब 4,200 पहुंच गई है। डेटा एनालिसिस प्लेटफॉर्म रेलयात्री द्वारा तैयार राष्ट्रीय ट्रेन देरी सूचकांक के मुताबिक 2016 की तुलना में 2017 में सभी ट्रेनों में देरी का औसत करीब 20 फीसदी बढ़ा है। 2016 में यह 45 मिनट था जबकि 2017 में 53 मिनट पहुंच गया।

देरी का कारण क्या है?

अभी केवल यात्री गाडिय़ों की ही समयसारिणी है। रेलवे मालगाडिय़ों के लिए परंपरागत तरीका अपनाता है जिन्हें मेल-एक्सप्रेस को रास्ता देना होता है। हालांकि अधिकांश गाडिय़ां 100 किमी प्रति घंटे से ऊपर की रफ्तार से चल रही हैं लकिन अप्रैल में औसत रफ्तार 44 किमी प्रति घंटे रही।  किसी ट्रेन की समयसारणी बनाते समय रेलवे देरी के सभी पहलुओं को ध्यान में रखता है। इसमें डीजल से इलेक्ट्रिक इंजन लगाने, लोकोमोटिव बदलने, चालक दल में बदलाव और धुलाई के कारण होने वाली देर शामिल है।

साथ ही मरम्मत के कारण होने वाली देरी को भी ध्यान में रखा जाता है। ट्रेन को साथ ही अनिवार्य सुरक्षा जांच के लिए अपने गंतव्य पर रहना पड़ता है। जमशेद ने कहा, 'समयसारणी में व्यस्तता के पहलू को शामिल नहीं किया जाता है। हमारे कई मार्ग 130 फीसदी और 150 फीसदी तक व्यस्त हैं। करीब 60 फीसदी ट्रैक का 100 फीसदी से अधिक इस्तेमाल हो रहा है।'

रेलयात्री के पिछले 3 महीने के आंकड़ों के मुताबिक हावड़ा- पटना के बीच औसत देरी 253 मिनट, दिल्ली-डिब्रूगढ़ में 232 मिनट, मुंबई-अमृतसर में करीब 62 मिनट और मुंबई-दिल्ली के बीच करीब 16 मिनट रही। अप्रैल में लोको के खराब होने और डिब्बों के पटरी से उतरने की घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले क्रमश: 416 फीसदी और 313 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। लेकिन ट्रेनों के देरी से चलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि अभी कई मार्गों पर मरम्मत का काम चल रहा है। इसके कारण ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक ट्रेनों के समय पर चलने के मामले में हावड़ा डिवीजन का प्रदर्शन 34 फीसदी के साथ सबसे बदतर है। इसके बाद लखनऊ डिवीजन (39 फीसदी) का स्थान है। जहां तक मंडल का सवाल है तो इस मामले में दक्षिण पूर्व मध्य का प्रदर्शन सबसे बदतर है। वहां केवल 43.8 फीसदी ट्रेनें ही समय पर चलती हैं।

रेलयात्री के मुख्य कार्याधिकारी और सह संस्थापक मनीष राठी ने कहा कि इस दौर में समय की बहुत कीमत है और ऐसी स्थिति में ट्रेनों का समय पर नहीं चलना सही नहीं है। हमारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में ट्रेनों में देरी के समय में लगातार बढ़ोतरी हुई है जिससे करीब सभी स्टेशनों पर यात्री प्रभावित हुए हैं। 

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