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ठोस कदम का अभाव

संपादकीय /  June 13, 2018

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को एंड्र्यूज एयर फोर्स बेस पर उतरते ही ट्विटर पर घोषणा कर दी कि वह पहुंच चुके हैं। यात्रा लंबी रही लेकिन हर कोई अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस कर सकता है। उन्होंने यह भी लिखा कि अब उत्तर कोरिया की ओर से कोई परमाणु खतरा नहीं है। इस ट्वीट को कुछ ही घंटों में 35,000 से अधिक लोगों ने पसंद किया। इसे समझा जा सकता है क्योंकि राष्ट्रपति के समर्थकों के लिए उनकी जुबान ही काफी है।  उधर, उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने मंगलवार की शिखर बैठक को अपने नेता की कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया। चाहे जो भी हो, इसमें दो राय नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरियाई तानाशाह के बीच हाथ मिलाती और मुस्कराती तस्वीरें दोनों देशों के नेताओं के बीच के तनाव और परमाणु हमले करने की धमकी की तुलना में तो हर हाल में बेहतर हैं।  उस लिहाज से देखें तो अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरियाई नेता के बीच की मुलाकात ने एक नया प्रतीकात्मक अवसर तैयार किया है। इसका श्रेय तो ट्रंप और किम जोंग उन दोनों को देना ही होगा।

 
बहरहाल, कई ऐसी वजह भी हैं जिनके चलते कई लोग इस मुलाकात को कुछ खास नहीं मान रहे हैं। दरअसल दोनों नेताओं ने बमुश्किल एक पन्ने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और इसमें भी कुछ विशिष्टï उल्लेख नहीं किया गया था। उत्तर कोरिया ने परमाणु नि:शस्त्रीकरण का वादा किया लेकिन कोई ब्योरा नहीं दिया। उसने तो पहले जैसी प्रतिबद्घता भी नहीं जताई जिन्हें वह तोड़ चुका है। वह सन 1994 और 2005 में भी वादे कर चुका है लेकिन सब बेकार। अमेरिकी अधिकारियों ने बैठक के पहले कहा था कि वे जोर देंगे कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु अस्त्र जखीरे को पूरी तरह खत्म करे और उन्हें दोबारा हासिल करने की स्थिति में न हो। परंतु वक्तव्य में यह बात नजर ही नहीं आती। 
 
यह भी स्पष्टï हो गया है कि ट्रंप ने क्षणिक नायकत्व हासिल करने के क्रम में धड़ल्ले से ढेर सारे वादे कर दिए जबकि बदले में उन्हें कुछ भी ठोस हासिल नहीं हुआ। इस क्रम में उन्होंने एक बार फिर अपने सहयोगियों को चौंकाया। उदाहरण के लिए उन्होंने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त युद्घाभ्यास को निलंबित करने की घोषणा कर दी और कहा कि वह कवायद बहुत महंगी और भड़काऊ थी। आश्चर्य नहीं कि दक्षिण कोरिया इससे स्तब्ध रह गया क्योंकि अतीत में अमेरिका ने इस पर किसी समझौते से इनकार किया था। 
 
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका उत्तर कोरिया को सुरक्षा गारंटी प्रदान करेगा ताकि उसकी आशंकाएं दूर हो सकें। बहरहाल यह स्पष्टï नहीं हो सका है कि इस गारंटी में क्या-क्या शामिल होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो यह बात इस क्षेत्र में दक्षिण कोरिया और जापान को लेकर अमेरिका की पुरानी प्रतिबद्घता को किस तरह प्रभावित करेगी, यह स्पष्टï नहीं है। अमेरिका उन्हें सैन्य सुरक्षा देता आया है। सवाल यह भी है कि दक्षिण कोरिया में पदस्थ 28,000 अमेरिकी सैनिकों का क्या होगा?  अमेरिका की उदारता के विपरीत समझौते में उत्तर कोरिया के रुख को लेकर अस्पष्टïता का माहौल बना रहा। ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अतिउत्साह और दिखावे में विस्तृत ब्योरों को बाद के लिए छोड़ दिया जबकि होना इसका उलटा चाहिए था। इस प्रकरण का अंतिम निष्कर्ष यही है कि दोनों नेताओं का प्रचार तो खूब हुआ लेकिन कोई विश्वसनीय हल शायद ही नजर आ रहा है। हाथ मिलाने का घटनाक्रम ऐतिहासिक था लेकिन कुछ भी ठोस नजर नहीं आ रहा है।
 
Keyword: america, G7, canada, trump,,
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