बिजनेस स्टैंडर्ड - आखिर इस्तीफे क्यों दे रहे हैं अंकेक्षक?
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, October 21, 2018 04:32 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

आखिर इस्तीफे क्यों दे रहे हैं अंकेक्षक?

श्यामल मजूमदार /  June 13, 2018

ऐसा लग रहा है कि अंकेक्षक अब अपनी भूमिका को गंभीरता से लेने लगे हैं। इस वर्ष केवल पांच महीने में 32 फर्मों ने कामकाज के बीच में ही अंकेक्षक के रूप में काम करने से इनकार कर दिया या इस्तीफा दे दिया। विस्तार से बता रहे हैं श्यामल मजूमदार 

 
ऐसा लग रहा है कि आखिरकार अंकेक्षक अपनी भूमिका को गंभीरता से लेने लगे हैं। उनकी हालिया आक्रामकता इस बात की गवाह है। प्राइट डेटाबेस द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष केवल पांच महीने में 32 फर्मों ने कार्यावधि के दौरान ही अंकेक्षक के रूप में काम करने से इनकार कर दिया या इस्तीफा दे दिया। बीते एक महीने में ही 15 फर्मों ने ऐसा किया। यह बीते वर्षों की तुलना में बहुत बड़ा बदलाव है।  बीते कुछ सप्ताह में तीन कंपनियों के अंकेक्षकों ने तिमाही नतीजों के ऐन पहले अचानक इस्तीफा दे दिया। डेलॉयट ने जहां मनपसंद बेवरिजेज के काम से इस्तीफा दिया तो वहीं प्राइस वाटरहाउस (पीडब्ल्यू) ने अटलांटा और वक्रांगी से कुछ ही दिनों के भीतर इस्तीफा दे दिया। इन इस्तीफों की वजह कमोबेश एक सी थीं: प्रबंधन द्वारा समय पर जरूरी प्रासंगिक जानकारी मुहैया नहीं करा पाना। इसके बाद इन सभी कंपनियों के शेयरों के दाम बहुत तेजी से गिरे हैं। 
 
जाहिर है यह निवेशकों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। 27 अप्रैल को जिस दिन पीडब्ल्यू ने वक्रांगी के अंकेक्षण का काम छोड़ा, उस दिन से अब तक कंपनी के शेयरों की कीमत दो तिहाई तक लुढ़क गई है। डेलॉयट के इस्तीफे के बाद मनपसंद के शेयर भी आधे से अधिक गिर चुके हैं।  कंपनियों द्वारा कथित तौर पर गलत तौर तरीके अपनाए जाने के बाद अंकेक्षकों द्वारा इस तरह सामने आकर कड़ा रुख अपनाने की तारीफ भी हो रही है लेकिन अभी भी बहुत लंबी दूरी तय करनी है। अंकेक्षकों द्वारा सूचनाओं के कमजोर खुलासे पर भी गौर कीजिए। 
 
पीडब्ल्यू ने जहां वक्रांगी के महंगी धातुओं और आभूषण कारोबारों को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में कुछ ब्योरा देने की जहमत उठाई है, वहीं डेलॉयट ने केवल एक छोटा सा वक्तव्य जारी किया कि कंपनी ने अपने कुछ कारोबारों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी नहीं दी। यह आश्चर्य की बात है क्योंकि अंकेक्षकों ने इस्तीफा देने जैसा अतिवादी कदम उठाया है और उन्हे अंशधारकों को वास्तविक कारण बताने ही चाहिए। वे इसके लिए बाध्य हैं।  यह बात इसलिए और चौंकाती है क्योंकि डेलॉयट पिछले कई वर्ष से मनपसंद की अंकेक्षक रही है और उसकी पिछली किसी भी रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं रहा है। ऐसे में डेलॉयट को किसी भी गड़बड़ी के बारे में खुलकर अपनी बात कहनी चाहिए थी। आखिरकार कंपनी के अंशधारकों के पैसे का नुकसान हुआ है और उन्हें यह पता होना चाहिए कि अंकेक्षकों ने इस्तीफा क्यों दिया?
 
इसके अलावा जो नया अंकेक्षक आएगा वह भी यह जानना चाहेगा कि आखिर कंपनी ने कौन सी सूचना साझा करने से इनकार किया। विस्तृत जानकारी प्रदान करना सुशासन का ही एक  हिस्सा है।  अपने क्लाइंट की गोपनीयता और आचार संहिता का हवाला देना सही बचाव नहीं है क्योंकि संशोधित कंपनी अधिनियम के अधीन अंकेक्षकों को विस्तृत जानकारी देना जरूरी है। यह सच है कि भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के पास अब तक ऐसी सूचनाओं को लेकर कोई खाका नहीं है लेकिन अंकेक्षक जरूरी जानकारी छिपाने के लिए इस बात की आड़ भी नहीं ले सकते। 
 
कंपनियों की प्रतिक्रिया भी विचित्र है। उदाहरण के लिए मनपसंद ने अपना वह अंकेक्षक गंवाया है जो सन 2015 में प्रारंभिक पेशकश के वक्त से उसके साथ था लेकिन इसके बावजूद उसने इस घटना को मामूली बताया है। कंपनी ने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। वक्रांगी ने भी अपने अंकेक्षक के इस्तीफे को पुरानी घटना करार दिया है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि वह अंकेक्षक मानकों का पूरा अनुपालन करती है और वह अपने वक्तव्य में कंपनी के मामलात की एकदम सही तस्वीर पेश कर रही है। कंपनी ने अंकेक्षक द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में एक लफ्ज भी नहीं कहा। 
 
इन प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्टï है कि दोनों कंपनियों के बोर्ड ने अंकेक्षक के इस्तीफे जैसे अहम विषय को बहुत हल्के में लिया है। यह खराब कारोबारी प्रशासन का उदाहरण है। यह कंपनी अधिनियम और अक्टूबर 2017 में दी गई और सेबी द्वारा स्वीकृत उदय कोटक के नेतृत्व वाली कारोबारी प्रशासन से संबंधित समिति की रिपोर्ट की भावना के प्रतिकूल है। समिति ने कहा है, 'बेहतर पारदर्शिता की खातिर समिति का मानना है कि कंपनियों को अपनी अंकेक्षण फर्म के इस्तीफे की वजह उजागर करनी चाहिए। इतना ही नहीं अंकेक्षण फर्म को भी इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वह खुलासे की वजहों को सच्चाई से बयान करें।'
 
यह अच्छी बात है कि अंकेक्षक समुदाय सत्यम मामले के बाद प्रतिष्ठïा पर लगे दाग को गंभीरता से ले रहा है। परंतु उनके रुख में बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री के भाषण से आया। उन्होंने आईसीएआई की एक बैठक में पूछा था कि आखिर संस्थान को दंडात्मक कदम उठाने में इतने साल क्यों लगे जबकि करवंचकों की मदद करने वाले अंकेक्षकों के खिलाफ 1,400 से अधिक मामले लंबित हैं।  प्रधानमंत्री की इस बात के बाद कंपनी अधिनियम में संशोधन किया गया और अंकेक्षकों को अधिक जिम्मेदार बनाया गया। सत्यम मामले में सेबी ने पीडब्ल्यू के खिलाफ कदम उठाए और सरकार ने राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण के गठन के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी। इससे अंकेक्षण के क्षेत्र में स्वतंत्र नियामक का काम लिया जाएगा। आरबीआई भी अब फंसे हुए कर्ज की समस्या के बाद निगरानी बढ़ाई है।  वजह चाहे जो भी हो लेकिन अब अंकेक्षकों ने पहला कदम उठाया है। खुलासा करने की जरूरतों का ध्यान रखना भी बुरा नहीं कहा जाएगा। आखिरकार, सामान्य अंशधारक को हमेशा पीडि़त नहीं बनने देना चाहिए।
Keyword: auditor, CA, company,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के निर्णय से दूर होगी नकदी की किल्लत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.